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रोजगार के मामले में भारत की स्थिति क्या हैं? यह तो आप जानते ही होंगे। लेकिन आप को बता दे की भारत शीर्ष के उन पांच देशों में शामिल है जहा बेरोजगारी दर सबसे अधिक हैं। आपको बता दे की साउथ अफ्रीका, स्पेन, तुर्की और ब्राजील के बाद भारत में सबसे अधिक बेरोजगारी हैं।
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हम अकसर अपने पड़ोसी देशों से खुद की तुलना करते हैं और खुद को अच्छा बताते हैं। लेकिन सच तो यह है की कुछ मामलो में हमारे पड़ोसी देश हमसे कई गुना बेहतर स्थिति में हैं।
जैसे उदाहरण के लिए बेरोजगारी दर, जो भारत में पाकिस्तान, नेपाल, बंगला देश, भूटान, म्यांमार और चीन से कई अधिक है। आंकड़ों की माने तो भारत शीर्ष के उन पांच देशों में शामिल हैं जहा बेरोजगारी दर सबसे अधिक हैं।
मई, दो हजार तेईस में दी वर्ल्ड रैंकिंग नाम के ट्विटर हैंडल से किए गए एक ट्वीट के अनुसार, भारत सात दशमलव आठ फीसदी बेरोजगारी दर के साथ पांचवे नंबर हैं, जहा बेरोजगारी दर सबसे अधिक हैं।
जबकि बत्तीस दशमलव सात फीसदी बेरोजगारी दर के साथ साउथ अफ्रीका पहले स्थान पर, तेरह दशमलव दो छह फीसदी बेरोजगारी दर के साथ स्पेन दूसरे स्थान पर, दस फीसदी बेरोजगारी दर के साथ तुर्की तीसरे स्थान पर और आठ दशमलव आठ फीसदी बेरोजगारी दर के साथ ब्राजील चौथे स्थान पर था ।
वही भारत के पड़ोसी देश यानी चीन की बेरोजगारी दर पांच दशमलव पांच फीसदी है। जबकि अन्य पड़ोसी देश जैसे पाकिस्तान, भूटान, नेपाल, बंगला देश और म्यांमार जैसे देश इस ट्वीट में शामिल ही नही थे।
सेंटर फोर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी के आंकड़ों की ही माने तो मार्च, दो हजार तेईस में भारत में बेरोजगारी की दर लगातार दूसरे महीने बढ़कर सात दशमलव आठ फीसदी हो गई थी।
सीएमआई के आंकड़ों के अनुसार, मार्च महीने के दौरान भारत के शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी की दर आठ दशमलव पांच एक फीसदी रही थी, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह दर सात दशमलव चार सात फीसदी थी।
आंकड़े देखें तो पता चलता है कि अभी भी हमारे देश में बेरोजगारी की स्थिति काफी गंभीर है। लेकिन शर्म की बात है की आज तक यह समस्या सिर्फ चुनावी मुद्दा बन कर रह गया हैं।
पिछले साल की बात करे तो दिसंबर दो हजार बाईस में भारत में बेरोजगारी दर आठ दशमलव तीस फीसदी के उच्च स्तर पर पहुंच गई थी। उसके बाद जनवरी, दो हजार तेईस में इसमें बड़ी गिरावट आई और यह कम होकर सात दशमलव एक चार फीसदी रह गई। हालांकि उसके बाद से लगातार इसमें तेजी देखी गई और मार्च में यह फिर से आठ फीसदी के पास पहुंच गई थी।








