===========
बच्चो की तस्करी मानवता को शर्मशार कर देने वाली घटना हैं, जो इस समय देश के कई हिस्सों में काफी तेजी के साथ चल रही हैं । हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार बच्चो की तस्करी में राजस्थान की राजधानी जयपुर शीर्ष जिलों में सबसे ऊपर है। जबकि प्रति वर्ष के औसतन आंकड़े देखे जाए तो इसमें उत्तर प्रदेश, बिहार और आंध्र प्रदेश शीर्ष के तीन राज्य हैं।
===========
हाल ही में गेम्स ट्वेंटी फोर इंटू सेवन (24×7) और कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रन फाउंडेशन यानी केएससीएफ द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार देश में कोविड के बाद से बच्चो की तस्करी के मामले में वृद्धि देखी गई हैं।
बाल तस्करी के मामले में शीर्ष जिलों की बात करे तो टॉप पर राजस्थान की राजधानी जयपुर हैं। रिपोर्ट के मुताबिक जयपुर तस्करी के शिकार बच्चों के लिए प्रमुख स्थलों में से एक बनकर उभरा है और केएससीएफ के हस्तक्षेप से इस जिले से सबसे अधिक एक हजार एक सौ पंद्रह (1,115) बच्चों को बचाया गया है, जो कुल बचाए गए बच्चों का लगभग नौ प्रतिशत है।
इसके बाद राजधानी दिल्ली के दो जिले उत्तरी दिल्ली और पश्चिमी दिल्ली हैं। जहा बच्चो की तस्करी के शिकार सबसे अधिक बच्चो को केएससीएफ द्वारा बचाया गया हैं। यही नहीं शीर्ष दस जिलों की सूची में पांच जिले सिर्फ राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के शामिल हैं।
वही राज्यों के आंकड़े देखे तो इसमें शीर्ष पर उत्तर प्रदेश हैं। उत्तर प्रदेश में प्रति वर्ष औसतन सबसे अधिक बच्चों की तस्करी देखी गई है। कोविड- नाइनटीन के पहले चरण तक यानी दो हजार सोलह से दो हजार उन्नीस तक दो सौ सड़सठ (267) बाल तस्करी के मामले सामने आए थे। जबकि दो हजार इक्कीस में बाल तस्करी के दो हजार पचपन (2,055) मामले सामने आए है।
उत्तर प्रदेश के बाद बिहार और आंध्र प्रदेश का नंबर आता हैं। जो इस मामले में सबसे ऊपर हैं। उत्तर प्रदेश के बाद इन राज्यों से प्रति वर्ष औसतन सबसे अधिक बच्चों की तस्करी हुई हैं।
बताते चले की जिन बच्चों की तस्करी हो रही हैं, उनमें से अधिकतर बच्चे तेरह से अठारह वर्ष के हैं। आंकड़ों के मुताबिक बाल तस्करी के शिकार हुए अस्सी फीसदी बच्चे की उम्र तेरह से अठारह वर्ष के बीच की हैं। वही तेरह फीसदी बच्चे नौ से बारह वर्ष के बीच की हैं। जबकि दो फीसदी से अधिक की उम्र नौ साल से कम की हैं।








