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बीते पांच अक्टूबर को दीक्षाभूमि नागपुर में छियासठवां धम्म चक्र प्रवर्तन दिवस की हुई सुरुआत।
देश-विदेश से लाखो लोगो ने किया सहभग।
बीते पांच अक्टूबर, दो हजार बाईस को हर साल की भांति इस साल भी सम्राट अशोक विजयदशमी के उपलक्ष में नागपुर दीक्षाभूमि पर लाखों की संख्या में आये मूलनिवासीयो ने बुद्ध धम्म में वापसी की। इस छियासठवां धम्म चक्र प्रवर्तन दिवस समारोह में देश भर से लाखों लोग शामिल हुए।
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दीक्षाभूमि नागपुर में छियासठवां धम्म चक्र प्रवर्तन दिवस समारोह में देश के कोने-कोने से आए मूलनिवासीयों ने बाबा साहेब द्वारा अपने अनुयायियों को दी गयी बाईस प्रतिज्ञाओं को दोहराते हुए बुद्ध धम्म में वापसी की।
बीते पांच अक्टूबर को भारत के कोने- कोने जैसे झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, हरियाणा,पंजाब, उत्तरप्रदेश, बिहार, तेलंगाना, आंध्रा प्रदेश, कर्नाटक आदि से लोग दीक्षाभूमि नागपुर पहुंचे, जहा बौद्ध धर्म का एक प्रमुख केन्द्र है। यहाँ बौद्ध धर्म की पुनरूत्थान हुआ है।
इसी जगह बोधिसत्त्व बाबा साहेब डॉ॰ भीमराव आंबेडकर ने चौदह अक्टूबर उन्नीस सौ छप्पन विजयदशमी के दिन महास्थविर चंद्रमणी से बौद्ध धम्म की दीक्षा लेकर अपने पांच लाख से अधिक अनुयायिओं को बौद्ध धर्म की दीक्षा दी थी। त्रिशरण, पंचशील और अपनी बाईस प्रतिज्ञाएँ देकर डॉ॰ आंबेडकर ने हिंदू मूलनिवासीयो का धर्मपरिवर्तन किया। अगले दिन फिर यानी पनद्रह अक्टूबर, उन्नीस सौ छप्पन को पांच लाख से अधिक लोगों को बौद्ध धम्म की दीक्षा दी और स्वयं भी फिर से दीक्षीत हुए।
बुद्ध की इस पावन धरती पर देश तथा विदेश से हर साल लगभग पच्चीस लाख से अधिक आंबेडकरवादी और बौद्ध अनुयायी आते हैं। हर साल विजयदशमी को यहाँ हजारों की संख्या में लोग बौद्ध धर्म में परावर्तित होते हैं।
बताते चलें कि, बीते पांच अक्टूबर दो हजार बाईस, सम्राट अशोक विजयदशमी के दिन नागपुर में तेज बारिश होने के बाद भी लोगों की लंबी-लंबी कतारें बनी रही । बाबा साहेब अमर रहे के नारों के साथ लोग आगे बढ़ रहे थे।
दीक्षाभूमि में बाबा साहब समेत मूलनिवासी महापुरुषों की विजय की किताबों के स्टोर्स लगाए गये थे। दीक्षाभूमि नागपुर से वापस आते समय लोगों ने किताबे, बाबासाहेब और गौतम बौद्ध की स्टेचू आदि खरीदी ।
इस समारोह में देश के कोने-कोने से आये बाबा साहेब के अनुयाई में युवा , महिला बच्चे, बूढ़े- बुजुर्ग आदि लोग शामिल थे। इनलोगो ने दीक्षाभूमि के अंदर जाकर बाबा साहब की अस्थियों को नमन किया साथ ही बाबा साहब को याद किया।
लोगो ने पूरी जोश के साथ बाबा साहब और गौतम बुद्ध की जय जयकार की, दीक्षाभूमि पर बड़े-बड़े स्टेज कार्यक्रम भी चलाये गए और दूरदराज से आए विद्यार्थी अपने कला नाटक के माध्यम से लोगों को मूलनिवासी सभ्यता का संदेश भी दिया। इस समारोह में आये लोगो को मूलनिवासी संघ, बामसेफ,समता सैनिक दल आदि मूलनिवासी समाज के संगठनो अपनी सेवाएं दी।







