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मामला उत्तर प्रदेश के बदायूं स्थित ज़िला महिला अस्पताल का हैं। जहा बीते तीस दिसंबर, दो हजार तेईस को एक गर्भवती महिला अस्पताल पहुंची, लेकिन अस्पताल के कर्मचारियों ने महिला को भर्ती करने से मना कर दिया। जिससे थोड़ी देर बाद महिला ने अस्पताल के बाहर ही बच्चे को जन्म दे दिया, लेकिन इलाज के अभाव और ठंड के कारण बच्चे की मौत हो गई।
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इस देश में अनेकों समस्याएं हैं, जिनमे से एक बेहतर इलाज की कमी भी शामिल हैं। जिससे हर साल न जाने कितने गरीबों की जान जाती हैं ।
भारत के सरकारी अस्पतालों में बेहतर इलाज की कमी की खबरे हम आए दिन सुनते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के जिला महिला अस्पताल का यह मामला एक गंभीर और बेहद ही घृणित मामला हैं।
मामला उत्तर प्रदेश के बदायूं स्थित ज़िला महिला अस्पताल का हैं। जहा अस्पताल कर्मचारियों पर गर्भवती महिला को भर्ती न करने का आरोप लगा हैं।
आरोप है कि अस्पताल के कर्मचारियों ने महिला के परिजनों से जांच के लिए पांच हजार (5,000) रुपये की मांग की थी।
पैसे नहीं होने के कारण उन्होंने महिला को भर्ती करने से इनकार कर दिया। मजबूरी में गर्भवती महिला को अस्पताल गेट के बाहर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा। जिसके बाद इलाज के अभाव और ठंड के कारण बच्चे की मौत हो गई।
मिली जानकारी के मुताबिक महिला का नाम नीलम है, जो बदायूं जिले के कबूलपुरा मोहल्ले की रहने वाली हैं।
नीलम के परिजनों के मुताबिक, बीते शनिवार यानी तीस दिसंबर, दो हजार तेईस की शाम को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर वे उन्हें जिला महिला अस्पताल ले गए। लेकिन अस्पताल में उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया।
नीलम के पति रवि ने आरोप लगाया की, जब वे वहां पहुंचे तब अस्पताल में कोई डॉक्टर उपलब्ध नहीं था और वहां के कर्मचारियों ने उनकी पत्नी को भर्ती करने से इनकार कर दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि बहस के बाद अस्पताल के कर्मचारियों ने उनसे जांच के लिए पांच हजार (5,000) रुपये देने को कहा। लेकिन जब उन्होंने और उनकी पत्नी ने पैसे देने में असमर्थता जताई तो अस्पताल के कर्मचारियों ने उन्हें धक्का देकर बाहर निकाल दिया।
उन्होंने कहा की, जब तक परिवार अस्पताल के गेट पर पहुंचा नीलम को अत्यधिक दर्द हो रहा था और उन्होंने बच्चे को वही जन्म दे दिया, लेकिन इलाज के अभाव और अत्यधिक ठंड के कारण बच्चे की जल्द ही मौत हो गई।







