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हजारों सालो से देश में मनुस्मृति का विधान रहा। जिसने देश की आधी आबादी यानी महिलाओं के साथ साथ पचासी फीसदी मूलनिवासी बहुजन समाज को भी हर तरह के अधिकारों से वंचित रखा । जिसका परिणाम यह हुआ कि भारत मनुस्मृति के दौर में सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और शैक्षणिक स्तर पर भी विश्व से पिछड़ता चला गया।
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आज हम इक्कीसवीं सदी में जी रहे हैं। लेकिन आज भी भारत विकसित देशों की सूची में शामिल नहीं हैं। जबकि भारत का एक गौरवशाली इतिहास रहा हैं।
यह गौरवशाली इतिहास आपको उस दौर में मिलेगा जब सिद्धार्थ, सिद्धार्थ से गौतम बुद्ध बने थे। जिन्होंने पूरे विश्व को शांति और अमन का संकेत दिया था। साथ ही यह गौरवशाली इतिहास उस दौर का उदाहरण हैं, जब देश का सत्ता सम्राट अशोक के हाथों था।
यह वह दौर था जब समाज के हर वर्ग देश के विकास में अपना योगदान दे रहे थे। देश शिक्षा का केंद्र हुआ करता था और भारत सही मायने में विश्व गुरु था।
लेकिन ब्राह्मणों के कूटनीति और मनुस्मृति के प्रावधानों ने सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक और शैक्षणिक अधिकारों को विशेष वर्णों तक सीमित रख दिया। जबकि देश के पचासी फीसदी मूलनिवासी बहुजन समाज और सभी वर्गो की महिलाओं को इन अधिकारों से वंचित कर दिया गया।
लगभग तीन हजार साल से या यूं कह ले की अंग्रेजो के भारत में आने तक देश के पचासी फीसदी मूलनिवासियों को हर तरह के अधिकारों से वंचित रखा गया। जबकि अंग्रेजो के आने से मूलनिवासी बहुजन समाज के लोगो को भी ब्रिटिश शासन में नौकरियां मिलने लगी थी और उनके बच्चे भी अंग्रेजी स्कूल में पढ़ने लगे थे।
अंग्रेजों से आजादी के बाद आधुनिक भारत का संविधान लिखा गया। जो असमानता के प्रतीक मनस्मृति से बिल्कुल विपरित थी। जहा मनुस्मृति में सारे अधिकारों को विशेष वर्ण व्यवस्था के आधार पर सीमित रखा वही भारत के संविधान ने देश के सभी नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के समान रूप से सारे अधिकार दिए।
लेकिन आज भी देश का संविधान मनुवादियों के हाथो में हैं, जिनके हाथ में संविधान तो है लेकिन दिमाग में मनुस्मृति के विधान ही है। जिन्होंने आज भी इतने बेहतरीन संविधान को देश में पूर्ण रूप से लागू होने नही दिया।
जिसका परिणाम यह हुआ कि संविधान में सारे अधिकार दिए जाने के बावजूद आज भी मूलनिवासी बहुजन समाज के सैकड़ों लोग अपने अधिकारों से अनजान हैं। जिससे आज भी वह शोषण और कई तरह के प्रताड़ना को सहते हैं।
समाज की इसी स्थिति को देखते हुए बामसेफ, मूलनिवासी संघ, मूलनिवासी विद्यार्थी संघ जैसी कई संगठने देश में बीएस फोर यानी भारतीय संविधान, सम्मान, सुरक्षा, संवर्धन महा जनजागरण अभियान चला रही हैं।
जिसका उद्देश देश के हर नागरिकों तक संविधान, संविधान में दिए उनके मौलिक अधिकार और नीति निर्देशक तत्वों को आसान और सरल तरीके से बताना और समझना हैं। यह काम आज देश भर में सैकड़ों लोग संविधान प्रबोधक बन कर कर रहे है।






