कोई आवाज दे तो बस तू निकल
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जिस्म से होकर रुह तक उतरी है जहरीली हवा
महफिलमे किसीने घोला है नफरत का नशा
सूरज को जिसने चाहा ,उसे अंधा कर दिया
इंन्सानियत को संवारा, उसे नंगा कर दिया।
ये जो खुले दिलके लोग है फिर भी रुकते ही नही है
ये जो तंगदिल दिलके लोग है, खुलते ही नही है।
मै हूँ भुके नंगो की दबीआवाज खुलकर गरजती है
बादशाहो की मोटी चमडी भी खुरजती है।
मै जानता हूँ,
ये जो नज्म है मेरी खामोश रहकर बोलती है
कैदखानेमे मेरे नाम की तब पर्ची निकलती है
मेरी कोशिश हजारोंकी भी तडप होगी एक दिन
इस जहरीली हवाओंको भी जलाएगी एक दिन
मेरे दोस्त, मै कतरा ही सही, मुझे पागल ना समझ
दुनिया घुमती है, ये भी तो समझ
इंतजार है की, ये बादलभी छटने वाले है
इस झुटी बिसातके बादशाह भी लुटने वाले है।
मै मै हूँ, तो तुभी तू है, तेरा कोई सानी नही
तुझे कोई रेत समझे इतना किसीमे पानी नही।
ये मौसम भी बदलने वाला है।
कोई आवाज दे, तो बस तू भी निकल
भोर होनीही है समझ, और बस तू भी निकल।
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बली खैरे.
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