महाराष्ट्र सरकार इस्तेमाल करेंगी दलित शब्द की बजाए शेड्यूल्ड कास्ट

राष्ट्रपति के एक आदेश के अनुसार अनुसूचित जाति के सम्बोधन के लिए अब सरकारी व्यवहार में दलित शब्द के बजाय अंग्रेज़ी भाषा में ‘शेड्यूल्ड कास्ट’ तथा मराठी भाषा का ‘अनुसूचित जाति ’ शब्द इस्तेमाल किया जाएगा। महाराष्ट्र में जतिसूचक पहचान से बस्तियों के नाम होते है। अब उन नामों को बदलने का निर्णय महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट ने लिया है। दलित शब्द हीन भाव को निर्मित करता है। दलित शब्द की वजह से पिछड़ी जाति के लोगों को अपमान का सामना करना पडता है।

गाँवों-शहरों में मांगवाडा, ढोर बस्ती, ब्राह्मणवाडा, माली गल्ली, कुंभरवाडा, सुतरवाडा इस प्रकार के बस्तियों के जतिसूचक नाम होते है। अब इन नामों को बदलने का निर्णय महाराष्ट्र साकार ने लिया है। इन बस्तियों को महानायक, महानायीकाओं के जीवन संघर्षों के आधार पर नाम रखे जाएँग़े।

इन नामों को कौन बदलेगा?
सार्वजनिक न्याय विभाग की जानकारी के अनुसार शहरों में महानगर पालिका, नगरपालिका और ग्रामीण इलाक़ों में ग्रामविकास इस में कार्य करेगा।

इसके चलते दलित बस्ती सुधार योजना का नाम बदल कर अनुसूचित जाति बस्ती विकास योजना किया गया था। साथ ही डॉ बाबा साहेब आंबेडकर दलित मित्र पुरस्कार का नाम बदल कर ‘डॉ बाबा साहेब आंबेडकर समाज भूषण पुरस्कार’ किया गया है।

महाराष्ट्र की महाविकास आघाडी सरकार ने शहरों और गाँवों में जतिसूचक बस्तियों के नाम बदलने का निर्णय लिया है। बुधवार को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया। जिसके बाद मांगवाडा, ढोर बस्ती, ब्राह्मणवाडा, माली गल्ली जैसे नाम बदल कर समता नगर, भीम नगर, ज्योतिनगर, शाहू नगर रखे जाएँगे।

इसके पहले दलित बस्ती सुधार योजना का नाम बदल कर अनुसूचित जाति व नव बौद्ध बस्ती विकास योजना किया गया था। साथ ही डॉ बाबा साहेब आंबेडकर दलित मित्र पुरस्कार का नाम बदल कर ‘डॉ बाबा साहेब आंबेडकर समाज भूषण पुरस्कार’ किया गया है।

राष्ट्रपति के आदेश के अनुसार अनुसूचित जाति के संबोधन के लिए अब सभी सरकारी व्यवहार, प्रमाणपत्र आदि में दलित शब्द की बजाय अंग्रेजी भाषा में ‘शेड्यूल्ड कास्ट’ व ‘नव बौद्ध’ और मराठा भाषा में ‘अनुसूचित जाति व नव बौध्द’ शब्द का इस्तेमाल किया जाएगा।

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