हाथरस घटना का पीड़ित बहुजन परिवार ख़तरे में?

दिन ब दिन मूलनिवासी समाज पर बढ़ रहे अत्याचारों से देश में ख़ौफ़ का माहौल है। रोज़ किसी न किसी वजह से बहुजन समाज के मनवाधिकारों का हनन हो रहा है। हाल ही में हुए हाथरस अत्याचार पर आयी एक खबर ने क़ानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए है।

नागरिक अधिकार संस्था पीपल यूनियन फ़ॉर सिविल लिबर्टिज (पीयूएसएल) ने शनिवार को हाथरस मामले की जाँच रिपोर्ट सार्वजनिक की है। जिसमें पीड़ित परिवार के जान को ख़तरा होने की आशंका जताई है।

इस रिपोर्ट में कहा गया है की केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल की तैनाती पीड़ित परिवार फ़ौरी राहत ज़रूर है लेकिन वे सुरक्षित नही है। यह भी कहा है कि पीड़िता के सदस्य घर में नज़रबंद स्थितियों में रह रहे है। परिवार आतंकित है की पुलीस बल के न रहने पर क्या होगा, इसलिए परिवार की सुरक्षा के अलावा निर्भया फंड से उनके पुनर्वास की व्यवस्था की जाए।

पीयूसीएल के सदस्यों ने कहा इस मामले में कुछ अधिकारियों के ख़िलाफ़ विभागीय कार्यवाही की गई है, लेकिन जिन पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के ख़िलाफ़ आपराधिक मामले बनते है उसका सज्ञान नही लिया गया।

पीयूसीएल ने शनिवार को लखनऊ स्थित प्रेस क्‍लब के सभागार में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा कि पीड़िता परिवार ने उन्हें मुहैया कराई गई सीआरपीएफ़ सुरक्षा वापस लेने के बाद अपनी जान को ख़तरे के बारे में बताया था

पीयूसीएल के सदस्य कमल सिंघी ने कहा, ‘जब हम परिवार से मिलने गए तो ऐसा लगा जैसे हम जेल में बंद किसी आतंकवादी से मिलने जा रहे हैं, न कि किसी भयावह रेप पीड़िता के परिवार से ।उन्होंने आगे कहा पीड़िता के पिता ने हमें बताया की वह अपने बेटों को काम करने के लिए बाहर भेज देंगे।हम परिवार के सुरक्षा को लेकर चिंतित है।क्योंकि स्थानीय प्रशासन, पुलिस और गांव के ऊंची जाति के लोगों की सांठगांठ वैसी ही हो जाएगी, जैसे पहले थी. मैं उस दिन को लेकर चिंतित हूं, जब परिवार की सुरक्षा हटा दी जाएगी

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