दहेज प्रथा महिलाओं के लिए बना अभिशाप । दहेज के कारण प्रतिदिन 20 मौतें।

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दहेज से हुई मौत के पैतीस हजार से अधिक मामले।

दहेज के कारण उत्तर प्रदेश में रोजाना 6 मौतें।

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इस देश मे दहेज प्रथा सदियों से चली आ रही एक ऐसी कुप्रथा हैं। जो आज भी समाज में फल-फूल रही हैं। आंकड़ो के मुताबिक देश में 2017 से 2021 के बीच पैतीस हजार से अधिक दहेज से जुड़ी मौत की ख़बर आयी हैं। इस बीच देश मे प्रतिदिन 20 मौते दर्ज की गई हैं।

मनुवादी ताकतों ने इस समाज में अनेक कुप्रथाओं को स्थापित किया। उत्तर वैदिक काल में तोहफे के रूप में दहेज जैसी कुप्रथा का आरंभ हुआ । जो आज के दौर में एक पिता के लिए किसी अभिशाप से कम नहीं हैं।

भारत मे इससे जुड़ी कई घटनाएं सामने आती रहती हैं। सरकारी आंकड़ो के अनुसार देशभर में साल 2017 से लेकर 2021 तक दहेज के चलते कुल 35,493 मौते हुई हैं। जबकि 2017-21 के बीच देश मे प्रतिदिन 20 मौते हुई। वही उत्तर प्रदेश में दैनिक मृत्यु का आंकड़ा सर्वाधिक रहा, जहां हर दिन 6 मौतें दर्ज की गई।

इस देश में इस कुप्रथा को खत्म करने के लिए कई कानून बनाये गए। लेकिन आज भी समाज में दहेज प्रथा प्रचलित हैं। संविधान और हिन्दू कोड बिल के कारण भारत में महिलाओं ने शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में बहुत प्रगति की है, लेकिन शादियों से दहेज की समस्या बनी हुई है। दहेज के लिए हत्या और उत्पीड़न के भी हजारों मामले सामने आते रहे हैं।

राज्यसभा में पेस आंकड़ों के अनुसार देश में वर्ष 2017 से 2021 के बीच दहेज की वजह से मौत के 35493 मामले दर्ज किए गए हैं। जबकि लगभग हर दिन मैत के करीब 20 मामलों की सूचना मिली हैं।

दहेज के कारण प्रतिदिन हुई मौत के सबसे अधिक मामले उत्तर प्रदेश से निकल कर आई हैं। उत्तर प्रदेश में हर दिन दहेज से सर्वाधिक छह मौत की खबर आई।

साल दर साल के आंकड़ो पर गौर करे तो पूरे देश मे साल 2017 में दहेज से मौत के 7,466 मामले, 2018 में 7,167 मामले, 2019 में 7,141 मामले, 2020 में 6,966 मामले और 2021 में 6,753 मामले दर्ज किए गए हैं।

पेश आंकड़ो के मुताबिक, 2017 से 2021 के दौरान दहेज के कारण मौत के बिहार में 5,354 मामले, मध्य प्रदेश में 2,859 मामले, पश्चिम बंगाल में 2,389 मामले और राजस्थान में 2,244 मामलों की सूचना मिली। आंकड़ो के मुताबिक साल दो हजार 2020 देश भर में दहेज से जुड़ी 6,628 लोगों की मौत हुई। इनमें से एक तिहाई से अधिक मामले उत्तर प्रदेश से निकल कर आई थी।

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