देश आज बहुत ही मुश्किल दौर से गुजर रहा है। पूंजीवाद देश पर हावी हो रहा है उनकी मदद ही संविधान विरोधी, जनविरोधी ब्राह्मणवादी ताकतें संविधान को तहस नहस करने खुलेआम कोशिश कर रहे है। बामसेफ संगठन का कहना है ऐसी स्थिति में राष्ट्रीय स्तर पर संविधानविरोधी ताकतों का मुकाबला किया जाना चाहिए। इसके लिए मूलनिवासी बहुजनों की विभिन्न संगठनों ने सामान कार्य्रकम पर एक होकर समन्वय के साथ काम करने की आवश्यकता है। इसी को ध्यान में लेते हुए बामसेफ की अगुवाई में विभिन्न राज्यों में कार्यरत मूलनिवासी बहुजन समाज के विभिन्न सामाजिक संगठनों की राष्ट्रीय स्तर की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की है। आइये जानते हैं इसके बारे में पूरी जानकारी।
मूलनिवासी बहुजन समाज 85 प्रतिशत से ज्यादा है। विभिन्न जातियों, विभिन्न भाषाओं और विभिन्न राज्यों में बटा हुआ है। मूलनिवासी बहुजन समाज की समस्याओं का विचार करें और ओबीसी की तरफ देखें तो मंडल कमीशन तक 40 वर्ष राह देखनी पड़ी और उसके बाद आज 30 वर्ष हो गए हैं फिर भी ओबीसी संवैधानिक अधिकारों से दूर है। तमाम एससी, एसटी, ओबीसी और माइनोरिटी की समस्यायों के समाधान के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सभी ने इकठ्ठा आने की आवश्यकता है। इनमें को-ऑर्डिनेशन और को-ऑपरेशन की आवश्यकता है।
इसी को-ऑर्डिनेशन और को-ऑपरेशन को स्थापित करने के लिए अखिल भारतीय स्तर पर मूलनिवासी बहुजन समाज के सामाजिक संगठनों की दो दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया है। दिनांक 28 और 29 अगस्त 2021 को यह राष्ट्रीय बैठक महाराष्ट्र के नागपुर स्थित राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले सामाजिक क्रांति संस्थान रिंगनाबोडी में होगी। इस राष्ट्रीय बैठक का उद्घाटन इंडियन जुडिशल अकेडमी की पूर्व निदेशक और और पूर्व कुलपति बेंगलुरु लॉ स्कूल मू डॉ जी मोहन गोपाल करेंगे।
बामसेफ केन्द्रिय कार्यकारिणी ने इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पहल को सफल करने के लिए बामसेफ के राष्ट्रीय संगठन सचिव सुरेंद्र द्रविड़ और बामसेफ के राष्ट्रीय महासचिव आर एस.राम इनकी जिम्मेदारी लगायी है। मू सुरेश द्रविड़ को बामसेफ ने इस कार्यक्रम का संयोजक नियुक्त किया है।
बामसेफ द्वारा कहा गया है कि कि विभिन्न प्रकार के सभी मूलनिवासी संगठन जो पूरे देश में ब्राह्मणवाद के खिलाफ लड़ रहे हैं। वे अपने-अपने दृष्टि से सर्वोत्तम प्रयासों और क्षमताओं के साथ मूलनिवासी बहुजन समाज की सेवा कर रहे हैं। लेकिन बुनियादी ढांचे की कमी के कारण अकेले अकेले ब्राह्मणवादी ताकतों के खिलाफ लड़ना मुश्किल है। ऐसी स्थिति में कई संगठनों ने बामसेफ के तरफ यह अनुरोध किया है कि इन मूलनिवासी संगठनों के बीच सहयोग और समन्वय का एक तंत्र स्थापित किया जाएं। इसी बात को मद्देनजर रखते हुए तथा उनकी भावनाओं से पूरी तरह सहमत होते हुए बामसेफ ने इसके लिए अगुवाई की है।
आपको बता दें कि बैठक का राष्ट्रीय महत्व और गंभीरता को देखते हुए अभी इसमें प्रत्येक प्रतिभागी संगठन के 2 प्रतिनिधि शामिल हो सकेंगे। दो दिवसीय चलने वाली बैठक में विभिन्न मुद्दों पर गहन चर्चा होगी। इस राष्ट्रीय पहल में शामिल हो रहे संगठनों का पंजीकरण किया जा रहा है। इसके लिए एक गूगल फॉर्म की लिंक भी तैयार की गयी है। मूलनिवासी बहुजन समाज की सामाजिक शैक्षिक आर्थिक धार्मिक और राजनीतिक ताकत को मजबूत करने और संवैधानिक अधिकारों को सुरक्षित करने में रुचि रखते हैं, ऐसे सभी सामाजिक संगठनों को इसमें जुड़ने की अपील की गई है।







