नमस्ते ट्रम्प कार्यक्रम के लिए आए अमेरिकी राष्ट्रपती डोनाल्ड ट्रम्प और उनके दल की कोरोना जाच नही हुई थी। विदेश राज्यमंत्री वी. मुरलीधरण ने राज्यसभा में लिखीत जवाब में इसका खुलासा किया।
केंद्र सरकार ने लोकसभा में मंगलवार को बताया कि फरवरी में दो दिवसीय भारत यात्रा पर आए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनके स्टाफ़ का कोविड 19 का परीक्षण नही किया गया था। इस पर स्पष्टीकरण देते हुए विदेश राज्यमंत्री कहा कि उस समय विदेश से आने वाले यात्रियों का परीक्षण अनिवार्य नहीं था।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के बिनोय बिस्वम ने सरकार से जानना चाहा था कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति के दौरे के दौरान उनके स्टाफ और प्रतिनिधि मंडल के सदस्यों का कोविड-19 वायरस संबंधी परीक्षण करवाया गया था? इसी सवाल का वी. मुरलीधरन ने जवाब दिया।
जवाब में वी मुरलीधरन ने कहा, ‘राष्ट्रपति ट्रंप की यात्रा के समय, जो 24-25 फरवरी को हुई थी, उस समय विदेशों से आने वाले यात्रियों के लिए कोविड-19 परीक्षण की आवश्यकता नहीं थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 11 मार्च को कोविड-19 को महामारी घोषित किया था। भारत के 21 हवाई अड्डों पर आने वाले सभी अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की कोविड-19 के लिए अनिवार्य सार्वजनिक जांच की आवश्यकता 4 मार्च से कार्यान्वित की गई थी।
ट्रंप के साथ इस दौरे पर उनकी उनकी पत्नी मेलानिया, पुत्री इवांका, दामाद जैरेड कुशनर सहित उनके प्रशासन के शीर्ष अधिकारी शामिल थे।
राज्य में कोरोना वायरस का पहिला मामला मार्च 20 को सामने आया था। लेकिन भारत सरकार को कोविड-19 की जानकारी दिसम्बर 2019 में ही हो गयी थी।
यह कितनी हैरानी की बात है कि कोविड-19 को फैलने से रोकने के लिए भारत सरकार ने शुरुआती समय में कोई कदम नहीं उठाया गया है। यहां तक यह जानते हुए कि भारत में महामारी फैल चुकी है और 25 फरवरी को ही डब्ल्यूएचओ ने सभी देशों की सरकार को आगाह कर दिया था कि अपने यहां मेडिकल सुरक्षा उपकरणों का भंडारण क्षमता बढ़ाए। इसके बाद भी मोदी सरकार 21 मार्च तक भारत में निर्मित मेडिकल सुरक्षा उपकरणों का निर्यात अन्य देशों में करती रही।
आपको याद दिला दें की डोनाल्ड ट्रम्प और नरेंद्र मोदी की इस रैली पर भरी टिका हुयी थी। कोरोना के भारत में फैलाव को लेकर विवाद हुआ था। कई अख़बारों में इसको लेकर रिपोर्ट छपी थी। यहाँ तक की शिवसेना नेता एवं सामना अखबार के संपादक संजय राउत ने भी यह आरोप लगाया था की भारत में कोरोना के फैलाव के पीछे नमो ट्रम्प रैली जिम्मेदार हैं।
नमस्ते ट्रम्प कार्यक्रम के लिए आए अमेरिकी राष्ट्रपती डोनाल्ड ट्रम्प और उनके दल की कोरोना जाच नही हुई थी। विदेश राज्यमंत्री वी. मुरलीधरण ने राज्यसभा में लिखीत जवाब में इसका खुलासा किया।
केंद्र सरकार ने लोकसभा में मंगलवार को बताया कि फरवरी में दो दिवसीय भारत यात्रा पर आए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनके स्टाफ़ का कोविड 19 का परीक्षण नही किया गया था। इस पर स्पष्टीकरण देते हुए विदेश राज्यमंत्री कहा कि उस
समय विदेश से आने वाले यात्रियों का परीक्षण अनिवार्य नहीं था।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के बिनोय बिस्वम ने सरकार से जानना चाहा था कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति के दौरे के
दौरान उनके स्टाफ और प्रतिनिधि मंडल के सदस्यों का कोविड-19 वायरस संबंधी परीक्षण करवाया गया था?
इसी सवाल का वी. मुरलीधरन ने जवाब दिया।
जवाब में वी मुरलीधरन ने कहा, ‘राष्ट्रपति ट्रंप की यात्रा के समय, जो 24-25 फरवरी को हुई थी, उस समय विदेशों से आने वाले यात्रियों
के लिए कोविड-19 परीक्षण की आवश्यकता नहीं थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 11 मार्च को कोविड-19 को महामारी घोषित किया था। भारत के 21
हवाई अड्डों पर आने वाले सभी अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की कोविड-19 के लिए अनिवार्य सार्वजनिक जांच की आवश्यकता 4 मार्च से कार्यान्वित की गई थी।
ट्रंप के साथ इस दौरे पर उनकी उनकी पत्नी मेलानिया, पुत्री इवांका, दामाद जैरेड कुशनर सहित उनके प्रशासन के शीर्ष अधिकारी शामिल थे।
राज्य में कोरोना वायरस का पहिला मामला मार्च 20 को सामने आया था। लेकिन भारत सरकार को कोविड-19 की जानकारी दिसम्बर 2019 में
ही हो गयी थी।
यह कितनी हैरानी की बात है कि कोविड-19 को फैलने से रोकने के लिए भारत सरकार ने शुरुआती समय में कोई कदम नहीं उठाया गया है। यहां तक यह जानते हुए कि भारत में महामारी फैल चुकी है और 25 फरवरी को ही डब्ल्यूएचओ ने सभी देशों की सरकार को आगाह कर दिया था कि अपने यहां मेडिकल
सुरक्षा उपकरणों का भंडारण क्षमता बढ़ाए। इसके बाद भी मोदी सरकार 21 मार्च तक भारत में निर्मित मेडिकल सुरक्षा उपकरणों का निर्यात अन्य देशों में करती रही।
आपको याद दिला दें की डोनाल्ड ट्रम्प और नरेंद्र मोदी की इस रैली पर भरी टिका हुयी थी। कोरोना के भारत में फैलाव को लेकर विवाद हुआ था। कई अख़बारों में इसको लेकर रिपोर्ट छपी थी। यहाँ तक की शिवसेना नेता एवं सामना अखबार के संपादक संजय राउत ने भी यह आरोप लगाया था की भारत में कोरोना
के फैलाव के पीछे नमो ट्रम्प रैली जिम्मेदार हैं।
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