वैज्ञानिक सोच के साथ ही आज भारत चांद पर हैं।

=========

मूलनिवासी महापुरुषों ने हमेशा से ही वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा दिया हैं। चाहे वो गौतम बुद्ध हो, राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले हो या फिर संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर और आज विज्ञान के कारण ही धरती पर बैठकर ग्रहों की दिशा बताने वाले लोग भी चंद्रयान तीन की सफलता देखकर हैरान हैं।

==========

पृथ्वी पर बैठकर चांद और विभिन्न ग्रहों की दिशा बताने वाले द्विज आज चंद्रयान तीन की सफलता देखकर हैरान हैं क्योंकि आज विज्ञान, धर्म पर हावी होता दिख रहा हैं।

जिन काल्पनिक और बेफिजूल बातो से द्विजो ने देश के लोगो को हजारों सालो से मूर्ख बना कर रखा था, आज विज्ञान ने उसका पर्दाफाश किया हैं।

अमेरिका जैसे देश ने तो आज से करीब पचास साल पहले ही यानी उन्नीस सौ उन्हत्तर (1969) में ही इंसानों को चांद पर भेज दिया था। लेकिन अब भारत के वैज्ञानिकों ने भी अपनी बनाई हुई चंद्रयान तीन को सफलतापूर्वक चांद पर पहुंचा दिया हैं। उसी चांद पर जिसे हजारों सालो से ये बता कर मूर्ख बनाया गया की ये चांद शेष नाग के फन पर टिकी हुई हैं।

आज देश का झंडा चांद पर लहरा रहा है तो इसका श्रेय हमारे मूलनिवासी महापुरुषों को भी जाता हैं, जिन्होंने धर्म और कर्मकांड से ऊपर उठकर हमेशा से ही वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा दिया हैं।

आज अगर बाबा साहेब डॉ० भीमराव आंबेडकर देश के एससी, एसटी और ओबीसी को पढ़ने का अधिकार नहीं दिलाते तो इसरो जैसे संस्थानों में कैलासवटिवु सिवान जैसे मूलनिवासी वैज्ञानिक नही पहुंच पाते।

बताते चले की भारत के रॉकेट मैन के नाम से प्रसिद्ध के सिवान इसरो यानी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के पूर्व चेयरमैन रह चुके हैं। हाल ही में उनकी अध्यक्षता में इसरो ने बाइस जुलाई, दो हजार उन्नीस को चंद्रमा पर भारत का दूसरा मिशन चंद्रयान दो लॉन्च किया था।

सिर्फ के सिवान ही नही आज ऐसे हजारों मूलनिवासी वैज्ञानिक है जो दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे है। जिन्हे कभी द्विजों ने पढ़ने तक का अधिकार नहीं दिया आज वे देश की कामयाबी में अपना योगदान दे रहे हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here