भारत बुद्ध की धरती हैं। बुद्ध से ही है भारत की पहचान।

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आज भारत के अंदर लोग खुद को किसी भी धर्म से भले ही जोड़ते हो, लेकिन विश्व स्तर पर वे हमेशा खुद को बौद्ध धम्म से जोड़ते हुए नज़र आते हैं और ये कहना भी गलत नही होगा की गौतम बुद्ध ने ही विश्व स्तर पर भारत की पहचान कराई हैं और आज कई बड़े देश बौद्ध धम्म का बड़े पैमाने पर प्रचार प्रसार कर रहे हैं। हाल ही में अमेरिका में भारतीय इतिहास पर एक एग्जीबिशन शुरू हुआ हैं। जिसमे बौद्ध काल के शुरुआती वर्षों से लेकर छह सौ साल तक के सफर को दिखाया जायेगा।

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बौद्ध काल ने भारत को एक गौरवशाली इतिहास दिया हैं। बुद्ध के उपदेश इतने प्रभावशाली थे की उनके जीवन काल में ही उनके उपदेश पड़ोसी देशों में भी फेल चुका था। बाद में सम्राट अशोक जैसे महान शासक ने बौद्ध धम्म का बड़े पैमाने पर प्रचार प्रसार करवाया।

मौर्य वंश के पतन के बाद ब्राह्मणों ने बुद्ध भिक्षुओं पर हमला करवाया और बुद्ध के इतिहास को छुपाने के लिए लाख प्रयास किए और वे अपने मकसद में काफी हद तक सफल भी हुए। लेकिन तब तक बुद्ध के उपदेश दूर दराज के देशों तक फैल चुका था।

भारत में सम्राट अशोक के बाद बौद्ध धम्म के सबसे बड़े प्रचारक बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर रहे। चौदह अक्टूबर, उन्नीस सौ छप्पन में बाबा साहेब ने अपने लाखो अनुआईयो के साथ बौद्ध धम्म में वापसी की और ये सिलसिला आज भी चल रहा हैं।

जिसका कई लोग विरोध भी करते नजर आते हैं और खास बात तो ये है जो लोग बौद्ध धम्म में वापसी का विरोध करते हैं वही लोग विश्व स्तर पर बुद्ध का गुणगान करते हुए नज़र आते हैं।

भारत में भले ही मनुवादियों ने बौद्ध धम्म के गौरवशाली इतिहास को छुपाने की कोशिश की हो लेकिन पूरी दुनिया आज भी भारत को बुद्ध का देश ही मानती हैं साथ ही बौद्ध धम्म से जुड़े इतिहास का प्रचार प्रसार करती हैं।

हाल ही में अमेरिका के मशहूर मेट म्यूजियम में भारतीय इतिहास पर ‘ट्री एंड सर्पेंट’ नाम से एक एग्जीबिशन शुरू हुआ है। इस एग्जीबिशन में बौद्ध काल के शुरुआती वर्षों से लेकर छह सौ साल तक के सफर को शोकेज किया जाएगा।

इस ट्री एंड सर्पेंट एग्जीबिशन में ईसा से दो सौ वर्ष पूर्व से ईसा के चार वर्ष बाद तक का भारतीय बौद्ध इतिहास शामिल होगा। ये एग्जीबिशन इक्कीस जुलाई, दो हजार तेईस से शुरू हो चुकी हैं जो तेरह नवंबर, दो हजार तेईस तक चलेगी।

बताते चले की बीते उन्नीस जुलाई, दो हजार तेईस (बुधवार) को ‘ट्री एंड सर्पेंट’ एग्जीबिशन का एक प्रिव्यू प्रोग्राम रखा गया था। इसमें रिलायंस फाउंडेशन की फाउंडर और चेयरपर्सन नीता अंबानी समेत अमेरिकी भारतीय राजदूत तरनजीत सिंह संधू, भारत में अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी, एग्जीबिशन के क्यूरेटर जॉन गॉय और कला जगत के अन्य नामी सेलेब्रिटीज शामिल हुईं।

इस मौके पर नीता अंबानी ने कहा की, ‘मैं बुद्ध की धरती भारत से आती हूं। प्रारंभिक बौद्ध काल के छह सौ वर्षों की एक सौ पच्चीस से ज्यादा कलाकृतियां इस एग्जीबिशन में देखी जा सकेंगी। हमारा प्रयास है कि भारतीय संस्कृति की खूबियों को हम दुनिया तक पहुंचाएं।’

यहां भारत की असल संस्कृति जो बौद्ध धम्म से जुड़ी हैं उसे दुनिया तक पहुंचाने की बात की जा रही हैं। लेकिन चिंता की बात यह है की भारत का एक बड़ा हिस्सा आज भी बुद्ध और बौद्ध धम्म से अनजान हैं।

आज मूलनिवासी सभ्यता संघ एक मात्र ऐसी संस्था हैं जो इस भारत की असल सभ्यता और संस्कृति पर राष्ट्रस्तर पर काम कर रही हैं। और लोगो को अपनी संस्कृति से जोड़ने का काम कर रही हैं।

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