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बीते दिनों बिहार के डुमरिया प्रखंड के रामदोहर गांव के मूलनिवासियों ने शोध एवं शैक्षणिक संस्थान के निर्माण के लिए सर्वसम्मति से डी० के० खापर्डे मेमोरियल ट्रस्ट को दस दशमलव अठासी (10.88) एकड़ ज़मीन दान देने की घोषणा की गई । इस नेक कार्य में मुख्य भूमिका निभाने वाले पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया ( डेमोक्रेटिक ) के राष्ट्रीय संगठन सचिव मूलनिवासी अविनाश महतो जी ने पहले ही अपनी एक एकड़ जमीन ट्रस्ट को दान दे चुके हैं।
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शिक्षा मानव जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। क्योंकि शिक्षा ही वह एक मात्र साधन हैं जो एक मनुष्य को प्राणी से सामाजिक प्राणी में बदल सकता हैं। लेकिन मनुवादी व्यवस्था ने हजारों वर्षों से मूलनिवासी बहुजन समाज को शिक्षा से दूर रखा। जिससे मूलनिवासियों का सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक विकास शून्य रहा।
संविधान लागू होने के बाद संवैधनिक रूप से शैक्षणिक संस्थानों के दरवाजे देश के मूलनिवासियों के लिए तो खोल दिये गए । लेकिन समाजिक स्तर पर इन जगहों में अस्पृश्यता अपने चरम पर थी। और कही न कही आज भी हैं। जिसके कारण काबिलियत रहने के बाद भी मूलनिवासी बहुजन समाज के छात्र उच्च शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ाई पूरी नहीं कर पाते हैं।
लेकिन बामसेफ और मूलनिवासी संघ जैसे समाजिक संगठनों के कारण मूलनिवासी बहुजन समाज में एक क्रांतिकारी बदलाव नज़र आया हैं। अब लोग अपने मूलनिवासी महापुरखो के संघर्षों को खुद से जोड़ते हुए शिक्षा को अधिक महत्व देने लगे हैं। जिसका ताजा उदाहरण बिहार के डुमरिया प्रखंड से निकल कर आई हैं।
बताते चलें कि बीते दिनों गया के डुमरिया प्रखंड के ननदई पंचायत के वार्ड संख्या तेईस, ग्राम रामदोहर में ग्रामीणों ने अपने ज़मीन का एक बड़ा हिस्सा डी० के० खापर्डे मेमोरियल ट्रस्ट को शोध एवं शैक्षणिक संस्थान के निर्माण के लिए दान देने की घोषणा की गई है।
डी० के० खापर्डे मेमोरियल ट्रस्ट के ट्रस्टी मूलनिवादी दयाराम सर ने पहले मूलनिवासियों से बात की और उनका राय जाना। जिसके बाद ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से विशेष कर ग्रामीण महिलाओं की सम्मति से ट्रस्ट को दस दशमलव अठासी (10.88) एकड़ ज़मीन दान देने की घोषणा की गई।
इस सामाजिक कार्य में पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया (डेमोक्रेटिक) के राष्ट्रीय संगठन सचिव मूलनिवासी अविनाश महतो सर की भूमिका महत्वपूर्ण रही। उन्हीं के प्रयासों से ग्रामीणों ने इस नेक कार्य मे सम्मति जताई हैं। बताते चले कि मू० अविनाश महतो ने पहले ही अपनी एक एकड़ जमीन डी० के० खापर्डे मेमोरियल ट्रस्ट को भेंट कर चुके हैं।






