मूलनिवासी कर्मचारी कल्याण महासंघ (मूककम) द्वारा झारखंड में दो दिवसीय प्रबोधन शिविर संपन्न

मूलनिवास कर्मचारी कल्याण महासंघ द्वारा दिनांक 8 और 9 नवंबर को दो दिवसीय प्रबोधन शिविर का आयोजन किया गया था। यह कार्यक्रम गढ़वा झारखंड में संपन्न हुआ। इस शिविर में मूलनिवासी कर्मचारी कल्याण महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एस. एस. धम्मी प्रमुखता से उपस्थित थे।

शिविर में कर्मचारियों की महत्वपूर्ण माँगो पर ध्यानाकर्षण किया गया। जिनमे 1. पदोन्नति में ओबीसी के लिए प्रतिनिधित्व और ओबीसी के लिए क्रिमी लेयर का उन्मूलन।

  1. सार्वजनिक नियुक्तियों, पदोन्नति, प्रतिनियुक्ति, पार्श्व इकाई, संविदात्मक नियुक्ति आदि के सभी स्तरों के लिए अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रतिनिधित्व के लिए एक अधिनियम के अधिनियमन की आवश्यकता।
  2. अनुच्छेद 312 के तहत अखिल भारतीय न्यायिक सेवा का गठन, राज्यों औरपूरे सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण और नियंत्रण को अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग को रोकना।
  3. राज्यों और अखिल भारतीय स्तर पर उनकी जनसंख्या के अनुसार सभी परिषदों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग को प्रतिनिधित्व देना।
  4. नई पेंशन योजना को पुरानी पेंशन योजना से बदल दिया जाए। इत्यादि माँगे शामिल थी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एस. एस. धम्मी ने कहा कि बामसेफ को तब पैदा किया था जब हमारे एससी, एसटी के लोग एक MLA या एमपी के टिकट के लिए तमाम राष्ट्रीय पार्टियों के नेताओं के आगे ग़ुलामों की तरह झुक कर सलाम करते थे। उस जमाने में जो हालत थे इस से समाज को कैसे निकला जाता? भविष्य में ऐसा हाल ना हो इससोच के साथ 1971 में कांशीराम जीने खापर्ड़े जी और उनकी टीम के साथ मिलकर बामसेफ की स्थापना की|

मूलनिवासी कर्मचारी कल्याण महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष, एस एस धम्मी इन्होंने प्रबोधन शिविर को संबोधित किया। इस कार्यक्रम में एससी एसटी एम्प्लोई कोऑर्डिनेशन कौंसिल, झारखंड के अध्यक्ष मू ब्रजकिशोर राम, बामसेफ के केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य, मू मनोज कुमार, मूलनिवासी कर्मचारी संघ के ज़िला अध्यक्ष मू उबोध राम, मूककम एवं भारी संख्या में कर्मचारी वर्ग उपस्थित थे।

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