देश के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक सुविधाओं का अभाव।

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ग्रामीण स्वास्थ्य सांख्यिकी की रिपोर्ट का दावा।

ऑपरेशन थिएटर, एक्स-रे, लेबर रूम आदि की कमी।

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ग्रामीण स्वास्थ्य सांख्यिकी 2021-22 की रिपोर्ट बताती है कि प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे के रूप में काम करने वाली समुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 80 फीसदी विशेषग्यो की कमी हैं। जिनमें सर्जन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, फिजिशियन, बाल रोग विशेषज्ञ आदि शामिल हैं।

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भारत हमेसा से कृषि प्रधान देश रहा हैं। आज भी भारत की साठ से सत्तर फीसदी आबादी गांवों में बसती हैं। लेकिन फिर भी गांवों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति बेहद चिंताजनक हैं। और सिर्फ गांवों की नहीं बल्कि शहरी इलाकों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का हाल भी वही हैं।

सरकारी आंकड़ो की ही माने तो देश के स्वास्थ्य केंद्रों में मूलभूत सुविधाओं की कमी के साथ साथ लगभग अस्सी फीसदी विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी हैं। बताते चले कि सरकार द्वारा जारी ग्रामीण स्वास्थ्य सांख्यिकी 2021-22 की रिपोर्ट बताती है कि देश में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं देने वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यकता की तुलना में लगभग अस्सी फीसदी विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है, जिनमें सर्जन, प्रसूति और स्त्री रोग विशेषज्ञ, फिजिशियन और बाल रोग विशेषज्ञ शामिल हैं।

आंकड़ो के मुताबिक 31 मार्च, 2022 तक देश में कुल 6064 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। जिनमें ग्रामीण क्षेत्रो में 5480 और शहरी क्षेत्रों में 584 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र काम कर रहे हैं। लेकिन इनमें जरूर की तुलना में 79.5 फीसदी विशेषग्यो की कमी हैं। जिनमे 83% सर्जन, 79% जनरल फिजिशियन, 82% बाल रोग विशेषज्ञ और 74% प्रसूति और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी हैं।

इनसब के अलावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में एक ऑपरेशन थिएटर, एक्स-रे, लेबर रूम और प्रयोगशाला सुविधाओं के साथ तीस बेड की सुविधा दी जाती है। लेकिन इन सब सुविधाओ से भी कई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र वंचित हैं।

बताते चलें की ये सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे का एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं जो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पीएचसी यानी प्रायमरी हेल्थ सेंटर के लिए रेफरल केंद्रों के रूप में काम करते हैं।

आज ग्रामीण क्षेत्रो की बस यह एक समस्या नहीं हैं । बल्कि ऐसे असंख्य समस्याओं को ग्रामीण और शहरी इलाकों के लोग झेल रहे हैं। जिनमे बिजली, पीने योग्य पानी, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अच्छी सड़के, रोजगार के साधन आदि समस्या शामिल हैं। इन समस्याओं के विषय मे आपने राजनीतिक पार्टियों को बात करते तो कई बार सुना होगा, लेकिन जमीनी स्तर पर काम देखना बहुत मुश्किल ।

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