केंद्रीय विश्वविद्यालयों में ओबीसी, एसटी, एसटी के हजारो पद नहीं भरे गए

केंद्रीय विश्वविद्यालय का नाम लेते ही कुछ चुनिंदा नाम सामने आते हैं। जैसे कि दिल्ली विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, हैदराबाद विश्वविद्यालय। भारत में आज करीब 45 केंद्रीय विश्वविद्यालय है। अर्थात केंद्र सरकार खुद इन्हे चलाती है। लेकिन केंद्र सरकार इसे कैसे चलाती है यह संसद में पीएम नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल के शिक्षा मंत्री ने लिखित रूप में दी है।

आपको यह जानकर हैरानी नहीं होनी चाहिए कि पिछले कई वर्षों से केंद्रीय विश्वविद्यालयों और केंद्रीय अनुसंधान संस्थाओं में हजारों पद स्वीकृत अर्थात निर्धारित है लेकिन भारी संख्या में पद खाली है।

2 अगस्त को एक सवाल को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा दिए गए लिखित जवाब में यह जानकारी सामने आयी है कि केंद्रीय विश्वविद्यालय और केंद्रीय अनुसंधान संस्थाओं में 18,353 पद एससी एसटी ओबीसी के स्वीकृत है, लेकिन इनमें से 8773 पद खाली है। इन 18353 स्वीकृत पदों में पदों में अकेले ओबीसी के 8617 पद हैं लेकिन ओबीसी के 4821 पद खाली है। अर्थात 47.8 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं।

लिखित जवाब दिया। हालाँकि यह नया जवाब नहीं है। इसके पहले भी इन पदों के बारे में सवाल पूछे गए थे और जवाब भी करीब करीब ऐसे ही थे।

आपको बता दें पीएम नरेंद्र मोदी के शिक्षा मंत्री ने 2 अगस्त 2021 को दिए जवाब में यह साफ बताया गया है कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में एससी के 5737, एसटी के 3097, और ओबीसी के 7815 पद स्वीकृत है और इनमें से एससी के 2389, एसटी के 1199, और ओबीसी के 4251 पद खाली है। प्रतिशत देखा जाए तो ओबीसी के 54.3, एससी के 41.6 और एसटी के 38.7 पद खाली पड़े हैं। सरकार के अनुसार केंद्रीय विश्वविद्यालयों की यह स्थिति 1 अप्रैल 2021 की है।

यही हाल इग्नू अर्थात इंदिरा गाँधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी का है। इग्नू में 906 पद एससी एसटी और ओबीसी के है लेकिन इसमें से 476 पद खाली है।

इसके अलावा भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान अर्थात आईआईएसईआर और भारतीय विज्ञान संस्थान अर्थात आईआईएससी में कुल 798 पद एससी, एसटी, ओबीसी के लिए स्वीकृत है। लेकिन उसमें से केवल 340 पद भरे गए हैं और 458 पद खाली है। अगर आप आईआईएससी की तरफ देखें तो ओबीसी के लिए 303 पद स्वीकृत है और भरे गए है केवल 31 अर्थात 272 पद खाली है।

आपको बता दें कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा 23 जुलाई 2018 को दिए जवाब के अनुसार देश के 40 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में कुल स्वीकृत 17092 शैक्षिक पदों में से 5606 पद खाली थे। करीब एक सवाल बाद 24 जून 2019 को दिए जवाब में बताया गया था कि 17834 पदों में से 6719 पद खाली है। इसके बाद 14 सितम्बर 2020 को पूछे गए सवाल के जवाब में कहा गया था कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अधिकार में आने वाले कूल 42 केंद्रीय विश्व विद्यालयों में से शिक्षण और और गैर शिक्षण के क्रमशः 6210 और 12437 पद खाली है। यानी वर्ष 2018 से लेकर 2021 इन चार वर्षों में हर साल सरकार का जवाब लगभग एक जैसा ही है।

यह बात केवल एक ही विभाग की नहीं है। अगर सरकार को हर के विभाग के बारे में पूछा जाए तो एससी एसटी ओबीसी के कितने पद है और कितने खाली है यह साफ-साफ पता चल जाएगा। आपको बता दें जब संसद में सांसद जो सवाल पूछते हैं उसका जवाब सरकार को देना होता है। सवाल पूछने और उसका उत्तर पाने की एक प्रक्रिया है।

सरकार को यह सवाल पूछा गया कि यह पद क्यों खाली है? तो इसका भी जवाब सरकार के पास है कि रिक्त पदों को भरने का दायित्व विश्वविद्यालयों पर है। अब सवाल यह भी है कि अगर केंद्रीय विश्वविद्यालय स्वायत्त संस्थान है तो इनमें एससी, एसटी, ओबीसी के खाली रखे गए पदों के बारे में इन्हें कौन सवाल पूछेगा कि क्यों इसे खाली रखा गया है? क्या भर्ती प्रक्रिया की गयी है? यह भी सवाल है कि यूजीसी ने इन्हें लिखने के बावजूद भी अगर पद भरे नहीं जा रहे हैं तो कौन इन्हें बंधनकारक करेगा की यह जल्द से जल्द भरे जाएं?

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