भाजपा सरकार की योजनाओं की खुली पोल । तय सीमा 2022 तक नहीं हुआ आधा भी काम ।
रोजगार, आवास, पेयजल ,कृषि, पर्यावरण समेत 17 बुनियादी लक्ष्यों पर 50 प्रतिशत भी काम नहीं।
बीजेपी ने देश के लोगों को कई बड़े-बड़े सपनें दिखाए थे। “सबका साथ सबका विकास” के नारे पर विश्वास करके लोगो ने देश की सत्ता बीजेपी को सौपी । लेकिन आज बीजेपी न ही लोगो के भरोसे पर खरी उतरी और न ही अपने वादे पूरे किए।
लोगो के खाते में पन्द्र-पन्द्र लाख तो आने से रहें। इस सरकार ने पिछले सात सालों में मुख्य रूप से सतत विकास के 17 बुनियादी लक्ष्यों के काम भी पूरे नहीं किये हैं। इसमें मुख्य रूप से रोजगार , आवास, पेयजल, कृषि,पर्यावरण जैसी बुनियादी लक्ष्यों को निर्धारित किया गया था।
सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायर्नमेंट (सीएसई) की नई सालाना रिपोर्ट के अनुसार, जिन 17 बुनियादी लक्ष्यों को पूरा कर लेने की समय सीमा सरकार ने वर्ष 2022 तय किया था। अब 2022 के अंदर दो महीने बीत चुके हैं। लेकिन जब इन कामो का आकलन हुवा तो पता चला कि तय लक्ष्यों के 50 प्रतिशत भी काम पूरे नहीं हुए हैं।
इस रिपोर्ट के अनुसार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर जिंदगी मुहैया कराने में भी भारत का प्रदर्शन काफी खराब हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल भारत भूख को समाप्त करने, खाद्य सुरक्षा हासिल करने, लैंगिक समानता, लचीला बुनियादी ढांचा, समावेशी और टिकाऊ औद्योगीकरण का लक्ष्य हासिल करने में नाकाम रहा।
बताते चले कि, वर्ष 2015 में संयुक्त राष्ट्र के 192 सदस्य देशों ने धरती पर शांति और समृद्धि कायम करने के लिए ‘ सतत विकास का एजेंडा 2030 ‘ अपनाया था। वैश्विक भागीदारी के जरिये इस स्थिति को प्राप्त करने के लिए सतत विकास के मुख्य रूप से 17 लक्ष्य तय किए गए थे। लेकिन उन लक्ष्यों को हासिल करने में भारत पिछड़ता हुवा नजर आ रहा हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, सतत विकास लक्ष्य हासिल करने के मामले में भारत सभी दक्षिण एशियाई देशों से पीछे है। यहाँ तक कि केवल पाकिस्तान को छोड़कर अन्य सभी पड़ोसी देशों का प्रदर्शन भारत से बेहतर हैं।
भारत का कुल सतत विकास अंक 100 में से 66 हैं । इस सूची में पिछले साल के मुकाबले तीन पायदान फिसलकर भारत 120वें स्थान पर पहुंच गया। जबकि इसके पड़ोसी देश जैसे भूटान 75वें, श्रीलंका 87वें, नेपाल 96वें और बांग्लादेश 109वें पायदान हासिल कर भारत से बेहतर प्रदर्शन किया हैं।
आइए, कुछ तय लक्ष्यों के आंकड़े देखते है और समझते है कि हमारा देश कितनी तेजी से विकास की सीढ़ियां चढ़ रही हैं।
देश की अर्थव्यवस्था 2022-23 में 4 लाख करोड़ डॉलर पर पहुंचाने का लक्ष्य तय हुआ था, लेकिन यह 2.48 लाख करोड़ तक ही बढ़ी। हर नागरिक तक पाइपलाइन से पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन काम 45 फीसदी ही हुआ। श्रम शक्ति में महिलाओं को 30 प्रतिशत भागीदार बनाने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन जनवरी से मार्च 2020 की तिमाही में उनकी भागीदारी 17.3 प्रतिशत ही रही। 2022 तक 175 गीगावाट अक्षय ऊर्जा उत्पादन करना लक्ष्य रखा गया था लेकिन, 56% लक्ष्य ही हासिल हुई हैं। इस तरह के कई लक्ष्य है जिनकी तय समय सीमा समाप्त हो चुकी हैं। लेकिन काम पूरा नहीं हुआ हैं।
वहीं अगर भारत की राज्यों की बात करे तो गरीबी के मामले में यूपी, बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ व मध्य प्रदेश सबसे आगे हैं।
भुखमरी और कुपोषण के मामले रोकने में मेघालय, असम, गुजरात, महाराष्ट्र व पश्चिम बंगाल सबसे पीछे है ।
नागरिकों को पेयजल प्रदान कर पाने में राजस्थान, असम, पंजाब और अरुणाचल प्रदेश का रिकॉर्ड सबसे खराब है। यहां तक की इस सूची में उस दिल्ली का नाम सबसे ऊपर हैं। जहाँ की सरकार प्रदेश की उच्चतम व्यवस्था की वाह-वाही करते थकते नहीं हैं।






