नई शिक्षा नीति के खिलाफ मूलनिवासी संघ ने खोला मोर्चा

केंद्र की मोदी सरकार ने हाल ही में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की है। जो षड्यंत्र पूर्वक मूलनिवासी बहुजन समाज को शिक्षा से वंचित रखने के लिए लाई गई है। लेकिन इस शिक्षा नीति के विरोध में अब मूलनिवासी विद्यार्थी संघ और मूलनिवासी संघ ने देशव्यापी आंदोलन छेडा है। जिसके चलते 19 अक्तूबर को देश के सभी जिलाधिकारीयों के द्वारा महामहिम राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा गया। मध्यप्रदेश के खंडवा में भी मूलनिवासी संघ के कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया।

इस ज्ञापन में नई शिक्षा नीति को समाप्त करने की शिफारस की गई है। साथ ही 1966 में प्रस्तुत की गई डॉक्टर कोठारी शिक्षा नीति को लागू करने का निवेदन किया गया। इसी के साथ 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए अनिवार्य और निःशुल्क शिक्षा लागू करने की विनती की गई। तथा, शिक्षा का राष्ट्रीयकरण कर पूरे देश में एक समान शिक्षा लागू करवाने के लिए ज्ञापन में ध्यानाकर्षण किया गया।

वर्तमान शिक्षा नीति के अनुसार ICSE, CBSE और स्टेट बोर्डों के पाठ्यक्रम में भीन्नता है। लेकिन उच्च शिक्षा की प्रवेश परीक्षाओं में एक ही पाठ्यक्रम को आधार माना जाता है। इस लिए शिक्षा की एकरूपता पर ध्यान केंद्रित करने की मांग मूलनिवासी विद्यार्थी संघ ने की है।

केंद्र सरकार ने इसी साल अगस्त महिने में नई शिक्षा नीति लागू की है। जिसमें स्कुली शिक्षा , उच्च शिक्षा, वयस्क शिक्षा, भारतीय भाषाओं को बढावा, कला तथा तकनीकी शिक्षा का एकीकरण करणे का प्रावधान किया गया है। लेकिन यह शिक्षा पद्धती मूलनिवासी बहुजन समाज के लिए घातक है। जिससे दबे-कुचले और गरीब तबके के लोग शिक्षा से वंचित रह जाएगे। इतना ही नहीं वे उच्च शिक्षा हासिल कर पाने में अक्षम होगे।

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