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पश्चिम बंगाल में बीते ढाई साल से शिक्षक भर्ती में हुई गड़बड़ी को लेकर हजारों अभ्यार्थी धरने पर हैं। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया है कि, मेरिट लिस्ट वालों को नौकरी नहीं मिली। जबकि जिन्होंने परीक्षा नहीं दी, उन्हें नौकरी दे दी गई।
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साल दो हजार चौदह के शिक्षक भर्ती घोटाले को लेकर बीते साढ़े नौ सौ (950) से अधिक दिनों से हजारों की संख्या में अभ्यार्थी धरने पर हैं।
अभ्यार्थी पिछले ढाई साल से शिक्षक भर्ती में हुए घोटाले में न्याय की उम्मीद करते हुए पश्चिम बंगाल के कोलकाता में शांतिपूर्ण धरने पर बैठे हैं।
बताते चले की, यह शिक्षक भर्ती घोटाला साल दो हजार चौदह का है, जब पश्चिम बंगाल प्राथमिक शिक्षा बोर्ड ने प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) आयोजित की थी।
लेकिन साल दो हजार इक्कीस में यह सामने आया कि कम टीईटी स्कोर वाले व्यक्तियों को शिक्षक पद दे दिए गए थे। जबकि इससे अधिक स्कोर वाले अभ्यर्थियों को नौकरी नहीं दी गई।
इस घोटाले के ख़िलाफ़ हजारों की संख्या में लोगों का विरोध प्रदर्शन बीते ढाई साल से अधिक समय से चल रहा है। लेकिन अभी तक इन्हें न्याय नहीं मिल पाया हैं।
धरने पर बैठे लोगों का आरोप है कि नौंवी, दसवीं, ग्यारहवीं और बारहवीं (सेकंडरी और सीनियर सेकंडरी) के अध्यापकों की नियुक्ति में डब्ल्यूबीएसएसएसी (WBSSC) यानी पश्चिम बंगाल कर्मचारी चयन आयोग में जमकर भ्रष्टाचार हुआ।
इनका आरोप है कि कम नंबर वालों को नौकरी मिल गई, जबकि वे ज्यादा नंबर लाकर भी धरना करने पर मजबूर हैं।
उनका आरोप है कि मेरिट लिस्ट वालों को नौकरी नहीं मिली। जबकि जिन्होंने कम नंबर लाया या जिन्होंने परीक्षा ही नहीं दी, उन्हें नौकरी दे दी गई।
धरने में शामिल वर्ष दो हजार सौलह के अभ्यर्थियों का कहना है की, अब भी शिक्षको के चौदह हजार तीन सौ उंचालिस पद खाली हैं फिर भी नियुक्ति नहीं हो रही हैं।
उनका कहना है की नौकरी का इंतजार करते करते दस साल से अधिक हो गया, लेकिन मुख्यमंत्री तक हमारी गुहार नहीं पहुंची।
अभ्यर्थियों का कहना है की, अगर शिक्षा मंत्री हमे नौकरी नहीं दे सकते है तो मौत ही दे दें। हम सड़कों पर प्रदर्शन करते करते थक गए हैं।






