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भारत में युवाओं की स्थिति कितनी चिंताजनक हैं इसका अंदाजा आप इस बात पर लगा सकते हैं की भारत की कुल बेरोजगारी में बढ़े लिखें युवाओं की हिस्सेदारी तिरासी फीसदी हैं। यानी यह देश सिर्फ सार्वजनिक युवा आबादी वाला देश नहीं, बल्कि सर्वाधिक युवा बेरोजगार वाला देश भी हैं।
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हाल ही में जारी अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन और मानव विकास संस्थान की रिपोर्ट बताती हैं की कुल बेरोजगारों में लगभग तिरासी फीसदी युवा बेरोजगार हैं।
बताते चलें की बीते छब्बीस मार्च, दो हजार चौबीस दिन मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन और मानव विकास संस्थान द्वारा एम्प्लॉयमेंट रिपोर्ट दो हजार चौबीस शीर्षक वाली एक रिपोर्ट जारी की गई। जिसमें भारत में युवा बेरोजगारी की चिंताजनक और भयावह स्थिति को दर्शाया गया हैं।
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन और मानव विकास संस्थान द्वारा जारी यह रिपोर्ट भारत में रोज़गार की स्थिति गंभीर बताई गई हैं। साथ ही यह भी बताया गया हैं की कैसे इस देश में बेरोजगारी की रफ्तार तेजी से बढ़ी हैं।
रिपोर्ट बताती हैं कि, देश के कुल बेरोज़गार युवाओं में पढ़े-लिखे बेरोज़गारों की संख्या साल दो हजार (2000) के मुक़ाबले दोगुनी हो चुकी है।
साल दो हजार (2000) में पढ़े-लिखे युवा बेरोज़गार कुल युवा बेरोज़गारों का पैंतीस दशमलव दो (35.2) प्रतिशत थे, जो साल दो हजार बाईस (2022) में बढ़कर पैसठ दशमलव सात (65.7) प्रतिशत हो गया हैं।
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन यानी आईएलओ और मानव विकास संस्थान यानी आईएचडी द्वारा जारी हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, कुल बेरोजगार युवाओं में माध्यमिक या उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं की हिस्सेदारी में भारी बढ़ोत्तरी देखी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के बेरोजगारों में लगभग तिरासी (83) प्रतिशत युवा हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक भारत में व्यापक आजीविका से जुड़ी असुरक्षाएं हैं, विशेष रूप से गैर-कृषि और संगठित क्षेत्र में।
रिपोर्ट बताती हैं कि, इन क्षेत्रों में केवल एक छोटा प्रतिशत ही सामाजिक सुरक्षा के दायरे में है। इससे भी खराब यह है कि ठेकेदारी प्रथा में वृद्धि हुई है, केवल कुछ प्रतिशत नियमित कर्मचारी ही दीर्घकालिक अनुबंधों के दायरे में आते हैं।
रिपोर्ट में ठेकेदारी व्यवस्था को नियमित और दीर्घकालीन अनुबंधों के दायरे में आने वाले कर्मचारियों के लिए खतरा बताया है। लेकिन अफसोस की केंद्र सरकार निजीकरण में विशेष जोर दे रही हैं और लगातार सरकारी संस्थाओं को बेच रही हैं।
यही नहीं जहा एक तरफ सरकार युवाओं के कौशल में सुधार की बात करती हैं वही दूसरी तरफ रिपोर्ट में भारत में युवा कौशल में कमी का दावा कर रही हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत का बड़ा कार्यबल युवा है पर उनके पास कौशल नहीं है।
इस देश में पचहत्तर (75) प्रतिशत युवा अटैचमेंट के साथ ईमेल भेजने में असमर्थ हैं, साठ(60) प्रतिशत युवा फ़ाइलों को कॉपी और पेस्ट नहीं कर सकते, वहीं नब्बे (90) प्रतिशत युवा गणितीय सूत्र को स्प्रेडशीट में डालना नहीं जानते।








