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इस देश में आज भी लाखों लोग गरीबी रेखा के नीचे हैं। कई मामलों में सरकार यह दलील देते हुए नजर आती हैं की सरकारी खजाना खाली हैं। लेकिन आप सरकार के विज्ञापन के खर्चे सुनकर दंग रह जाएंगे। रिपोर्ट के मुताबिक भाजपा के सत्ता में आने के बाद से सिर्फ प्रिंट मीडिया में विज्ञापन पर मोदी सरकार ने प्रतिदिन इकहत्तर लाख से अधिक रुपए खर्च किए हैं।
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आपको कोविड नाइंटीन का वह दौर याद होगा । जब कोर्ट ने सरकार से मृतकों के परिवारों को सहयोग के रूप में कुछ राशि का भुगतान करने को कहा था। तब सरकार ने यह दलील दी थी की यह मुमकिन नहीं है क्योंकि इससे सरकारी खजाने पर प्रभाव पड़ेगा।
लेकिन अब आप सरकार के केवल प्रिंट मीडिया में विज्ञापन के खर्चे सुनकर दंग रह जाएंगे। आप जो हर रोज न्यूज पेपर में मोदी और अमित शाह और अन्य भाजपा नेताओं के बड़े बड़े चमकदार फोटो देखते हो उसके लिए सरकार ने रोजाना इकहत्तर लाख से भी अधिक रुपए खर्च किए हैं। और ये पैसे सरकार ने अपने जेब या अपने सैलरी से नहीं बल्कि उन सरकारी खजाने से ही खर्च किए है जो हम और आप हर छोटी – बड़ी चीजें खरीदते समय टैक्स के रूप में पेय करते हैं।
आंकड़े बताती है की, मोदी सरकार ने सत्ता में रहने के दौरान लगभग एक दशक में प्रिंट मीडिया में विज्ञापनों पर कुल तेईस सौ करोड़ ( 2,300 करोड़) रुपये खर्च किए हैं।
या हम कह सकते है की इन विज्ञापनों में हर दिन इकहत्तर लाख रुपये से अधिक खर्च किया गया हैं।
आश्चर्य की बात यह है की कई प्रमुख दैनिक अखबारों के अलावा सरकार ने कई छोटे अखबरों में भी विज्ञापनों में करोड़ों रुपए खर्च किए है जिन्हें लोग जानते भी नहीं और जो सरकारी विज्ञापन पाने की योग्यता भी नहीं रखता हैं।
न्यूजलॉन्ड्री की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी आंकड़े बताते हैं कि केवल दस संस्थानों को कुल विज्ञापन खर्च का आधे से भी अधिक मिला है जो कि लगभग तेरह सौ करोड़ रुपये होता है।
याद रखिए ये सिर्फ प्रिंट मीडिया में दिए गए विज्ञापनों के खर्च हैं। जबकि न्यूज चैनलों में विज्ञापनों के खर्चे इनसे कई गुना अधिक हैं।








