MODI का फूल फॉर्म के रूप में लोग लिख रहे हैं – “Murder of Democracy in India”. पूरी दुनिया में भारत सरकार की आलोचना हो रही है. लोकतंत्र में तानाशाही का सबसे ज्वलंत उदाहरन सोनम वांगचुक को जबरन जंतर मंतर से प्रशाशन से उठवा कर ले जाना है. ये सरकार 2014 से ही जनता के किसी भी मुद्दे पर नरम नही रही. जब से भारतीय जनता पार्टी केंद्र में काबिज हुई जनता को पैरो तले कुचलने का पूरा प्रयास करती रही. यह पार्टी किसी की नही सुन रही है. लोकतंत्र में असहमति का उत्तर संवाद से दिया जाता है, दमन से नहीं। जब किसी आंदोलन, प्रदर्शन या विरोध को बलपूर्वक रोकने, प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने या आवाज़ दबाने के आरोप लगते हैं, तो लोकतांत्रिक मूल्यों पर सवाल उठते हैं।
उदाहरण के तौर पर, सोनम वांगचुक और उनके साथियों को दिल्ली में जंतर-मंतर की ओर मार्च के दौरान पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की घटना को कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों ने लोकतांत्रिक अधिकारों पर अंकुश का उदाहरण बताया। वहीं प्रशासन का कहना था कि कार्रवाई कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई थी। लेकिन ये हर बार का यही प्रक्रिया दोहराना बीजेपी के वास्तविक चरित्र को उजागर कर रही है. किसान आंदोलन में दिल्ली की सीमाओं पर बैरिकेडिंग, इंटरनेट प्रतिबंध और प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई को लेकर भी सरकार का यही रवैया रहा. लम्बे समय तक केवल और केवल किसान आन्दोलन को दबाने का प्रयास किया जाता रहा. इसी प्रकार 2023 में पहलवानों का जंतर-मंतर आंदोलन इसमें भी प्रदर्शनकारियों को जबरन हटाने और हिरासत में लेने की तस्वीरों ने मोदी का यही रूप दिखाया . कई बार विभिन्न राज्यों में इंटरनेट बंदी करवाना ये आम बात हो गयी है. कई विरोध प्रदर्शनों के दौरान इंटरनेट सेवाएँ बंद किए जाने पर नागरिक स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठे। यूएपीए और राजद्रोह जैसे कानूनों के उपयोग को लेकर भी समय-समय पर विपक्ष, मानवाधिकार संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों ने सरकार के तानाशाही रवैया को आइना दिखाया है. यही नही सरकार ने अपनी पार्टी के अन्दर भी तानाशाही वयवहार ही रखा है . आपको कुछ बिल जो संसद के सदनों से पास हुए सभी के सभी बिना चर्चा परिचर्चा के ही पास करवाए गये . कोई कोई बिल तो आधेघंटे में संसद के दोनों सदनों से पास करवाए गये. कृषि कानून, 2020 , नागरिकता संशोधन अधिनियम CAA, 2019 , आधार अधिनियम यानि Money Bill, 2016 , जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 , दिल्ली सेवाएँ विधेयक, 2023 ,नए आपराधिक कानून BNS, BNSS, BSA, 2023 ऐसे न जाने और भी बिल है जिसके लागु किये जाने में लोकतान्त्रिक प्रक्रिया का घोर उलंघन हुआ है .
सोनम वांगचुक क्या चाहते थे ? सोनम वांगचुक का हालिया जंतर-मंतर आंदोलन मुख्यतः शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा सुधार से जुड़ा था । उनकी प्रमुख मांगें थीं की केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे दे . उनका कहना था कि प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। परीक्षा प्रणाली में सुधार होने चाहिए. NEET सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने, तथा छात्रों का विश्वास बहाल करने की मांग। शांतिपूर्ण प्रदर्शन और सरकार से संवाद हो. उन्होंने सरकार से आंदोलनकारियों के साथ बातचीत करने और उनकी मांगों पर विचार करने की अपील की। मगर ये मोदी सरकार को रास नही आया. तानाशाह प्रवृति का दुनिया में थू थू हो रहा है . ऑस्ट्रेलिया में कुछ प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री मोदी के विरोध में “Murder of Democracy in India” जैसे नारे या पोस्टर इस्तेमाल किए . सोशल मीडिया में MODI का फूल फॉर्म के रूप में लोग लिख रहे हैं . फिर से सुनिए “Murder of Democracy in India” . ये सच है . आप बातो को भारत में शाशन प्रशाशन के बल पर दबा सकते है मगर दुनिया में जो बदनामी हो रही है उसका क्या करेंगे ? आप सरकार के इस रवैये के बारे में क्या विचार रखते है ? कमेंट बॉक्स में जरुर बताये . सरकार आन्दोलन से इतनी भय क्यूँ रखती है ये भी एक चर्चा का विषय है . फ़िलहाल देश के शानदार वैज्ञानिक सोनम वांगचुक के अच्छी सेहत की आशा करते है .







