जन शिक्षा अधिकार मंच कैथल को मिला आश्वाशन। आखिर और कितने दिन चलेगा आंदोलन?

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बीते दिनों जन शिक्षा अधिकार मंच कैथल का एक प्रतिनिधिमंडल जिला सहसंयोजक बलबीर सिंह के नेतृत्व में प्रतिपक्ष नेता भुपेंद्र सिंह हुड्डा व जयप्रकाश से मिला। दोनों नेताओं ने इसका तत्काल समाधान करने का आश्वासन दिया तथा प्रतिपक्ष नेता चौधरी भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कैथल के पुलिस अधीक्षक से भी इस संबंध में बातचीत की और इस मसले को तुरंत निपटाने को कहा।

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धरने के तीन सौ चौतीसवें दिन जन शिक्षा अधिकार मंच कैथल का एक प्रतिनिधिमंडल जिला सहसंयोजक बलबीर सिंह के नेतृत्व में प्रतिपक्ष नेता भुपेंद्र सिंह हुड्डा व जयप्रकाश से मिला।

प्रतिनिधि मंडल में सुरेश द्रविड़ , राजेश बैनिवाल, रमेश हरित, रामपाल शर्मा, रामेश्वर किठाना, राजबीर पाई, प्रेम चंद आदि उपस्थित रहे।

उन्होंने मूलनिवासी सुरेश द्रविड़ पर दर्ज एफआईआर को रद्द करवाने को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री से इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठाने की भी मांग की।

बताते चले की, जिला कैथल में बीते वर्ष यानी चार सितंबर, दो हजार बाईस को हरियाणा सरकार की शिक्षा विरोधी नीतियों के विरोध में जन शिक्षा अधिकार मंच कैथल का गठन किया गया था।

इसमें कुल छप्पन संगठनो के प्रतिनिधि व कार्यकर्ता शामिल हुए थे। राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ कैथल के जिला प्रधान होने के नाते सुरेश द्रविड़ भी इस मंच के साथ जुड़े और आठ सितंबर, दो हजार बाइस को राज्य मंत्री कमलेश डांढा के कैथल स्थित आवास पर प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया।

इस प्रदर्शन में कई संगठनों के प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया और प्रदर्शन के दौरान लोगो ने सरकार की जन विरोधी नीतियों पर अपनी बात रखी।

शिक्षक सुरेश द्रविड़ ने भी आठ सितंबर दो हजार बाइस को जन शिक्षा अधिकार मंच कैथल द्वारा नई शिक्षा नीति के विरोध में तथा बंद किए गए कन्या स्कूलों को दोबारा खुलवाने के लिए और चिराग योजना के विरोध में कमलेश डांढा राज्य मंत्री हरियाणा सरकार के आवास पर प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया था।

उन्होंने निजीकरण के विरोध में अपनी बात कही और सरकार के जनविरोधी कदमों का विरोध किया था ।

बताते चले की सुरेश द्रविड़ ने केवल सरकार से ही नाराजगी नहीं जताई थी , बल्कि शिक्षक वर्ग को भी शिक्षा व्यवस्था के बूरे हालात के लिए जिम्मेदार ठहराया था, उन्होंने पुरी व्यवस्था के संबंध में बातचीत की थी और भारतीय संविधान के अनुसार शिक्षा व्यवस्था की कमियों को उजागर भी किया था। जिसके लिए उनपर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कर दिया गया।

बताते चले की, निजीकरण का विरोध करना तथा संविधान पर बातचीत करना किसी भी तरीके से देशद्रोह नहीं हो सकता और एक सच्चे लोकतंत्र में राजद्रोह होना भी नहीं चाहिए।

सुरेश द्रविड़ की भावना, व्यवस्था के सुधार के लिए थी और व्यवस्था में सुधार से ही देश का विकास होगा। उनकी मंशा किसी भी प्रकार से देश के खिलाफ नहीं थी।

इसके अलावा सुरेश द्रविड़ बहुत पहले से अनेक सामाजिक संगठनों से जुड़कर सामाजिक कार्य करते आए है। सुरेश द्रविड़ एक सामाजिक कार्यकर्ता है और अनेक सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय पहले से रखते आए है।

लेकिन आठ सितंबर के संबोधन का एक वीडियो वायरल हो गया था, जिसके कारण पहले उन्हें बारह सितंबर , दो हजार बाईस को निलम्बित किया गया । उसके बाद उन्नीस सितंबर, दो हजार बाईस को जांच लम्बित बहाल कर दिया गया।

लेकिन इसके ठीक चार दिन बाद यानी तेईस सितंबर को कैथल पुलिस द्वारा सुरेश द्रविड़ के खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा दर्ज कर दिया गया । उसके बाद शहर में कई बड़े प्रदर्शन किए गए तथा अठाईस सितंबर, दो हजार बाईस से लगातार दिन रात का पड़ाव जिला सचिवालय कैथल में जारी है

अब इस पड़ाव को करीब साढ़े तीन सौ दिन होने को है, लेकिन शासन – प्रशासन ने अभी तक इस समस्या का हल नहीं किया, अब यह एक सामाजिक मुद्दा भी बन गया है।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सुरेश द्रविड़ को इस झुठे मुकदमे में जानबूझकर फंसाया गया है क्योंकि उस दिन बहुत सारे साथियों ने अपनी पानी बाते रखी थी, लेकिन सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज न करके केवल सुरेश द्रविड़ के खिलाफ ही मुकदमा दर्ज किया गया। जो कही न कहीं किसी बड़ी साजिश का ही संकेत है ।

बताते चले की सुरेश द्रविड़ जहां किसान आंदोलन में सक्रिय रहे है, वहीं वे अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और किसान वर्ग के साथ साथ कर्मचारी संगठनों के मध्य आपसी एकता की भूमिका निभाई है, जो मौजूदा सरकार को हजम नहीं हो रही।

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