क्या भारत को हिंदुस्तान कहना संवैधानिक हैं?

========

इस देश को संविधान ने दो नामों का दर्जा दिया हैं, पहला इंडिया और दूसरा भारत। लेकिन आज भी कुछ संविधान विरोधी इस देश का नाम हिंदुस्तान कह कर पुकारते हैं जो संवैधानिक नहीं हैं। जबकि इस देश के नामकरण को लेकर संविधान सभा में दो दिनों तक बहस हुई थी। तब जाकर संविधान सभा ने इन दो नामों पर सहमति जताई थी।

=======

पंद्रह अगस्त, उन्नीस सौ सैंतालीस को जब देश अंग्रेजो से आजाद हुआ तो देश को एक संविधान की जरूरत पड़ी। जिसमे देश के नामकरण से लेकर सरकार के उद्देश्यों और नागरिकों के मौलिक अधिकारों और स्वतंत्रता की रक्षा करने की जिम्मेदारी थी।

भारतीय संविधान विश्व का सबसे बेहतरीन और भव्य लिखित संविधान हैं। जिसके पहले अनुच्छेद के पहले पंक्ति में हमें देश के नाम का उल्लेख मिलता हैं। जिसमे लिखा हैं, भारत अर्थात इंडिया राज्यों का संघ होगा । जबकि अंग्रेजी में, इंडिया दैट इज भारत’ लिखा हुआ मिलता हैं।

इन दोनो वाक्यों का यही मतलब है की, देश के संविधान के हिसाब से हमारे देश के दो आधिकारिक नाम हैं और वे है पहला इंडिया और दूसरा भारत। जबकि आज भी कई जगह में हिंदुस्तान का प्रयोग किया जाता हैं जो संवैधानिक नहीं हैं।

बताते चले की ऐसा नहीं हैं की संविधान निर्माताओं ने देश का नामकरण ऐसे ही कर दिया था। जिस तरह संविधान के बाकी अनुच्छेद काफी बहस और गंभीर विचार विमर्श के बाद लिखा गया था। ठीक उसी प्रकार संविधान का अनुच्छेद एक भी काफी बहस होने के बाद ही लिखा गया।

सत्रह सितंबर, उन्नीस सौ उन्चास को जब संविधान की ड्राफ्टिंग कमिटी के चेयरमैन डॉ. भीमराव अंबेडकर संविधान सभा के सामने पहला अनुच्छेद का ड्राफ्ट लेकर पहुंचे थे, तो वे चाहते थे कि इसे आधे घंटे के अंदर पास कर दिया जाये। मगर इस अनुच्छेद एक की पहली ही पंक्ति ऐसी थी, जिस पर विवाद हो गया क्योंकि संविधान निर्माण से पहले भारत के कई नाम थे। जैसे जम्बूद्वीप, आर्यावर्त हिंदुस्तान, भारत और इंडिया।

जबकि संविधान की पहली पंक्ति थी, “इंडिया दैट इज भारत” यानी हिंदी में “भारत अर्थात इंडिया राज्यों का संघ होगा।” फिर इंडिया और भारत शब्द पर दो दिन तक बहस चली। यह बहस वाजिब भी थी, क्योंकि हमारे संविधान निर्माता देश का आधिकारिक नाम तय कर रहे थे। और यह सहमति बनी की इस देश के दो ही आधिकारिक नाम होंगे।

लेकिन इसके बाद भी ब्राह्मणवादी व्यवस्था ने हिंदुस्तान नाम को लोगों के जहन में रखने के लिए कई संस्थानों का नाम हिंदुस्तान रखा। जो बिल्कुल संवैधानिक नहीं हैं।

संवैधानिक तौर पर इस देश का नाम हिंदुस्तान इसलिए भी नहीं रखा जा सकता क्योंकि देश का संविधान भारत को एक धर्मनिरपेक्ष राज्य के रूप में परिभाषित करता हैं। जिसमें विभिन्न धर्मों के लोग समान मौलिक अधिकारों के साथ इस देश में निवास करते हैं। जबकि हिंदुस्तान का मतलब हिंदुओं का स्थान होता हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here