सभी साथियों को विश्वविभूति भारतरत्न बाबासाहेब डॉ भीमराव अंबेडकर की 130वीं जन्म जयंती की हार्दिक बधाइयाँ और अनेक मंगल कामनाएं।
डॉ बाबासाहेब आंबेडकर का आधुनिक भारत के राष्ट्र निर्माण मे किया गया योगदान अतुलनीय है । उन्होने भारत को एक आधुनिक राष्ट्र बनाने के लिए महिला सशक्तीकरण से लेकर संविधान निर्माण , सामाजिक विकास के अलावा अनेकों ऐसे काम किए जिसका प्रभाव हर भारतीय के जीवन पर पड़ा है ।
आइए , बाबासाहेब के कुछ और कार्यो की एक झलक देखते हैं :
1) भारतीय रिजर्व बैंक स्थापित करने में योगदान:
डॉ अंबेडकर एक जाने माने अर्थशास्त्री थे। जून 1916 में अंबेडकर ने पी॰ एच॰ डी॰ के लिए थीसिस प्रस्तुत की जिसका शीर्षक था ‘नेशनल डिविडेंड फॉर इंडिया, ए हिस्टोरीक अँड एनालिटिकल स्टडी’। अर्थशास्त्र में डी॰ एस॰ सी॰ के लिए मार्च 1923 में उन्होने अपनी थीसिस ‘द प्रोब्लेम ऑफ द रूपी–इट्स ऑरिजिन अँड इट्स सोल्यूशंस’ प्रस्तुत किया। इस थीसिस को लंदन की पी एस किंग अँड कंपनी ने दिसम्बर 1923 में ‘द प्रोब्लेम ऑफ द रूपी’ के नाम से प्रकाशित किया। पुस्तक की भूमिका मशहूर अर्थशास्त्री प्रोफेसर कैनन ने लिखकर डॉ अंबेडकर की भूरि भूरि प्रशंसा की । इस पुस्तक में डॉ अंबेडकर ने मुद्रा समस्या का अत्यंत विद्वतापूर्ण विवेचन किया है। डॉ अंबेडकर के अनुसार टकसाल बंद कर देने से मुद्रास्फीति तथा आंतरिक मूल्य असंतुलन दूर हो सकता है। उनका कहना था कि सोना मूल्य का मापदंड होना चाहिए और इसी के अनुसार मुद्रा में लचीलापन होना चाहिए। डॉ अंबेडकर का निष्कर्ष था कि भारत को स्वर्ण विनिमय मानक की मौद्रिक नीति अपनाने से बहुत नुकसान हुआ है। उनका निष्कर्ष था कि भारत को अपनी मुद्रा विनिमय दर स्वर्ण विनिमय मानक की जगह स्वर्ण मानक अपनाना चाहिए जिससे की मुद्रा विनिमय दर में बहुत अधिक उतार चढ़ाव न हो और सट्टेबाजी को अधिक बढ़ावा न मिले।
मौद्रिक नीति के विषय में उन्होने जे. एम. केन्स जैसे नोबल पुरस्कार प्राप्त अर्थशास्त्री से भी टक्कर ली जो कि स्वर्ण विनिमय मानक स्वर्ण विनिमय मानक के पक्षधर थे। रुपए के संबंध में यह पुस्तक अब तक लिखी गयी सभी पुस्तकों से श्रेष्ठ थी । पुस्तक की समीक्षा करते हुए ‘द टाइम्स’ (लंदन) ने लिखा: ‘यह पुस्तक अति श्रेष्ठ रचना है, अँग्रेजी की शैली सुगम है । अपने विषय में उनकी सम्पूर्ण पैठ है’ । द इकनोमिस्ट(लंदन) ने लिखा: ‘सुस्पष्ट और सुयोग्यतापूर्ण लिखी गयी पुस्तक है । अन्य अनेक रचनाओ में से मुद्रा समस्या का कोई अन्य पहलू निश्चित रूप में इतना पठनीय नहीं है’।
कुछ समय पश्चात रॉयल कमिशन ऑन इंडियन करेंसी अँड फ़ाइनेंस जिसको हिल्टन युवा आयोग के नाम से भी जाना जाता है भारत आया। इस आयोग के हर सदस्य के पास ‘द प्रोब्लेम ऑफ द रूपी’ पुस्तक संदर्भ ग्रंथ के रूप में मौजूद थी।
भारत की मुद्रा समस्या के बारे में डॉ अंबेडकर ने हिल्टन युवा आयोग के सामने जो विचार प्रस्तुत किए वे उनकी मुद्रा समस्या के विषय में बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान थे। आयोग ने अपनी रिपोर्ट सन 1926 में प्रस्तुत की। इसी रिपोर्ट के आधार पर 1 अप्रैल 1935 को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की स्थापना हुई ।
2) श्रमिक कल्याणकारी कानून और डॉ अंबेडकर (भविष्य निधि (PF) और रोजगार कार्यालय के जनक) :
2 जुलाई, 1942 को वाइसरॉय की एक्जिक्यूटिव कौंसिल में डॉ अंबेडकर को श्रम सदस्य (वर्तमान समय में लेबर मिनिस्टर) के रूप में शामिल किया गया । मालिक मजदूरों के तमाम संघर्षों में उन्होने मजदूरों का साथ दिया । 7 मई 1943 को उन्होंने त्रिपक्षीय श्रम सम्मेलन द्वारा संस्थापित स्थायी श्रम समितियां और रोजगार कार्यालय स्थापित करने के लिए पहल किया । आज जो हम हर जिले में रोजगार कार्यालय (इम्प्लॉइमेंट एक्स्चेंज) देख रहे हैं, वो डॉ अंबेडकर की ही देन है । श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा के लिए उन्होने भविष्य निधि योजना ( प्रोविडेंट फ़ंड ) लागू करवाया । उन्होंने नौकरीपेशा लोगों के लिए काम के घंटे तय करने में भी भूमिका निभाई। उनका मानना था कि एक व्यक्ति का काम करने का घंटा निश्चित रहना चाहिए।
3) अप्रैल 1944 में डॉ. अंबेडकर ने एक संशोधन बिल पेश किया कि निरंतर काम करने वाले मजदूरों को सवेतन अवकाश दिया जाए । डॉ अंबेडकर ने मजदूरों से कहा कि वे पूँजीपतियों से यह सवाल पुंछे कि उन्होने मजदूरों का रहन–सहन ऊंचा उठाने के लिए पैसा क्यों नहीं खर्च किया? डॉ अंबेडकर के अनुसार औद्योगिक शांति स्थापना के लिए एक समझौता व्यवस्था, श्रम-विवाद-कानून में संशोधन और न्यूनतम वेतन कानून आवश्य्क थे। उन्होंने कहा कि औद्योगिक शांति कानून के आधार पर स्थापित हो सकती है, पर यह आवश्यंक नहीं कि ताकत के बल पर ही यह संभव हो। इसके लिए त्रिपक्षीय मार्ग ही अनुकूल रहेगा। उनका कहना था कि शोषण समाप्त करके, श्रम कल्याण द्वारा और सही औद्योगिक संबंधों के जरिए ही औद्योगिक शांति स्थापित हो सकती है। औद्योगिक शांति के लिए यह आवश्यंक है कि मालिक और मजदूरों के बीच के झगड़े सामाजिक न्याय के सिद्धांत पर सुलझाए जाएं।
4) किसानों के हितैषी डॉ. आंबेडकर सार्वजनिक निर्माण: कार्य मंत्री के रूप में डॉ. आंबेडकर द्वारा किया गया काम उल्लेखनीय है। इसका फायदा विशेष कर देश के किसानों को मिला। वाइसरॉय की एक्जिक्यूटिव काउंसिल में डॉ. आंबेडकर को केंद्रीय सार्वजनिक निर्माण विभाग (सीपीडब्यू डी) का मंत्री बनाया गया। इस पद पर रहते हुए डॉ. आंबेडकर ने अगस्त। 1945 में बंगाल और बिहार के लिए एक बहुउद्देशीय दामोदर घाटी विकास योजना प्रस्तुत की जो अमेरिका के तेन्नेसी वैली प्रोजेक्ट से मिलती जुलती थी। इस योजना के तहत सिंचाई के लिए पानी, जल मार्ग से यातायात, बिजली का उत्पादन आदि जैसे काम किए गए जिससे देश के करोड़ो लोगों को लाभ मिला। नवंबर 1945 में उन्होंने उड़ीसा में वहां की नदियों के विकास के लिए एक बहुउद्देशीय योजना शुरू की जो अंतत: हीराकुंड बांध के रूप में कारगर हुई। डॉ. आंबेडकर ने हीरा कुंड बांध योजना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ. आंबेडकर का मानना था कि जल मार्गों का विकास कर सस्ते यातायात को बढ़ावा दिया जा सकता है। उनका कहना था कि बिजली का उत्पादन और सिंचाई योजनाओं का विकास भारत के औद्योगिकरण के लिए और आर्थिक विकास के लिए अति आावश्यक है। उन्होंने भारत की खनिज संपदा के विकास और उत्खनन के लिए एक विस्तृत योजना प्रस्तुत की और जोलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया का पुनर्गठन किया।
5) मानव अधिकारों के संरक्षक
डॉ. आंबेडकर का मानना था कि सरकार एक ऐसा संगठन है जो (1) जनता की जीवन रक्षा, स्वतंत्रता, सुख, भाषा और धर्म पालन के अधिकारों की रक्षा करता है, (2) पिछड़े वर्गों को समान अवसर प्रदान करके सामाजिक, राजनैतिक और आर्थिक समानताओं को दूर करता है और (3) अपने हर नागरिक को अभाव और भय से मुक्ति प्रदान करता है। स्वतंत्रता-पूर्व भारत में उन्होंने भारतीयों की आजादी और अधिकारों की लड़ाई लड़ी। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता मात्र राजनैतिक नहीं, यह सामाजिक, आर्थिक, बौद्धिक एवं आध्यांत्मिक भी होनी चाहिए। डॉ. आंबेडकर कहते थे कि सरकार की सत्ता और व्यक्ति की स्वतंत्रता में संतुलन होना चाहिए। उनका कहना था कि अच्छी सरकार वही है जो एक समुदाय को दूसरे समुदाय के शोषण के बचाए और देश में आंतरिक उपद्रवी, हिंसा और अव्यवस्था पर नियंत्रण करे और प्रत्येक व्यक्ति को उसके मूलभूत अधिकारों का उपयोग करने में सहायता करे। :
बाबासाहेब द्वारा किए गए उपरोक्त कार्यों के लिए बाबासाहेब को बामसेफ परिवार की तरफ से बहुत-बहुत अभिवादन।
जय भीम जय मूलनिवासी जय संविधान
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Rama Shankar
National General Secretary
BAMCEF






