कठुआ और हाथरस की अमानवीय घटनाओं को देश कभी भूल नहीं पा रहा है। अब राजधानी दिल्ली में अमानवीय अत्याचार की घटना हुयी जिसको लेकर पूरी दिल्ली समेत देशभर में गुस्से का माहौल खड़ा हुआ है।
रविवार 1 अगस्त रात को दिल्ली के पुराने नंगल गांव के श्मशान घाट पर सैंकड़ों गांववाले गुस्से में इकट्ठा हुए। संदिग्ध रूप से मृत हो गयी नौ वर्ष मासूम लड़की को न्याय दिलाने के लिए गांव वालों का गुस्सा और आक्रोश स्पष्ट दिखाई दे रहा था। यह मामला मासूम लड़की के संदिग्ध मौत का है।
गांववालों और मृत लड़की के माता पिता का आरोप है कि पुजारी पंडित राधेश्याम और उसके साथियों ने 9 वर्षीय मासूम बच्ची का बलत्कार किया और बाद में उसे मार दिया। सबूत मिटाने के लिए उस बच्ची के शरीर को जला दिया। यह बात पता चलते ही पुराने नंगल गांव के श्मशान घाट पर सैंकड़ों लोगों की भीड़ गुस्से में इकट्ठा हुयी। दिल्ली पुलिस ने इस अमानवीय वारदात में श्मशान घाट के 55 वर्षीय पुजारी राधे श्याम और श्मशान घाट के तीन कर्मचारियों सलीम, लक्ष्मी नारायण और कुलदीप को गिरफ्तार किया।
पूरी दर्दनाक घटना इस प्रकार है, दिल्ली कैंटोनमेंट के अंतर्गत आनेवाले पुराने नंगल गांव के श्मशान घाट में लगे वाटर कूलर पर श्मशान के सामने रह रहे लोग पानी लेने आते रहते हैं। हमेशा की तरह यहां आनेवाली 9 वर्षीय लड़की रविवार शाम को कूलर से पानी भरने आयी, लेकिन वह वापस घर नहीं लौटी। देर शाम को पुजारी पंडित राधेश्याम और उसके साथियों ने लड़की के मां को बुलाया और कहा कि उसकी बेटी कूलर से बिजली का करेंट लग कर मर गयी। बताया जा रहा है कि पुजारी ने बच्ची के नीले हुए होंठ और जले हुए हाथ और कोहनी दिखाई।
लेकिन वास्तविक मामला यह नहीं है, पुजारी और अन्य लोगों ने उसकी मां को पुलिस को सूचना देने से मना करते हुए कहा कि पुलिस केस बना देगी और पोस्टमॉर्टम के दौरान डॉक्टर बच्ची के अंगों को चुरा लेंगे, इसलिए उसका अंतिम संस्कार करना बेहतर है। पुजारी और उसके साथियों ने सदमां पहुंचे माता पिता पर दबाव डालते हुए मृत लड़की का तुरंत दाह करने पर जोर देते हुए तुरंत चिता रचकर मृत शरीर को जलाया। बताया जा रहा है कि बच्ची को चिता पर मुंह के बल लिटाकर जलाया गया।
बच्ची की इस प्रकार से मृत्यु होने की बात पर माता पिता को यकीन नहीं होने और पुजारी और उसके साथियों द्वारा मासूम बच्ची का तुरंत दाह कराने की घटना को उन्होंने गांववालों को बताया। जैसे ही इस बात की जानकारी गांव के लोगों तक पहुंची लोग भारी संख्या में पहुंचे। एक अगस्त की रात को लगभग 10.30 बजे गुनाह दर्ज कराया गया। बच्ची की जलती चिता को बुझाया गया, उसमें से बचे अवशेषों को मेडिकल जाँच के लिए भेज दिया गया।
बताया जा रहा है कि पुलिस ने पहले इसे गैरइरादतन हत्या करार दी थी, लेकिन वारदात की गंभीरता के कारण बढ़ते दबाव को देखते हुए अब इस मामले में आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 376 (बलात्कार) और 506 (आपराधिक धमकी) के अलावा यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अधिनियम की धाराओं के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।
दिल्ली की यह गुस्सा देनेवाली घटना, कठुआ में मासूम बालिका पर हुए सामूहिक दुष्कर्म अत्याचार और हत्याकांड के साथ हाथरस की सामूहिक दुष्कर्म और हत्या की याद दिला रही है। लोग पुलिस द्वारा आधी रात को हाथरस की बेटी के शव को जलाये जाने की वारदात को भूल नहीं रहे हैं।
इस मामले में दिल्ली पुलिस द्वारा दिए गए कुछ जानकारियों पर आपत्तियां दर्ज की जा रही है। दिल्ली पुलिस पर यह दबाव बनाया जा रहा है कि वह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से इस बलात्कार और गैंग रेप के मामले में पूरी जाँच करें ताकि पीड़िता को न्याय मिल सके। बीते सोमवार और मंगलवार को इस घटना के विरोध में प्रदर्शन हुए।







