=========
जहा एक तरफ बीजेपी ने गैर संवैधानिक तरीके से द्विजों को ईडब्ल्यूएस के तहत दस प्रतिशत आरक्षण दे दिया हैं। वही अब कांग्रेस इस आरक्षण को दस प्रतिशत से बढ़ाकर पंद्रह प्रतिशत करने की मांग कर रहा हैं। इससे यह साबित होता है की भाजपा और कांग्रेस दो अलग अलग राजनीतिक पार्टियां भले ही हैं, लेकिन इनकी विचारधारा अलग नहीं हैं।
=========
बामसेफ जैसी राष्ट्रीय स्तर की सामाजिक संगठन हमेशा देश के मूलनिवासी बहुजन समाज को यह समझाते आ रही है की बीजेपी ही कांग्रेस और कांग्रेस ही बीजेपी हैं।
यह दोनो अलग अलग राजनीतिक पार्टियां हो सकती हैं। लेकिन यह दोनो ही समान विचारधारा पर काम करती हैं। इन दोनो ने हमेशा अपने अपने कार्यकाल में देश के मूलनिवासियों के अधिकारों से खिलवाड़ किया हैं।
लेकिन अब ये दोनो राजनीतिक पार्टियां मिलकर देश के एससी, एसटी ओबीसी और कन्वर्टेड माइनोरिटी के हिस्से को द्विजों को देने में तुली हैं।
जहा एक तरफ बीजेपी आरक्षण के पचास फीसदी सीमा को तोड़ कर गैर संवैधानिक रूप से द्विजों को दस प्रतिशत आरक्षण देती हैं। वही दूसरी तरफ कांग्रेस इस आरक्षण को दस प्रतिशत से बढ़ाकर पंद्रह प्रतिशत करने की मांग कर रही हैं।
बताते चले की बीते दिनों जालोर में आयोजित विप्र फाउंडेशन महाकुंभ में कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव वल्लभ भी पहुंचे थे।
जिसने अपने भाषण में ईडब्ल्यूएस आरक्षण को दस प्रतिशत से बढ़ाकर पंद्रह प्रतिशत करने की मांग को दोहराया।
दुनिया के सामने भाजपा और कांग्रेस एक दूसरे का विरोध भले ही करती हो। लेकिन इनका उद्देश्य बिल्कुल तय है। देश की राजनीति में एक दूसरे का विरोध करने के पीछे का कारण सिर्फ सिर्फ देश के मूलनिवासी बहुजन समाज को गुमराह करना और एक दूसरे के विकल्प के रूप में रहकर देश को सत्ता अपने हाथ में रखना।







