उत्तर प्रदेश में मूलनिवासी महिलाओं की स्थिति चिंताजनक।

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उत्तर प्रदेश में आए दिन महिलाओं के खिलाफ हो रही हिंसाओं की खबर देखने और सुनने को मिलती रहती हैं। इस बार मामला उत्तर प्रदेश के बागपत ज़िले का हैं। जहा छेड़छाड़ का विरोध करने पर एक मूलनिवासी महिला को जातिसूचक गालियां देकर उसे तेल की गर्म कड़ाही में धकेल दिया जाता हैं ।

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बेटी बचाओ, बेटी बढ़ाओ जैसे नारे इन भाजपाइयों के भाषणों में ही ठीक लगता है। जबकि दूसरी तरफ इनके शासन वाले राज्यो में महिलाओं के खिलाफ हिंसाओ में वृद्धि देखने को मिल रही हैं।

एक तरफ जहा उत्तर प्रदेश की सरकार राज्य को अपराध मुक्त करने की बात करती हैं। तो वही दूसरी तरफ मूलनिवासियों के खिलाफ हो रही हिंसाओं की खबरें लगातार देखने को मिलती हैं।

मामला उत्तर प्रदेश के बागपत ज़िले का हैं। जहा बीते सताइस दिसंबर को एक तेल मिल के मालिक और उसके दो सहयोगियों ने एक मूलनिवासी महिला का यौन उत्पीड़न करने की कोशिश की थी।

जब अठारह वर्षीय महिला ने इसका विरोध किया तो आरोपियों ने कथित तौर पर उसे गर्म तेल के कड़ाही में धकेल दिया ।

हालांकि बीते बुधवार रात महिला के भाई द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर विभिन्न धाराओं के तहत आरोपियों पर कार्रवाई की गई। लेकिन पीड़ित महिला की तबियत बेहद खराब हैं।

पुलिस ने बताया कि, पीड़िता के शरीर का आधा हिस्सा, टांगें और हाथ जल गए हैं, उसे नई दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

जबकि पीड़िता के भाई के अनुसार, वे पहले अपनी बहन को स्थानीय अस्पताल ले गए, जहां से उसे दिल्ली के अस्पताल में रेफर कर दिया था।

मामले की जानकारी देते हुए भाई ने आरोप लगाया कि, ‘मेरी बहन बीते सताइस दिसंबर की शाम को मिल में काम कर रही थी, जब मिल मालिक और उसके दो सहयोगियों ने उसके साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश की, जब उसने विरोध किया, तो उन्होंने पहले उसे जातिसूचक गालियां दीं और फिर उसे परिसर में रखे गर्म तेल के बर्तन में धकेल दिया और वे भाग गए।

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