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मौलाना आज़ाद नेशनल फेलोशिप को केंद्र सरकार ने किया बंद।
विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति से क्यों वंचित कर रही हैं सरकार?
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बीते गुरुवार लोकसभा में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने बताया कि अल्पसंख्यक समुदायों के रिसर्च स्कॉलर्स को मिलने वाली मौलाना आज़ाद नेशनल फेलोशिप को इस शैक्षणिक वर्ष से बंद किया जा रहा है। जिसके बाद कई अल्पसंख्यक संगठनों और नेताओं ने इस फैसले का विरोध किया।
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केंद्र सरकार ने अल्पसंख्यक समुदायों के छात्रों को मिलने वाली मौलाना आज़ाद नेशनल फेलोशिप को इस शैक्षणिक वर्ष से बंद करने का फैसला किया है। जिसकी जानकारी बीते गुरुवार लोकसभा में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने दिया हैं।
अल्पसंख्यक मंत्रालय संभाल रहीं केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने एमएएनएफ (मौलाना आज़ाद नेशनल फेलोशिप) को बंद करने के फैसले पर कहा की, ‘चूंकि एमएएनएफ योजना सरकार द्वारा लागू उच्च शिक्षा के लिए कई अन्य फेलोशिप योजनाओं के साथ ओवरलैप करती है और अल्पसंख्यक छात्रों को पहले से ही ऐसी योजनाओं के तहत कवर किया गया है, इसलिए सरकार ने इस शैक्षणिक वर्ष यानी 2022-23 से एमएएनएफ योजना को बंद करने का फैसला किया है।’
बताते चलें कि इस फेलोशिप को सच्चर समिति की सिफारिशों को लागू करने के तौर पर यूपीए सरकार के दौरान शुरू किया गया था। जिसे अब वर्तमान सरकार द्वारा बंद करने का फैसला लिया गया गया।
सरकार के इस फैसले से सैकड़ो छात्र प्रभावित होंगे। लोगो का मानना है कि, यह नाइंसाफी है। कई शोधार्थी इस कदम से आगे पढ़ने का अवसर खो देंगे।
नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन के जामिया मिलिया इस्लामिया के अध्यक्ष एनएस अब्दुल हमीद ने कहा कि, ‘ यह मुद्दा कई अल्पसंख्यक छात्रों को प्रभावित करेगा जिन्हें ओबीसी नहीं माना जाता है। ‘
यह पहली बार नहीं हुवा हैं जब केंद्र ने देश के मूलनिवासी छात्रों का हक छिनने का काम किया हैं।
मालूम हो कि, पिछले महीने सरकार ने एक आदेश में कहा था कि अब से पहली से आठवीं कक्षा तक के अल्पसंख्यक छात्रों को प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप नहीं दी जाएगी।
शिक्षा का अधिकार क़ानून का हवाला देते हुए केंद्र सरकार ने एक नोटिस जारी करते हुए कहा था कि, “वह इस क़ानून के तहत पहली से आठवीं कक्षा तक के छात्रों को अनिवार्य शिक्षा प्रदान कर रही है, इसलिए स्कॉलरशिप दिए जाने की ज़रूरत नहीं है। “








