अनुसूचित जाति या जनजाति के किसी भी व्यक्ति पर घर के भीतर या बाहर कोई अपमानजनक बात होती है और उसका कोई गवाह ना हो तो वह अपराध नही हो सकता। गुरुवार को SC/ST ऐक्ट से सम्बंधित उतराखंड के एक मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा। जस्टिस एल नागेश्वर राव, हेमंत गुप्ता और अजय रस्तोगी की पीठ ने यह टिप्पणी की।
पिथौरगढ़ के एक व्यक्ति की SC/ST ऐक्ट के तहत दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया। सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरोपी पर अन्य धाराओं के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है। साथ ही कहा की कोई उच्च जाति का व्यक्ति अपने अधिकारों की रक्षा में कोई कदम उठाता है तो इसका यह मतलब नहीं कि उस पर एससी-एसटी एक्ट की कानूनी तलवार लटक जाए।
सार्वजनिक तौर पर अंजाम दिया गए अपराध पर ही SC/ST ऐक्ट के तहत मुक़दमा चलाया जाता है। सार्वजनिक स्थान का मतलब जहां पर अन्य लोगों की मौजूदगी हो। मामले में तब तक केस दर्ज नहीं किया जा सकता जब तक घटना का कोई गवाह न हो।
केवल गाली दे देने से यह एक्ट नहीं लग सकता।उच्च जाति के व्यक्ति ने किसी SC/ST समुदाय के व्यक्ति को गाली दी तो भी उस पर एससी-एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई नहीं की जा सकती।
अगर गाली जानबूझकर पीड़ित को उसके समुदाय के आधार पर अपमानित करने के लिए दी है तो जरूर केस दर्ज किया जा सकता है। मगर इसका भी गवाह होना चाहिए।







