देश में कोरोना संकट के बीच ऑक्सीजन की भारी किल्लत चल रही है। ऐसे में खबर आई कि पिछले साल अप्रैल से इस साल जनवरी के बीच ऑक्सीजन का निर्यात दोगुना बढ़ा है| वाणिज्य मंत्रालय से मिले डेटा में यह बात सामने आई है। की भारत ने वित्त वर्ष 2020-21 के पहले दस महीनों में इससे पिछले पूरे वित्त वर्ष की तुलना में विश्व भर के कई देशों को दोगुनी मात्रा में ऑक्सीजन बेचा। ऐसा तब हुआ जब भारत खुद इस पूरी अवधि में कोरोना वायरस महामारी से बुरी तरह प्रभावित था।
प्राप्त डेटा के अनुसार, अप्रैल 2020 से जनवरी 2021 के बीच भारत ने दुनियाभर में 9,301 मीट्रिक टन ऑक्सीजन निर्यात की, जिससे 8.9 करोड़ रुपये प्राप्त हुए।इसके विपरीत, इससे पहले वित्त वर्ष 2019-20 में देश ने केवल 4,514 मीट्रिक टन ऑक्सीजन निर्यात की थी, जिससे 5.5 करोड़ रुपये मिले थे। इस बीच ऑक्सीजन निर्यात के बारे में यही जानकारी और रिपोर्ट मनीकंट्रोल इस वेबसाइट पर प्रकाशित की गयी थी। बीते बुधवार 21 अप्रैल को ऑक्सीजन की तत्काल आपूर्ति की एक याचिका को सुनते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को बुरी तरह फटकार लगाई थी। उसी दिन यह रिपोर्ट मनीकंट्रोल वेबसाइट से हटा दी गई और उसकी जगह खेद प्रकट करते हुए लिखा गया कि यह रिपोर्ट भारत के ऑक्सीजन निर्यात के बारे में ‘भ्रामक तस्वीर’ बना रही थी और इसे प्रकाशित नहीं किया जाना चाहिए था।
कोरोना संक्रमितों मरीजों के गंभीर रूप से बीमार होने पर मेडिकल ऑक्सीजन की उनके इलाज में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। देश में कोरोना की मौजूदा लहर के दौरान इसकी मांग बहुत तेजी से बढ़ी है और राजधानी दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों से अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी की खबरें आ रही हैं। दिल्ली की ही तरह महाराष्ट्र में भी ऑक्सीजन की कमी है, जिसने संक्रमितों की बढ़ती संख्या के चलते केंद्र से अधिक मेडिकल ऑक्सीजन मुहैया कराने का जिक्र किया है. इसके अलावा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात और कई राज्यों में भी ऑक्सीजन की कमी को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। गौरतलब है कि डिलीट की गई रिपोर्ट में भारत की उत्पादन क्षमता का जिक्र पहले ही किया गया था। इसमें लिखा था, ‘पिछले हफ्ते… सरकार ने स्पष्टीकरण दिया कि भारत की ऑक्सीजन उत्पादन क्षमता 7,127 मीट्रिक टन/प्रतिदिन की है। जहां तक बात ऑक्सीजन निर्यात की है, वेबसाइट की रिपोर्ट में इस बारे में भी बताया गया था। इसमें लिखा था कि ‘निर्यात लिक्विड ऑक्सीजन की शक्ल में हुआ जिसे बाद में औद्योगिक और मेडिकल कामों में इस्तेमाल किया गया। डिलीट किए जाने से पहले इस रिपोर्ट को सोशल मीडिया पर बहुत से लोगों ने साझा किया था। बता दे मनीकंट्रोल नेटवर्क 18 समूह द्वारा संचालित वेबसाइट है,जिसका स्वामित्व रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के पास है। इसका मतलबयह हो सकता है, की मौजूदा सरकार और पूंजीपतियों की कूटनीतियों के बिच आम जनता पर कहर बरपा जा रहा है ।







