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ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा संचालित सामाजिक, आर्थिक और जातिगत जनगणना की वेबसाइट पिछले दो महीने से अधिक समय से बंद हैं। रिपोर्ट के मुताबिक यह वेबसाइट बीते छह जनवरी, दो हजार चौबीस से बंद पड़ी हैं।
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ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा संचालित सामाजिक आर्थिक और जातिगत जनगणना की वेबसाइट पिछले दो महीने से अधिक समय से बंद हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू डॉट एसईसीसी डॉट गवर्नमेंट डॉट इन नामक वेबसाइट बीते छह जनवरी, दो हजार चौबीस से बंद पड़ी हैं।
मालूम हो की इस वेबसाइट में जनगणना से संबंधित कई प्रकार के आंकड़े उपलब्ध हैं और चुनाव से इतने समय पहले तक वेबसाइट का बंद रहना सरकार द्वारा अपनी नाकामियों को छुपाना हैं।
बताते चलें की साल दो हजार ग्यारह में भारत में आखरी बार जनगणना आयोजित की गई थी। जबकि कोरोना महामारी के चलते साल दो हजार इक्कीस की जनगणना अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई थी।
बीते डेढ़ सौ साल के इतिहास में ऐसा पहली बार है जब दशकीय जनगणना में देरी हुई हो।
साल दो हजार ग्यारह की जनगणना देश की पहली कागज रहित जनगणना थी, जो छह सौ चालीस जिलों में सरकार द्वारा इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मदद से आयोजित की गई थी।
इस जनगणना से यह पता चला था कि गांवों में रहने वाले हर तीन परिवारों में से एक भूमिहीन है और अपनी आजीविका के लिए शारीरिक श्रम पर निर्भर है।
इसके अलावा इस जनगणना ने ग्रामीण भारत में शिक्षा की खराब स्थिति का भी खुलासा किया, जिसमें यह पाया गया कि लगभग एक-चौथाई परिवारों में पच्चीस वर्ष से अधिक आयु का कोई भी साक्षर वयस्क नहीं है।
साल दो हजार ग्यारह की जनगणना से यह बात सामने आई की कैसे आज भी देश के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गो के लोग सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हुए हैं।
चुनावों के समय इन वेबसाइट्स का काफी उपयोग होता हैं। लोग कई प्रकार के डेटा इन सरकारी वेबसाइट्स से निकालते हैं। लेकिन आश्चर्य की बात है की सरकारी वेबसाइट का सर्वर पिछले दो महीनों से डाउन हैं। जबकि देश में लोकसभा चुनाव होने के हैं।
बताते चलें की इस पोर्टल के संचालन के लिए जिम्मेदार ग्रामीण विकास मंत्रालय ने इसके बंद होने के पीछे तकनीकी कारणों का हवाला दिया।
साथ ही मंत्रालय ने यह दावा किया कि वह यह सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है कि वेबसाइट फिर से चालू हो जाए।







