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मणिपुर की घटनाओं को लेकर देश के साथ साथ विदेशों से भी लोग स्थिति पर अपनी चिंता व्यक्त कर रहे हैं। हाल ही में ब्रिटेन की राजधानी लंदन में मणिपुर की घटना को लेकर लोगो ने मौन प्रदर्शन किया । प्रदर्शनकारियों ने मणिपुर की घटना में शामिल सभी आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की है।
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मालूम हो की मणिपुर पिछले तीन महीने से जातिय हिंसा की आग में जल रही हैं। बीते तीन मई को हुई हिंसा में और उसके बाद प्रदेश में ऐसी कई अमानवीय घटनाए घटी, जो मणिपुर की शासन प्रशासन की नाकामी को बखूबी दर्शाती हैं।
इन मामलो को लेकर देश भर से न्याय की मांग की जा रही हैं। विशेष कर पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया (डेमोक्रेटिक) द्वारा देश भर से महामहिम राष्ट्रपति महोदया के नाम ज्ञापन सौंपा गया हैं। कई जगहों में पार्टी द्वारा पैदल मार्च निकाल कर घटना की निंदा भी की गई हैं।
लेकिन अब विदेशों में भी मणिपुर की घटना को लेकर प्रदर्शन किए जा रहे हैं। खबर के मुताबिक बीते दिनों, ब्रिटेन की राजधानी लंदन में मणिपूर की घटना को लेकर वुमेन फ्रॉम नॉर्थ ईस्ट सपोर्ट नेटवर्क के सदस्य और अन्य कई लोगो ने मौन प्रदर्शन किया। जिसमे उन्होंने भारतीय उच्चायोग से पार्लियामेंट स्क्वायर तक मार्च निकाला।
प्रदर्शनकारियों ने मणिपुर में बीते तीन महीने से जारी जातीय हिंसा के दौरान महिलाओं के ख़िलाफ़ जघन्य यौन अपराधों में शामिल लोगों के लिए कड़ी सज़ा की मांग की हैं।
बताते चले की, मणिपुर में अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मेईतेई समुदाय की मांग के विरोध में बीते तीन मई को पर्वतीय जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के आयोजन के बाद झड़पें हुई थीं और यह हिंसा में बदल गई जो अब भी जारी हैं।
बीते तीन मई को हुई हिंसा के अगले दिन यानी चार मई को कुकी समुदाय की दो महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाया गया। जिनमे से एक के साथ सामूहिक दुष्कर्म भी किया गया। इसका विरोध करने पर उनके भाई और पिता की हत्या कर दी गई।
लेकिन इस घटना की जानकारी लोगो को तब हुई जब इस घटना की वीडियो बीते उन्नीस जुलाई को सोशल मीडिया पर वायरल हुई। मतलब लगभग दो महीने तक इस घटना से लोग अंजन रहे। इस बारे में न ही सरकारों ने कुछ कहा और न ही मीडिया वालो ने इस घटना के बारे में दिखाया।
खबरों की माने तो मई से कुकी और मेईतेई समुदायों के बीच भड़की जातीय हिंसा में अब तक लगभग दो सौ लोग मारे जा चुके हैं और हजारों लोग घायल हुए हैं। इसके अलावा अब तक लगभग पचास हजार लोग विस्थापित हुए हैं।








