बीजेपी सिर्फ एससी – एसटी के लोगो को लुभाना जानती हैं। जबकि वास्तविकता इससे अलग हैं?

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भारतीय जनता पार्टी खुद को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की पार्टी बताती हैं। लेकिन दूसरी तरफ इन वर्गो के विकास के विरुद्ध काम करती हैं। बताते चले की सरकार ने संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीएलएडीएस) में सांसदो द्वारा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के बहुल्य आबादी वाले इलाको में खर्च किए जाने वाले पंद्रह और साढ़े सात फीसदी की अनिवार्यता को हटा दिया हैं।

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इस खबर को आगे बताने से पहले आपके लिए ये जानना जरूरी है की आखिर संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एम पी एल ए डी एस) है क्या?

यह तेईस दिसंबर, उन्नीस सौ तिरानवे में भारत सरकार द्वारा तैयार की गई एक योजना हैं। इस योजना का उद्देश्य सांसदों को मुख्य रूप से अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में कई विकास कार्यों पर ध्यान देना होता है। जिसके तहत पेयजल, प्राथमिक शिक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्वच्छता और सड़के इत्‍यादि क्षेत्रों में टिकाऊ सामुदायिक परिसंपत्तियों के निर्माण पर विशेष ज़ोर दिया जाता है।

इस विकास योजना में पहले यह नियम था की विकास कार्य के लिए जितनी भी राशि आवंटित होगी उसका पंद्रह प्रतिशत हिस्सा वैसे इलाको में खर्च होंगे जहा की अधिकतर आबादी अनुसूचित जाति की होगी। जबकि राशि का साढ़े सात फीसदी हिस्सा अनुसूचित जनजाति के बहुल्य आबादी वाले क्षेत्रों में खर्च होंगे। और यह अनिवार्य था। मतलब आप इसे टाल नहीं सकते आपको इन क्षेत्रों में राशि का इतना प्रतिशत हिस्सा इनके इलाकों की बेहतर सुविधाओं में खर्च करना ही हैं।

बताते चले की एक सांसद अपने निर्वाचन क्षेत्र में पांच वर्षों में खर्च करने के लिए प्रति वर्ष पांच करोड़ के हिसाब से पच्चीस करोड़ रुपये के कार्यों की सिफारिश कर सकता है, जिसका कम से कम तीन करोड़ पचहत्तर लाख (3.75 करोड़) रुपये एससी क्षेत्रों में और एक करोड़ सतासी लाख ( 1.87 करोड़ ) रुपये एसटी बहुल क्षेत्रों में खर्च किए जाने थे।

लेकिन अब सरकार ने एक अप्रैल, दो हजार तेईस को इस संबंध में नए दिशा निर्देश जारी किए हैं। जिसमे सांसदो द्वारा अनुसूचित जाति – अनुसूचित जनजाति के लिए पंद्रह एवं साढ़े सात प्रतिशत खर्च करना अब अनिवार्य नहीं होगा।

लेकिन मजे की बात तो यह है की इसका न ही किसी राजनीतिक पार्टी ने सामने आकर विरोध किया और न ही किसी अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के संगठनों ने।

सरकार के इस नए दिशा निर्देश के अनुसार अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए पंद्रह एवं साढ़े सात प्रतिशत इस संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के तहत
खर्च करना अनिवार्य नहीं है ।

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