लोकतांत्रिक व्यवस्था के सभी स्तंभो में प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं की आवश्यकता।

MNTNewsNetwork पर दिनांक 6 नवंबर 2021 को रात्रि साढ़े आठ बजे की एमएनटी हिंदी प्राइम टाइम विचार विमर्श के लाइव कार्यक्रम में ‘लोकतांत्रिक व्यवस्था के सभी स्तंभो में प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं की आवश्यकता क्यों और कैसें?’ इस विषय पर चर्चा हुयी। जिसमें वक्ता के रूप में मू. संजय कुमार भारती (सामाजिक चिंतक, झारखण्ड), मू. शत्रुघन लाल (राज्य महासचिव, बामसेफ, यूपी दक्षिण, बुंदेलखंड) एवं मू. डॉ. एल. जे. कान्हेकर (डायरेक्टर , बामसेफ ट्रेनिंग) ने सहभाग लिया। इस कार्यक्रम का संचालन मू प्रदीप सुशीला, नेशनल कोऑर्डिनेटर, ने किया।

विषय पर अपने विचार रखते हुए मू. संजय कुमार भारती ने कहा, लोकतंत्र व्यवस्था में सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय स्थापित करने के लिए लोकतंत्र के जो तीन स्तंभ है, जिसे हम विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका कहते है। इनका महत्वपूर्ण योगदान हैं।

संविधान के अधिकार से जो अधिकारी बने या जिनकी रोजी-रोटी की समस्यां का समाधान हुवा उनके लिए बाबा साहेब ने जो बातें कही थी उसे आपने शब्दों में बताते हुए संजय भारती ने कहा कि बाबासाहेब आंबेडकर की उन विचारों को अक्सर याद रखना चाहिए कि अगर मेरे द्वारा दिए गए संवैधानिक अधिकारों से तुम्हारा कुछ भला होता हैं, रोजी-रोटी की समस्याओं से अगर तुम ऊपर उठते हो, तो मुड़कर उस समाज को देखना जहां से तुम आये हो और उसके कल्याण, उसके उत्थान, उसके विकास के लिए तुम काम करना और अपने आय का 20वां हिस्सा उस समाज के कल्याण के लिए लगाना।

चर्चा में मू संजय कुमार भारती ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि आज हमारे समाज के लोग जो संवैधानिक पदों पर है, उनसे जो उम्मीद थी हमारे महान पुरखों की किवह ‘Pay Back to Society’ के तहत, सामाजिक ऋण वापसी करेंगे। लेकिन अधिकांश लोग यह नहीं करते। इसके अनेकों कारण हो सकते हैं। ऐसे लोगों को संवेदनशील बनाना होगा, जागृत करना होगा इसके लिए प्रशिक्षण की आवश्यकता है। अगर ऐसा हमें ही उनके पास पहुँच बनाने की आवश्यकता है।

इस चर्चा में शामिल मू. शत्रुघन लाल ने कहा कि विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका में हमारे जो लोग वहां पर है, वो हमारे विचारधारा के नहीं हैं। आज मूलनिवासी समाज के बड़े- बड़े अधिकारी है, वकील है, इंजीनियर है, अध्यापक है, प्रोफेसर है। इसके बावजूद भी समाज में परिवर्तन नहीं आ रहा क्योंकि उनके अंदर फुले-अम्बेडकरी विचारधारा पहुंची नहीं है। चूंकि वह मूलनिवासी बहुजन विचारधारा के न होने के कारण उनका चरित्र विषमतावादी व्यवस्था के तहत बना है। जब-तक हम अपने लोगों में फूले-अम्बेडकरी विचारधारा का प्रशिक्षण नहीं देंगे तब-तक, इस व्यवस्था में हमारे चाहें जितने लोग हो जाये, मूलनिवासी बहुजन समाज का कल्याण नहीं हो सकता।

इस चर्चा में मुख्य रूप से अपनी बात रखते हुए बामसेफ ट्रैनिंग के डायरेक्टर मू. डॉ. एल जे कान्हेकर ने सवाल उठाया कि लोकतंत्र व्यवस्था के जो तीन स्तंभ है विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका इन स्तंभो में जो भी हमारे लोग गए है, उनमें से कितने लोगोंने अपना उत्तरदायित्व निभाया है? क्या समाज का मनोबल ऊँचा उठाया हैं? समाज को प्रेरित किया है? अगर हम पिछले 70 वर्षों का इतिहास देखते हैं तो निराशा हाथ आती है।

राजसत्ता में बैठे हुए जो लोग है, इन्होंने जो सुख भोगा है या भोग रहे है, इन लोगो ने समाज की समस्यायों की तरफ अनदेखी की। इसलिए इन लोगों का लेखा-जोखा हमें लेना चाहिए। इनका सोशल ऑडिट होना चाहिए। जब हमारा समाज प्रशिक्षण के द्वारा जागरूक होगा तब इनसे इनका लेखा-जोखा पूछा जायेगा।

आपने आगे कहा कि मूलनिवासी बहुजन समाज के लोग जो अधिकार के पदों पर हैं, ऊँचे पदों पर है वे लोग अगर फुले-अम्बेडकरी विचारधारा को अंगीकृत करते हुए काम करते हैं तो समाज सुखी होगा, सफल होगा। डॉ कान्हेकर ने यह कहा कि हमारे लोग अक्सर जातिवाद के दबाव में होते है। इसलिए मूलनिवासी बहुजन समाज के लोग फूले-अम्बेडकरी विचारधारा का प्रशिक्षण जबतक नहीं लेते तबतक वे भले ही व्यवस्था के किसी भी अंग में हो वह समाज और देश हित का कार्य नहीं कर सकते।

आपने कहा कि बामसेफ द्वारा नागपुर में डी के खापर्डे मेमोरियल ट्रस्ट के माध्यम से राष्ट्रपिता ज्योतिबा फूले सामाजिक क्रांति संस्थान स्थापित किया गया है। यहां हम फूले-आंबेडकर विचारधारा का प्रशिक्षण देते हैं। समाज के सभी वर्गों के लिए यहां प्रशिक्षण आयोजित होते हैं। बामसेफ और अन्य सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था यहां है।

नोट:
इस कार्यक्रम को आप MNTNewsNetwork के यूट्यूब चैनल और फेसबुक पेज पर देख सकते हैं।

यूट्यूब लिंक

फेसबुक लिंक:

https://fb.watch/9cLpyl05tc/

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here