तीन कृषि कानूनों को रद्द करने हेतु भारत में चल रहे किसान आंदोलन को देश विदेश से समर्थन मिल रहा है। विदेश के कई लोगों ने अपने सोशल मीडिया हैंडल द्वारा अपने विचार इस बारे में व्यक्त किये हैं। ट्विटर पर कई लोगों ने इस बारे में लिखा।
कैनेडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने अपने एक वीडियो टॉक में भी इसके बारे में कहा था। उसके बाद भारत सरकार से कडी प्रतिक्रिया आयी। पूरे विश्वभर में चर्चा हुई। खास करके सिखों से संबंधित संगठन इस किसान आंदोलन के समर्थन में खडे हो गए। लेकिन इसके बाद ट्वीटर पर आंतरराष्ट्रीय पाॅपस्टार रिहाना और आंतराष्ट्रीय जलवायू परिवर्तन आंदोलन कार्यकर्ता ग्रेटा थन बर्ग के द्वारा लिखे ट्वीट से भारत समेत पुरी दुनिया में खलबली मच गयी।
इसमें ग्रेटा थनबर्ग के ट्वीट को और उसके साथ शेयर किए गए एक टूलकीट को भारत सरकार द्वारा गंभीरता से लिया गया। दिल्ली पुलिस ने टूलकीट के बारे में जांच भी शुरु की।
जाहिर है ग्रेटा थनबर्ग की ओर से शेयर किए गए टूलकिट पर दिल्ली पुलिस की कारवाई के कारण देशभर में बवाल मचा हुवा है।
इस टूलकीट के बारे में लोगों में अभी भी संभ्रम है कि यह क्या है। और जिनपर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की गई वह किन आधार पर की गई? इस लेख में इसी बारे में चर्चा की गयी है। पढ़ें और अपनी प्रतिक्रिया भी दें।
आपको बतादें कि टूलकीट शब्द सरकारी और गैरसरकारी अर्थात एनजीओ द्वारा अपने प्रशिक्षण साहित्यों के लिए किया गया एक प्रसिध्द शब्द है। जैसे घर में जरुरी काम के लिए हथौडी, कीले, स्क्रू, स्क्रू ड्राईवर, ड्रील मशीन आदि साहित्य का एक बक्सा तैयार रखते हैं उसे टूलकीट कहा जाता है।
आपको बतादें कि किसी भी गाडी के साथ मिलने वाले जरुरी उपकरण और लिखीत यूजर मैन्यूअल एकप्रकार से टूलकीट ही होता है।
ठीक इसी प्रकार से सरकारी और गैरसरकारी संस्थानों के किसी अभियान को पूरा करने के लिए इसके नेतृत्व, कार्यकर्ता और स्वयंसेवकों के लिए टूलकीट तैयार किया जाता है।
इसमें लेख, वीडियो, आडियो, फोटो, खेल, गाने, आदि का उपयोग किया जाता है। अर्थात यह टूलकिट उन तमाम जानकारियों का संग्रह होता है जिससे किसी मुद्दे को समझने और उसपर प्रभावीरुप से अंमल करने में सहायता होती है।
यह टूलकीट आॅनलाईन अथवा आॅफलाइन भी हो सकता है। आॅनलाईन टूलकीट में तुरंत दुरुस्ती करता संभव होता है। तथा से अपने कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकोंतक पहूचांना आसान होता है।
जैसे कि आपको बताया कि टूलकिटनुमा साहित्य अलग-अलग शब्दों में सरकारी और गैरसरकारी संस्थाओं द्वारा उपयोग में लाया जाता है। अनेकों राजनीतिक पार्टियां, कंपनियां, शिक्षण संस्थाएं और सामाजिक संगठन इसे अपने लिए तैयार करवाते हैं। इस प्रकार के टूलकिट से सिर्फ प्लानिंग ही नहीं, किसी प्रॉजेक्ट पर तालमेल में भी मदद मिलती है।
इसी तरह से किसी आंदोलन में इसका ऑनलाइन और ऑफलाइन इस्तेमाल करके समर्थकों को जुटाया जाता है।
आपको बतादें कि लिखित आॅफलाइन टूलकिट का उपयोग कई वर्षों से किया जाता है। अभी हाल ही में हांगकांग में हुए प्रदर्शन और अमेरिका में ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ मुवमेंट के दौरान आॅनलाइन टूलकीट की अधीक चर्चा हुई।
आपको बता दें कि 2011 में अमेरिका में बढ़ती आर्थिक गैरबराबरी के विरोध में ऑक्युपाय वॉल स्ट्रीट आंदोलन हुआ था, जिसमें टूलकिट का इस्तेमाल किया गया था।
गुगल ड्राईव का उपयोग इसप्रकार के टूलकीट को तैयार करने और मेंनटेंन करने के लिए होता है। क्योंकि यह सभी के लिए खुला भी रखा जा सकता है तथा इसे कुछ ही लोगों तक इमेल के माध्यम से सीमित रखा जा सकता है और यह फ्री भी है। आॅनलाइन टूलकीट का मक्सद होता है कि यह सभी जानकारी इस्तेमालकर्ता को तुरंत मिलें।
सरकारी, गैरसरकारी, सामाजिक, राजनैतिक, शैक्षिक संस्थाओं के अपने अपने मक्सद होते हैं और उसप्रकार से टूलकीट में सहित्य होता है।
उदाहरण के लिए अगर स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं से संबंधित टूलकीट है तो उन्हें बीमारी, संक्रमण, जागरुकता, दवाई, और बचाव आदि की जानकारी दी जाती है। इसमें क्या, कब, कहां, क्यों, कैसे करें इन सवालोें के साथ साथ क्या न करें इसकी भी जानकारी इसमें दी जाती है।
जाहिर है कि अगर आंदोलक किसी मुद्दे पर जनमत तैयार कर सरकार पर दबाव बनाकर कोई बदलाव करना चाहते हैं तो उनका टकराव सबसे पहले, प्रशासन, पुलिस और मीडिया के साथ होता है। जो शांततापूर्ण तरीके से आंदोलन को चलाते हैं उनके टूलकीट में प्रशासन, पुलिस और मीडिया से संबंधित वह जानकारी होती है जिससे कानून सुव्यवस्था न बिगडें और बदलाव भी संभव हो।
बदलाव आंदोलकों के टूलकीट में तमाम तरह की जानकारी होती है। साथ ही मीटिंगे कब करें, कब न करें, कहां करें कहां नह करें, स्वरुप कैसे रखें, पुलिस की कारवाई से कैसे बचें अर्थात कानून का उल्लंघन न हो इसके लिए क्या करें। इन बातों का जिक्र तो होता ही है।
साथ ही सोशल मीडिया के उपलब्ध प्लैटफार्मस जैसे कि ट्वीटर, फेसबुक, इमेल, यूटयूब, वीमीयो, मोबाइल मैसेज, ब्लाॅग आदि को कैसे इस्तेमाल में लाएं, हैशटैग, शेयर के तरिके आदि के बारे में बताया जाता है।
ग्रेटा थनबर्ग एक आंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त सामाजिक कार्यकर्ता है। जाहिर है कि उन्हें और उनके साथ कार्य कर रहे संस्थाओं और कार्यकर्ताओं को इसके बारे जानकारी है।
खबर के अनुसार दिल्ली पुलिस ने किसान आंदोलन के लिए ‘टूलकिट’ बनाने वालों के खिलाफ राष्ट्रद्रोह, आपराधिक साजिश और नफरत फैलाने की धाराओं में केस दर्ज किया। इस टूलकिट को पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने शेयर किया था। दिल्ली पुलिस को उसी टूलकिट से आपत्ति है। इस टूलकीट को 26 जनवरी को दिल्ली के लाल किले में हुए असमर्थनीय हिंसक कृति सेे जोड़कर देखा जा रहा है।
अब जानना जरुरी है कि आखिर इस टूलकिट का किसान आंदोलन से क्या संबंध है?
जैसेकि आपको जानकारी हो गई होगी कि यह किसान आंदोलन के समर्थन में बनाया गया यह टूलकीट आॅनलाइन दस्तावेज हैं। इसमें जो ट्विटर पर किसानों के लिए समर्थन जुटाने के लिए और विदेश में रह रहे नागरिकों द्वारा भारतीय दूतावासों के बाहर विरोध प्रदर्शन करने जैसे कार्यों का सुझाव देता है।
स्वीडन की 18 साल की जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने भारत में चल रहे किसान आंदोलन को लेकर समर्थन दिखाते हुए इसे ट्वीट किया था।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, एड नीकिता जैकब, शांतनु मुलुक और दिशा रवि यह इस टूलकिट डाॅक्यूमेंट तैयार करने में शामिल थे और ‘खालिस्तानी समर्थक तत्वों’ के सीधे संपर्क में थे। दिशा रवि की गिरफ्तारी हो चुकी है। दूसरी ओर एड निकिता जैकब और शांतनु मुलुक की गिरफतारी पर हाइकोर्ट द्वारा कुछ समय के लिए राहत मिल गयी है।
आपको यह भी बता दें कि 22 वर्षीय पर्यावरण कार्यकर्ता दिशा रवि ने गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका की है। इस याचिका में उसने कहा है कि दिल्ली पुलिस को उसके खिलाफ गई जांच को सेल, मीडिया सहित किसी भी तीसरे पक्ष को उसके द्वारा निजी चैट, संचार की कथित सामग्री सहित किसी भी जांच सामग्री को लीक करने से रोकने की मांग की। इस दायर याचिका में सूचना और प्रसारण मंत्रालय को टाइम्स नाउ, इंडिया टुडे और न्यूज 18 के खिलाफ उचित कार्रवाई करने के निर्देश देने की भी मांग की गई है।
जाते जाते आपको यह बता दें कि इन कार्यकर्ताओं के समर्थन में देशभर के विभिन्न गणमान्य लोगों ने अपनी प्रतिक्रियाएं व्यक्त की है। इस बात को आप ध्यान में रखें कि यह देश युवा देश है। युवाओं में हो रहे इस बदलाव को जमझना जरुरी है।






