केंद्र सरकार अपनी विनिवेश की नीति राष्ट्रीय मौद्रीकरण पाइपलाइन (एनएमपी) के तहत कई अपनी मालकी के कई उद्योग व परिसंपतियां या तो बेच रही है या फिर भाड़े पर दे रही है। पिछले वर्ष राष्ट्रीय मौद्रीकरण पाइपलाइन (एनएमपी) के तहत, एएआई द्वारा संचालित 25 हवाईअड्डों के संपत्ति मौद्रीकरण का निर्णय लिया गया था। इनमें भुवनेश्वर, वाराणसी, अमृतसर, त्रिची, इंदौर, रायपुर, कालीकट, कोयंबटूर, नागपुर, पटना, मदुरै, सूरत, रांची जोधपुर, चेन्नई, विजयवाड़ा, वडोदरा, भोपाल, तिरुपति, हुबली, इंफाल, अगरतला, उदयपुर, देहरादून और राजमुंदरी शामिल हैं।
यह हवाई अड्डे विभिन्न राज्यों में हैं तो जाहीर है कि इसमें राज्यों का भी हिस्सा है। हाल ही में तमिलनाडू राज्य ने एक पॉलिसी नोट बनाई कि अगर राज्य सरकार केंद्र द्वारा संचालित भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण अर्थात एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) को मुफ्त में जमीन का आवंटन और हस्तांतरण करती है और अगर एएआई या केंद्र उस जमीन को तीसरे पक्ष को सौंपता है तो उससे अर्जित राजस्व को राज्य सरकार के साथ साझा किया जाना चाहिए।
तमिलनाडु राज्य के इस रुख के बाद अब छतीसगढ़ और झारखंड राज्यों ने भी इसका समर्थन किया है। छत्तीसगढ़ के पंचायत और ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण और वाणिज्यिक कर मंत्री टी एस सिंहदेव ने मीडिया को यह कहा कि भूमि राज्य का संसाधन है और जब राज्य और केंद्र एक परियोजना विकसित करने के लिए साथ काम करते हैं तो राज्य सरकार की उसमें अंशधारक के तौर पर पूंजी लगी होती है, क्योंकि भूमि राज्य सरकार की होती है। जब आप एक संयुक्त उद्यम में होते हैं तो भारत सरकार बुनियादी ढांचे के मामले में पूंजी लगाती है और राज्य सरकार अपनी पूंजी के तौर पर भूमि देती है।








