धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर यूएस गवर्नमेंट की रिपोर्ट।
यूएस की रिपोर्ट में भारत “कंट्रीज आफ पार्टिकुलर कंसर्न” की लिस्ट में।
यूएस की इंटरनेशनल रिलिजियस फ्रीडम की एनुअल रिपोर्ट 2022 प्रकाशित।
साथियों हमारे देश का इतिहास दो भागों में बटा है। एक इतिहास क्रांतिवादियों का है और दूसरा प्रतिक्रांतिवादियों का। क्रांतिवादियों ने इस देश में न्याय, समता, स्वतंत्रता व बंधुता का पक्ष लिया तो प्रतिक्रांतिवादियों ने अन्याय, विषमता, गुलामी व द्वेष को अलग-अलग तरीकों से अपनाया। आप को लगेगा की यह इतिहास की बातें है आज सब कुछ अच्छा है। 2019 में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हाऊडी मोदी कार्यक्रम ह्यूस्टन अमेरिका में हुआ था। इसमें उन्होंने कहा था कि भारत में सब अच्छा है। लेकिन यूनाइटेड स्टेटस ऑफ अमेरिका सरकार की “यूनाइटेड स्टेट कमिशन आन इंटरनेशनल रिलिजियस फ्रीडम की एनुअल रिपोर्ट” 2019 के पहले से यह कह रही है की भारत में सभी कुछ अच्छा नहीं है।
साथियों भारत में हिन्दू विरुद्ध मुस्लिम यह विवाद नया नहीं है। खास करके अंग्रेजों के काल में यह विवाद एक दूसरे ही रूप में सामने आया। हिन्दू विरुद्ध मुस्लिम विवाद यह धार्मिक धारणाओं से कई गुना बढ़कर राजनैतिक है। अभी हाल ही में दिल्ली के जहांगीरपुरी और मध्यप्रदेश के खरगोन में तनाव की स्थिति निर्माण हुई थी। यह दो धर्मों के लोगों के बीच निर्माण किए तनाव का मामला था। यहां की न्यूज कवरेज से कोई भी व्यक्ति तनाव में आना स्वाभाविक है।
इस तनाव के बाद एक वीडियो सोशल मीडिया पर वाइरल हुआ है। इस वीडियो में विधर्मियों से सामान न खरीदने व न बेचने की शपथ दी जा रही है। एकदुसरे के खिलाफ धर्म के आधार पर विरोध की, गैरबराबरी की, असहयोग की, बहिष्कार की, नफरत की भावना कैसे प्रचारित की जाती है इसका यह उदाहरण है। इसप्रकार के वीडियो में जो बताया जा रहा है उसका न तो हम समर्थन करते हैं और न ही किसी को करना चाहिए।
साथियों, विभिन्न कारणों को सामने लाकर हिन्दू विरुद्ध मुस्लिम या अन्य धर्मिय में तनाव निर्माण निर्माण होने के कई उदाहरण हमारे सामने हैं। तनाव केवल हिन्दू या मुस्लिम के ही है ऐसा नहीं है तनाव ओबीसी की जनगणना, ओबीसी का आरक्षण और निजीकरण को लेकर भी है, गरीबी, भूखमरी, अशिक्षा आदि को लेकर भी तनाव है। लेकिन यहां हम धर्म की आजादी और धार्मिक विद्वेष के कारण निर्माण तनाव को लेकर बात करेंगे।
जैसे हम सभी भारत के लोग, भारत की तमाम अच्छी बुरी स्थितियों के बारे में भारत में चर्चा करते हैं, उसी प्रकार से अन्य देश भी भारत के बारे में चर्चा करते हैं। खास कर के पश्चिमी देश जिसमें यूरोप, यूके, कनाडा, अमेरिका जैसे देश हैं जिनमें भारतीय मूल के लोगों की काफी तादाद है, उन देशों से भारत के बारे में समय-समय पर कोई रिपोर्ट या सुझाव आते रहते हैं।
हाल ही में “यूनाइटेड स्टेटस् कमिशन आन इंटरनेशनल रिलिजियस फ्रीडम की एनुअल रिपोर्ट 2022” प्रकाशित हुई है। इसके नाम के अनुसार ही स्पष्ट है कि अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर यूएस गवर्नमेंट की एक कमीशन है जो हर साल सभी देशों की धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर अध्ययन करती है और अपनी रिकमन्डेशन के साथ रिपोर्ट देती है। आपको बता दें की इस कमीशन के नौ कमिशनरों में से एक कमिशनर अनुरीमा भार्गव भी है जो इंडियन-अमेरिकन है। जोकि 2019 से इस कमीशन में कमिशनर है।
इस कमीशन ने अपनी रिपोर्ट 2022 में भारत को “कंट्रीज आफ पार्टिकुलर कंसर्न” की लिस्ट में रखा। जिसमें भारत अफगानिस्तान, बर्मा, चाइना, ईरान, नॉर्थ कोरिआ, पाकिस्तान, रशिया, सऊदी अरेबिया आदि 15 देशों के साथ रखा गया है। इस कमीशन की रिपोर्ट के अनुसार “एक सुनियोजित, वर्तमान में चल रहे, धार्मिक स्वतंत्रता का भयंकर उल्लंघन को सहन करने और होने देने के कारण भारत को “कंट्रीज आफ पार्टिकुलर कंसर्न” की लिस्ट में रखा जाने की बात कही गई है।
यह कमीशन अमेरिका सरकार को यह सूचित करता है कि वह यूएस-भारत द्विपक्षीय संबंधों में धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दों को उठायें और सुनवाई, ब्रीफिंग, पत्रों और कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडलों के माध्यम से इसकी चिंताओं को उजागर करें।
यह कमीशन एह भी सुझाव दे रहा है कि भारत में सभी धार्मिक समुदायों के मानवाधिकारों को आगे बढ़ाना और द्विपक्षीय और बहुपक्षीय मंचों और समझौतों, जैसे कि चतुर्भुज मंत्रिस्तरीय के माध्यम से धार्मिक स्वतंत्रता, गरिमा और अंतर-धार्मिक संवाद को बढ़ावा देना चाहिए।
आपको बता दें कि अमेरिकी सरकार के इंटेरनेशनल रिलीजियस फ़्रीडम एक्ट के तहत यह कमीशन काम करता है।
आपको यह भी बता दें कि यह कोई पहली बार नहीं है कि इस कमीशन नें भारत को “कंट्रीज आफ पार्टिकुलर कंसर्न” की लिस्ट में रखा है। इसके पहले भी वर्ष 2020 और 2021 में भी भारत को इस सूची में रखा गया है। अर्थात लगातार पिछले तीन वर्षों से भारत को “कंट्रीज आफ पार्टिकुलर कंसर्न” की लिस्ट में रखा गया है।
इन रिपोर्टस को देखें तो पता चलता है कि वर्ष 2019 में इस कमीशन ने अमेरिकी सरकार को भारत के बारे में यह कहा था कि “सार्वजनिक भाषणों या लेखों के माध्यम से धार्मिक अल्पसंख्यक समूहों के खिलाफ हिंसा भड़काने वाले धार्मिक नेताओं, सरकारी अधिकारियों और मीडिया हस्तियों पर मुकदमा चलाने के लिए राज्य सरकारों पर दबाव डाला जाएं।”
वर्ष 2020 की रिपोर्ट बीजेपी नेतृतवाली केंद्र की सरकार पर बहुत ही गंभीर टिपण्णी करती है। इस रिपोर्ट के अनुसार 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने लींचिंग की घटनाओं को निपटने के लिए कड़े कानून की आवश्यकता व्यक्त की थी। 2019 में भी सुप्रीम कोर्ट ने पुनः यह कहा था। लेकिन होम मिनिस्टर शाह ने बताया था कि वर्तमान कानून काफी है और लींचीग बढ़ी नहीं है। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि नैशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो को होम मिनिस्ट्री ने यह सूचित किया था की लींचीन को 2019 की क्राइम डाटा रिपोर्ट से निकाल दिया जाएँ।
भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी 2019 में ह्यूस्टन अमेरिका में हाऊडी मोदी कार्यक्रम में भारत में सब कुछ च्छा है यह बात भारत की विभिन्न भाषाओं में बता रहे थे।
साथियों इन सभी रिपोर्ट की बात करेंगे तो यह वीडियो काफी लंबा हो जाएगा। आप यह सभी रिपोर्ट https://www.uscirf.gov/ इस वेबसाइट पर पढ़ सकते हैं।
आप सभी जानते हैं भारत में हिन्दुत्व के नाम पर अन्य धर्मियों और खास कर अनुसूचित जाति के लोगों को धर्मांतरण व गोरक्षा के नाम पर हमलों का शिकार होना पड़ा है। कई जगह मोब लींचीग की भयंकर घटनाएं घटित हुई। जिनका देशभर में जमकर विरोध हुआ। समय-समय पर धार्मिक ध्रुवीकरण के लिए सामुदायिक तनाव की स्थितियाँ निर्माण की जाती है, जिसमें राजनैतिक और धार्मिक नेताओं के साथ-साथ मीडिया के भी लोग होते हैं। यह बाते बताने के लिए क्या हमें अमेरिका के रिपोर्ट की आवश्यकता है? आप खुद ही इस बात को समझ सकते हैं।
जाते जाते आपसे यह बात शेयर करें कि भारत में धर्मांतरण यह अनेक वर्षों से गंभीर मसला रहा है। भारत की वर्णवर्चस्व वादी जाति व्यवस्था इसका प्रमुख कारण है। वर्णवर्चस्व वादी जाति व्यवस्था से पीड़ित लोगों ने अतीत में या तो अन्य धर्मों का आचरण शुरू किया या फिर अपने अलग धर्म स्थापन किए। लेकिन जैसे जैसे ब्राह्मण पौरोहित्य को नकारकर अन्य धर्मों में लोग जाने लगे उनके साथ तनाव शुरू हुआ। आज यह लगता है कि यह तनाव हिन्दू विरुद्ध मुस्लिम या हिन्दू विरुद्ध क्रिश्चयन है, यह तनाव उन सभी धर्मों के साथ रहेगा जहां जहां वर्णवर्चस्व वादी जाति व्यवस्था से पीड़ित लोग धर्मांतरित होते हैं, या वह धर्म अन्य धर्मों के लोगों को आपने धर्म में प्रवेश देते हैं, या यह कहते हैं कि आपको प्रवेश खुला है।








