बालासोर में हुए सबसे बड़े ट्रेन हादसे का जिम्मेदार कौन ?

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इस समय लोग सदमे में हैं, उस ट्रेन हादसे को लेकर जो ओडिशा के बालासोर में हुआ हैं। जहा एक नही दो नहीं बल्कि तीन-तीन ट्रेनें एक दूसरे से टकराकर छतिग्रस्त हुई हैं। इन तीन ट्रेनों में दो पैसेंजर ट्रेन थी जबकि एक मालगाड़ी । लेकिन सबसे बड़ा सवाल की इसका जिम्मेदार कौन? क्या कहीं कर्मचारियों पर पड़ रहे काम का बोझ इसका जिम्मेदार हैं? या फिर पटरियों के रख रखाव में कमी हुई हैं। क्योंकि इस समय रेलवे में लाखो पद खाली हैं, जिसके वजह से कर्मचारियों पर अधिक काम का बोझ पड़ता हैं।

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बीते दिनों ओडिसा के बालासोर में हुआ ट्रेन हादसा इतिहास के सबसे बड़े ट्रेन हादसों में एक है। जिसमे कई लोगो ने अपने परिवार को खोया हैं।

हालांकि सरकार द्वारा बताए गए आंकड़ों को देखें तो इस ट्रेन हादसे में मृतकों की संख्या लगभग तीन सौ के आसपास बताई जा रही हैं। लेकिन घटना की भीषण तस्वीरों को देखते हुए लोगो को इन आंकड़ों पर भरोसा नहीं हो रहा हैं। लोगो का मानना है की सरकार द्वारा बताए जा रहे तीन सौ के आसपास के आंकड़े गलत हैं क्योंकि इस हादसे में जान गवाने वालों की संख्या कई ज्यादा हैं। और अभी भी कई विभिन्न अस्पतालों में लोग मौत के साथ जंग लड़ रहे हैं।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल की इस हादसे के पीछे मुख्य कारण क्या है ? क्या कर्मचारियों पर पड़ रहे काम का बोझ इस हादसे का कारण बना ? या पटरियों की रख रखाव में कमी रह गई ? ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि रेलवे के विभिन्न विभागों में अभी भी लाखो पद खाली पड़े है जो कर्मचारियों पर काम का अधिक दबाव बनाता है और काम सुचारू ढंग से नहीं चल पाता हैं।

रेल मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार एक दिसंबर, दो हजार बाईस तक, भारतीय रेलवे के अठारह क्षेत्रों में देश भर में तीन लाख बारह हजार (3.12 लाख) पद खाली हैं। यानी की भारतीय रेलवे इस समय तीन लाख से अधिक कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा हैं।

इन खाली पदो मे सबसे अधिक अड़तीस हजार सात सौ चौवन (38,754) उत्तरी क्षेत्र में, तीस हजार चार सौ छिहत्तर (30,476) पश्चिमी क्षेत्र में, तीस हजार एक सौ इकतालीस (30,141) पूर्वी क्षेत्र में और अठाईस हजार छह सौ पचास (28,650) मध्य क्षेत्र में पद खाली हैं।

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