बिहार में जदयू को कम सीटें मिलने के बावजूद भी बीजेपी ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाया। ऐसे में बिहार विधानसभा का पहला सत्र आयोजित किया गया। यह निर्वाचित विधायकों की शपथ ग्रहण का सत्र था। लेकिन यह सत्र हंगामेदार साबित हुआ।
बिहार विधानसभा के इस सत्र ने एक ऐसे मुद्दे को पुनः चर्चा में लाया है जिसको अब बीजेपी भुनाना चाहती है।
एआईएमआईएम के विधायक अख़्तरुल ईमान के शपथ पढ़ने के बाद जो हुआ उसे बीजेपी ने आदतन मुद्दा बनाया। कई निजी टीवी चैनल भी उसी लाइन पर बात करते दिखाई दिए।
आइये बताते हैं क्या हुआ।
एआईएमआईएम पार्टी के निर्वाचित विधायक अख्तरुल ईमान ने शपथ लेने के पूर्व प्रोटेम स्पीकर जीतन राम मांझी को मांगी की उनके शपथ में वे हिंदुस्तान इस शब्द के जगह भारत के संविधान में लिखे “भारत” शब्द को पढ़ना चाहेंगे।
इसपर प्रोटेम स्पीकर जीतन राम मांझी ने कहा संविधान तो पूर्वोत्तर से चलते आ रहा है यह नयी बात नहीं है, सब लोग तो इसी नाम से लेते हैं।
लेकिन इसकी प्रतिक्रिया देते हुए विधायक अख़्तरुल ईमान ने कहा की संविधान में भारत लिखा है मैं यही कहना चाहता हूँ। प्रोटेम स्पीकर की अनुमति लेकर उन्होंने अपनी प्रतिज्ञा ली।
इसके बाद इस बात को लेकर बीजेपी और जेडीयू दोनों ने बड़ा हंगामा किया जैसे की भारत को भारत कहने से विधायक अख़्तरुल ईमान ने कोई देशद्रोह किया हो।
एक मुस्लिम विधायक द्वारा भारत को भारत कहने से बौखलाए बीजेपी के विधायक नीरज कुमार बबलू की जबान यहाँ तक फिसल गयी की इस बीजेपी विधायक ने कह दिया जिनको हिंदुस्तान बोलने में दिक़्क़त हो रही है, उन्हें पाकिस्तान चले जाना चाहिए।
इस पर अख्तरुल ईमान ने कहा कि सविधान में अगर इस देश को “भारत” कहा गया है, तो भारत को भारत बोलने में क्या दिक़्क़त है?
आपको बता दें की बामसेफ और मूलनिवासी संघ ने अपने अधिवेशनों में “भारत को हिन्दुस्तान कहना राष्ट्रद्रोह है” इस विषय पर देश भर में चर्चा की है। इन अधिवेशनों में शामिल वक्ताओं का मानना रहा है की संविधान में भारत लिखा है तो यही कहना चाहिए। क्योंकि भारत को भारत यह नाम बहुत ही सोच समझ कर लिखा गया है।
सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं का मानना है की बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने धार्मिक और जातीय ध्रुवीकरण के आधार पर ही इस देश में राज किया है। ऐसे में बीजेपी इस मुद्दे को मुस्लिम विरोधी चर्चा को छेड़कर आम लोगों का हिन्दुकरण की भावना तेज करके धार्मिक ध्रुवीकरण करना चाहती है।
अन्य पिछड़ा वर्ग, संविधानिक अधिकार एवं जातिगत जनगणना।
ओबीसी के बारे में जानना है तो यह वीडियो जरूर देखिये। मू प्रदीप ढोबले ( लेखक, सामाजिक चिंतक एवं ओबीसी सेवा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष)
इनके साथ लाइव चर्चा।







