कांग्रेस सरकार के दौरान SC, ST और OBC समुदाय पर बड़े पैमाने में अत्याचार हुए है। उस से भी कही ज़्यादा अत्याचार भाजपा सरकार कर रही है। इन समुदायों में सबसे ज़्यादा अत्याचार नोकरियों को लेकर हो रहें हैं। एससी, एसटी, ओबीसी के हजारों पद खाली हैं, लेकिन सरकार ने उनकी भर्तियों पर रोक लगा रखी है। इसके पीछे एक षड्यंत्र भी हो सकता है, शायद बाद में सरकार यह कहकर खाली पदों को ही खत्म कर देगी कि खाली जगह भरने से राजस्व को घाटा हो रहा है. इसके पहले भी सरकार ऐसा करते आ रही है.
देश के विभिन्न हिस्सों में नौकरिया और विभिन्न पद भरने के लिए हुई परीक्षाओं के नतीजे अब तक सरकार ने जारी नहीं किए है। इस के ख़िलाफ़ देश भर में विरोध-प्रदर्शनों हो रहे हैं। इसी बीच केंद्र सरकार ने जानकारी दी है कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में अठारह हजार से अधिक पद रिक्त हैं। संसद में एक लिखित प्रश्न का जवाब देते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने बताया कि खाली पड़े पदों में 6,210 शैक्षणिक और 12,437 गैर-शैक्षणिक पद हैं। इसके अलावा इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी (इग्नू) में 196 शैक्षणिक पद और 1,090 गैर शैक्षणिक पद रिक्त पड़े हुए हैं। इसके अलावा तीन केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालयों में 52 शैक्षणिक और 116 गैर-शैक्षणिक पद खाली हैं।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा है कि पदों का रिक्त होना और भरते रहना एक सतत प्रक्रिया है। शिक्षा मंत्रालय और यूजीसी विश्वविद्यालयों पर नजर रखते हैं। उन्होंने आगे कहा कि यूजीसी ने 4 जून, 2019 को विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को खाली पदों को भरने के लिए दिशानिर्देश दिए थे। जिनके तहत चयन प्रक्रिया और भर्ती के लिए समयसीमा दी गई है। खाली रिक्तियों को भरने का काम विश्वविद्यालयों को करना होता है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, शिक्षकों की कुल तयशुदा संख्या के एक तिहाई पद अभी भी रिक्त है। इसके बावजूद वर्तमान में एडहॉक, कॉन्ट्रैक्ट या गेस्ट फैकल्टी के बतौर काम कर रहे शिक्षकों को स्थायी करने के बारे में सरकार नहीं सोच रही है।
इससे पहले 2017-18 में ओबीसी के 165, एससी के 113 और एसटी के 38 शैक्षणिक पद खाली थे। गैर-शैक्षणिक पदों की बात करें, तो साल 2019-20 में ओबीसी के 40, एससी के 21 और एसटी के 09 पद रिक्त हैं। 2018-19 में ओबीसी के लिए खाली पदों की संख्या 158, एससी की 80 और एसटी की 40 थी। जबकि, साल 2017-18 में ओबीसी के 95, एससी के 69 और एसटी के 32 गैर-शैक्षणिक पद खाली थे।
बता दें कि अगस्त के आखिरी हफ्ते में सरकार ने एक निर्देश जारी किये थे। उस निर्देश के अनुसार जब तक कोरोना महामारी के चलते लगे लॉकडाउन की अवधि ख़त्म होने तक शैक्षणिक व गैर शैक्षणिक पदों की नियुक्तियों को रोक दिया गया था। यानी मोदी सरकार ने राम मंदिर का निमार्ण लॉकडाउन में किया, गाजियाबाद का डिटेंशन कैम्प लॉकडाउन में निर्माण किया। बैंक बेची, रेलवे बेची, बीमा कंपनियां बेची, एयरपोर्ट बेचे यहां तक मध्य प्रदेश में सरकार बनाई गई। लेकिन जब लंबे समय से खाली एससी, एसटी, ओबीसी के पदों को भरने की बात आई तो सरकार ने महामारी और लॉकडाउन के नाम पर रोक लगा दि। यानी सरकार एससी, एसटी, ओबीसी के साथ धोखेबाजी कर रही है।
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