पंचायत राज व्यवस्था के अनुसार देश में करीब ढाई लाख ग्रामपंचायतें हैं। इन ग्रामपंचायतों में अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़े वर्ग के सदस्यों तथा महिलाओं को प्रतिनिधित्व के लिए आरक्षण का प्रावधान है। जिसके चलते प्रत्येक जिले में ग्रामपंचायतों में इन वर्गों से सदस्य और सरपंच बन रहे हैं। इतना है नहीं बल्कि ब्लॉक पंचायत और जिला पंचायत में सदस्य या अध्यक्ष बन रहे हैं।
इसके साथ ही इन समुदायों में से बने ग्रामपंचायत सदस्यों और प्रधानों के साथ हो उत्पीड़न के मामले रोज सामने आ रहे हैं। पुलिस में इसकी खबर दी जाती है, अखबारों में कहीं कहीं इसे छापा जाता है। लेकिन इसके ऊपर क्या कारवाई होती है यह अपने आप में गंभीर सवाल है।
ऐसी ही एक घटना मध्यप्रदेश के रीवा जिले के नईगढी तहसील में हुयी है। यहां के ग्राम गेरूआरी पड़ान के सरपंच रामकृपाल प्रजापति ने पुलिस में उत्पीड़न की लिखित शिकायत दर्ज की है।
सरपंच रामकृपाल प्रजापति ने अपनी शिकायत में कहा है कि उन्हें रोहित पांडेय, रामु पांडेय, आनंद शर्मा और मनोज रजक, तनय रजक इन्होंने जाति सूचक बातों को कहते हुए गालियां दी और पैसों की मांग की। न देने पर जान से मरने की धमकी भी दी। इस मौके पर घर की महिलाओं ने उन्हें विरोध किया तो उन्हें भी गालियां दी और धमकाया। सरपंच रामकृपाल प्रजापति कुम्हार जाति से हैं जोकि अनुसूचित जाति है।
सरपंच रामकृपाल प्रजापति ने अपनी शिकायत में कहा है कि उन्हें अक्सर यह लोग अवैध रूप से पैसा मांगते हैं। शिकायत के अनुसार धमकाने वाले लोग खुद को विधायक और विधानसभा अध्यक्ष के लोग बताते हैं।
रामकृपाल प्रजापति ने शिकायत में लिखा है कि धमकाने और पैसा मांगने वाले लोग सरहंग एवं अपराधि प्रवृत्ति के राजनैतिक लोग है। सरपंच की बहु लक्ष्मी प्रजापति ने पुलिस को अलग से दिए लिखित शिकायत में कहा है कि मामले को एससीएसटी एट्रोसिटी एक्ट के अंतर्गत दर्ज किया जाए और परिवार को सुरक्षा दी जाए।
आपको बता दें कि पंचायत राज व्यवस्था में चुने गए एससी एसटी ओबीसी सदस्य और प्रधानों द्वारा देश भर से उनके साथ हो रहे उत्पीड़न की हजारों घटनाओं को पुलिस में दर्ज किया है। पंचायत राज एक्ट अंतर्गत इस पर विधि की मांग की जा रही है कि ऐसे मामलों में दोषी पाए व्यक्तियों को कानूनी सजा के साथ-साथ चुनाव लड़ने, मतदान करने तथा सरकारी योजना पाने से भी वंचित किया जाए। इसके लिए पंचायत राज की त्रिस्तरीय व्यवस्था के अंतर्गत शिकायत और कार्रवाई करने की व्यवस्था हो।
साथ ही यह भी मांग हो रही है कि अगर किसी ग्राम में जातीय और महिलाविरोधी अत्याचार की घटनाएं लगातार होती है तो उस ग्राम को ब्लैक लिस्ट में डाला जाए। साथ ही जिन ग्रामों ने ऐसी घटनाओं पर रोक लगायी है उन्हें पुरस्कृत किया जाए।
उक्त घटना को गंभीरता से लेते हुए मूलनिवासी विद्यार्थी संघ के रविराज बंसल ने पुलिस थाने में मामला दर्ज कराने में रामकृपाल प्रजापति की मदद की। मूलनिवासी विद्यार्थी संघ मध्यप्रदेश के प्रदेश महासचिव रजनीश प्रजापति ने इस बारे में शिकायतकर्ता सरपंच रामकृपाल प्रजापति से अधिक जानकारी ली।







