वरिष्ठ शिक्षाविद, साहित्यकार डॉ मा गो माली का दिनांक 28 मई को दुखद निधन हुआ। वे 90 वर्ष के थे। उनके निधन से हमने एक प्रतिभाशाली वरिष्ठ लेखक और विचारक को खो दिया है।
उन्होंने राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले , क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले, राजर्षि शाहू जी महाराज और डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के जीवन पर आधारित कई पुस्तकें लिखीं। वे फुले समग्र वाङ्ग्मय पुस्तक प्रकाशन कमेटी के सदस्य थे।
लेखक और विचारक डॉ मा गो माली ने राज्य में विभिन्न पदों पर कार्य किया। उन्होंने महाराष्ट्र स्टेट बोर्ड ऑफ सेकेंडरी हायर सेकेंडरी एजुकेशन के सदस्य के रूप में भी जिम्मेदारी का निर्वहन किया। महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक बोर्ड के बालभारती संपादकीय विभाग के अध्यक्ष के रूप में भी उन्होंने जिम्मेदारी संभाली। साथ ही मौनी विश्वविद्यालय के पूर्व निदेशक, आचार्य जावड़ेकर, शिक्षा महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य के रूप में भी उन्होंने कार्य किया।
जीवनभर अपनी कलम के माध्यम फूले-शाहू-आंबेडकर विचारों को समाज तक पहुंचानेवाले डॉ मा गो माली “महात्मा ज्योतिबा फुले विश्वभारती संस्था” के संस्थापक अध्यक्ष थे। उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। उन्हें अखिल भारतीय महात्मा ज्योतिबा फुले समता परिषद द्वारा दिए जानेवाले “समता पुरस्कार” से भी सम्मानित किया जा चुका है।
डॉ.मा.गो. माली जीवन भर प्रगतिशील विचारक रहे हैं। डॉ मा गो माली ने अपने जीवन में सत्यशोधक पद्धति का अनुकरण करते हुए, दूसरों को भी ऐसा करने का आग्रह किया।
वे मौनी विश्वविद्यालय, गारगोठी जिला कोल्हापुर में प्रोफेसर और विषय प्रमुख, साथ ही मराठी-हिंदी साहित्य के एक उत्सुक छात्र और एक प्रतिभाशाली लेखक भी रह चुके है। ग्रामीण महाराष्ट्र से वे जन्म से जुड़े हुए थे। महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें छत्रपति शाहू सामाजिक समता पुरस्कार और दलित मित्र पुरस्कार से भी सम्मानित किया।
उनके मार्गदर्शन में लगभग 100 से अधिक छात्र पीएच.डी. / एम फील डिग्री ले चुके है। कोल्हापुर निवासी कर्मयोगी डॉ. म. गो. माली इन्होंने बहुजन समाज आंदोलन में अंधविश्वास के उन्मूलन और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
डॉ मा गो माली के निधन से शिक्षा क्षेत्र के साथ-साथ साहित्यिक और प्रगतिशील आंदोलन को अपूरणीय क्षति हुई है। उन्हें MNT न्यूज़ नेटवर्क की ओर से भावभीनी आदरांजलि।







