कोरोना महामारी के समय यह देखा गया की पुरे भारत में स्वास्थ्य सुविधा की हालत गंभीर है। लोगों में बढ़ते असंतोष को देखते हुए कोर्ट द्वारा भी सरकार को कटघरे में खड़े करने वाले कमेंट्स आये।
कोर्ट द्वारा सरकार में बैठे लोगों को यह पूछा गया की (देश में) अस्पताल, बेड, ऑक्सीज़न सिलेंडर, दवाइयों को लेकर योजना है? जवाब क्या है आपको पता है।
साथियों आप स्वयं किसी भी मेडिकल स्टोर में पता कर सकते हैं कि क्या किसी दवाई की कीमत कम की गयी है? बल्कि कोरोना के नाम पर दवाइयों की कालाबाजारी और भ्रष्टाचार ही पाया जा रहा है। इसको रोका जाना आवश्यक है।
इसी में अब “वैक्सीन इंडस्ट्री” को लेकर देश में राजनीति चल रही है। विश्व में सबसे बड़े वैक्सीन उत्पादक सीरम इंस्टीट्यूट के अदर पूनावाला के उस बयान को लेकर बड़ा बवाल मचाया गया कि उसके ऊपर राज्यों और प्रभावशाली लोगों का दबाव है। इसलिए देश छोड़कर वह इंग्लैण्ड चले गए।
अदर पूनावाला द्वारा इंग्लैंड जाने वाली बात की मीडिया में जिस प्रकार से चर्चा की गयी वह कितनी हास्यास्पद है इसे समझिये। क्योंकि अदर पूनावाला वहां इंग्लैंड में बिजनेस कॉन्ट्रैक्ट साइन कर रहे हैं। यूके सरकार के मुताबिक सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने यूके में वैक्सीन बिजनेस में 240000000 पाउंड का निवेश की पहल हुयी है।
इसी के बीच गुरुवार 4 मई 2021 को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूके के प्राइम मिनिस्टर बोरिस जॉनसन की वर्चुअल मीट आयोजित है। इन बातों को समझिए।
एक तरफ यह हो रहा है और दूसरी तरफ सीरम इंस्टीट्यूट की ओर से और एक लेटर जारी करते हुए अदार पूनावाला ने कहा कि उन्हें केंद्र सरकार की ओर से “26 करोड़ डोसेस का आर्डर” दिया गया है। जिसमें से 15 करोड़ डोसेस की आपूर्ति हुयी है. अब बचे हुए 11 करोड़ डोसेस कुछ महीनों में पुनः पढ़िए कुछ महीनों में दिए जायेंगे।
वैक्सीन उद्योगपति पूनावाला ने कहा है कि कोविड वैक्सीन की उत्पादन क्षमता रातों रात बढ़ाई नहीं जा सकती। उत्पादन में समय लगता है।
अदार पूनावाला ने यह भी कहा है की उसे केंद्र सरकार वैक्सीन के आर्डर के रुपए अग्रिम यानी एडवांस में ही मिले है।
दूसरी ओर अभी-अभी यूके गवर्मेंट ने भारत को ऑक्सीज़न सीलिंडर्स और 1000 वेंटिलेटर्स भेजे हैं।
स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भारत कब आत्मनिर्भर होगा? यह सवाल चुनावों में व्यस्त मस्त राजनीतिक दलों से क्या पूछा जा सकता है?







