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छ. शाहूजी महाराज के सम्मान में मूलनिवासी अधिकार जनसभा
रीवा मध्य प्रदेश में पीपीआईडी की मूलनिवासी अधिकार जनसभा सम्पन्न
प्रतिनिधित्व आरक्षण के आदेश को 120 वर्ष होने के उपलक्ष में जनसभा
मूलनिवासी जनसभा में 1500 से अधिक कार्यकर्ता सहभागी हुए
रीवा मध्य प्रदेश के गोपाल मैरिज गार्डन में 26 जुलाई को भारी संख्या में छ. शाहूजी महाराज के सम्मान में मूलनिवासी नागरिक इकट्ठा हुए थे। इसी दिन अर्थात 26 जुलाई 1902 को लोकराजा राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज ने अपने राज्य कोल्हापुर में पिछड़े वर्ग के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण लागू किया था।
लोकराजा राजर्षि छत्रपति शाहूजी द्वारा 26 जुलाई 1902 को पिछड़े वर्ग के लिए पार्टिनिधित्व का आरक्षण अधिकार का आदेश दिया था, इस ऐतिहासिक घटना को 120 वर्ष होने पर रीवा मध्य प्रदेश में 26 जुलाई 2022 को मूलनिवासी आधिकार जनसभा का आयोजन किया गया था। पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया (डेमोक्रेटिक) द्वारा इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में दूर दूर से आए 1500 से अधिक कार्यकर्त्ता सहभागी हुए थे।
पूरे दिन भर चली इस मूलनिवासी अधिकार जनसभा के कार्यक्रम में सुबह 9 बजे से ही विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए थे।
सुबह 9 बजे रीवा शहर में मोटरबाइक व कार मार्च का अयोजन किया गया था। करीब 23 किलोमीटर की रैली संपन्न हुई। इस रैली के मार्ग में सरदार वल्लभ भाई पटेल चौराहा पर उनकी प्रतिमा को अभिवादन किया गया। रैली मार्ग में रीवा कलेक्टर कार्यालय स्थित डा बाबासाहेब आंबेडकर जी की प्रतिमा को अभिवादन करते हुए रैली पुनः सभा स्थल पर पहुंची।
रीवा यह मध्यप्रदेश का महत्वपूर्ण संभाग है। इसमें रीवा, सिंगरौली, सतना व सीधी यह जिले आते हैं। फूले आंबेडकरी विचारधारा की राजनीति का यहां खासा प्रभाव हैं। आनेवाले समय में यहां संविधान लागू करने के लिए राजनितिक आन्दोलन को लेकर इस जनसभा का निश्चित ही लाभ होगा।
आपको बता दें कि मध्यप्रदेश के चुरहट नगरपरिषद में पार्षद पद पर चुनकर गयी पीपीआईडी की प्रत्याशी मू. कल्पना पाल व मनपुर नगरपरिषद से मू. कुसुम प्रदीप प्रजापति का इस मूलनिवासी अधिकार सभा में सन्मान व सत्कार किया गया। आपको यह भी बता दें कि इस जनसभा में शामिल रीवा संभाग और मध्य प्रदेश से दूर-दूर से आए सैंकड़ों कार्यकर्ताओं ने पीपीआईडी की सदस्यता ग्रहण की।
इस मूलनिवासी आधिकार जनसभा में जागरुकता चर्चा सत्र, कार्यकर्त्ता प्रतिनिधि सत्र का आयोजन किया गया था। “जाति आधारित जनगणना को नकारना – प्रतिनिधित्व न देने का षडयंत्र है” और “एक लोकतंत्र ही हमें पुनः शासक बना सकता है” इन दो विषयों पर गंभीर चर्चा की गई। इसवक्त पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व ने मार्गदर्शन किया।
मूलनिवासी अधिकार जनसभा का उदघाटन जागरुकता चर्चा सत्र से हुआ। इसकी अध्यक्षता पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया डेमोक्रेटिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष मू. हेमराज सिंह पटेल ने की। “जाति आधारित जनगणना को नकारना – प्रतिनिधित्व न देने का षडयंत्र है” इस विषय पर इस सत्र में चर्चा हुई। इस वक्त मू. सुनीता एन. कुमार (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, पीपीआईडी), मू. दयाराम जी (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, पीपीआईडी) ने उपस्थित कार्यकर्ताओं को मार्गदर्शन किया। इस सत्र का संचालन मू. अविनाश महतो (राष्ट्रीय संगठन सचिव, पीपीआईडी) ने किया व विषय पर प्रस्ताविक भाषण मू. आर. के. विद्यार्थी (राष्ट्रीय संगठन सचिव, पीपीआईडी) ने किया।
इस सत्र के तुरंत बाद “एक लोकतंत्र ही हमें पुनः शासक बना सकता है” इस विषय पर प्रतिनिधि सत्र संपन्न हुआ। इसकी अध्यक्षता पीपीआईडी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष इंजीनियर उमेश रजक ने की। इस सत्र में वक्ता के रूप में राष्ट्रीय अध्यक्ष, महिला विंग, पीपीआईडी मू. इंजीनियर नीलिमा भटकर, तथा पीपीआईडी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष व वर्तमान एनईसी सदस्य मू. बी. डी. बोरकर इन्होंने कार्यकर्ताओं को मार्गदर्शन किया। साथ ही मू. बिहारी लाल (राष्ट्रीय जोनल सचिव, पीपीआइडी) ने भी अपने विचार रखकर कार्यकर्ताओं को प्रबोधित किया। इस कार्यक्रम का संचालन मू. एस. एल. प्रजापति बाबा इन्होंने किया व प्रस्तावना पीपीआईडी के राष्ट्रीय कार्यालय सचिव मू. अजीत जिनवाल ने की।
समापनीय सत्र में, पीपीआईडी के राष्ट्रीय महासचिव मू. हरीश सहारे प्रमुख रूप से मार्गदर्शन किया। साथ ही इस वक्त वरिष्ठ कार्यकर्ता एच एस पटेल इन्होंने ने भी अपने विचार रखें।

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