(बाएं से) प्रो. वी. हाँ । राव, सी. एन. मोहित गुरुजी, उपाध्यक्ष एच. आर. कर्णिक, कमलाकांत चित्रा, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर, एम. वी. चिटनीस और प्राचार्य वी. ह पाटणकर ।
डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर बड़े सपने देखने वाले थे । जीवन में अपने सभी सपनों को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने जीवन का बलिदान दिया । उनके अछूत ज्ञान में लोगों के सुधार के कई सपने थे । उन सपनों में से एक था इन लोगों के लिए एक विशाल कॉलेज होना ताकि शिक्षा इनके अज्ञानी निर्दोष विवेक को मिटा सके और कोई भी इनकी अज्ञानता का लाभ नहीं उठाएगा और इनका शोषण नहीं करेगा । केवल प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा से सामाजिक रूप से प्रगति नहीं होती । तो उच्च शिक्षा का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इससे उनमें आत्मविश्वास पैदा होगा और वह आत्मविश्वास उनकी प्रगति का पहला कदम है ।
डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने सोचा था कि उनके लोगो के लिए भी कॉलेज होना चाहिए । कई सालों से उनके मन में यह तूफान पैदा हुआ था । उम्मीद थी कि यह कॉलेज कई क्षेत्रों में नेता बनाएगा । इसके लिए वे सही समय और अवसर की प्रतीक्षा कर रहे थे उन्हें वर्ष 1944-45 में मिल गया था ।
मुंबई में हर साल मुंबई यूनिवर्सिटी की प्रवेश परीक्षा के लिए आने वाले छात्रों की संख्या बढ़ रही थी । 1944 में 41000 की हो गई । प्रवेश परीक्षा पास करने के बाद कॉलेज कम होने लगा । कई नए कॉलेज बनने शुरू हो चुके हैं लेकिन मुंबई शहर से बाहर हैं । मुंबई में इस दौरान कोई कॉलेज नहीं । इसलिए हर कॉलेज छात्रों को एडमिशन नहीं दे पाया ।
उस सही समय को देखते हुए डॉ. 20 जून 1946 को बाबासाहेब आंबेडकर ने सिद्धार्थ कॉलेज की स्थापना की । शुरुआती दिनों में सिद्धार्थ कॉलेज मरीन लाइन में बैरकों में भरा था । डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने 1946 में इस कॉलेज का दौरा किया था ।
सिद्धार्थ कॉलेज ने कई मामलों में रिकॉर्ड बनाए हैं, इनमें से कुछ बताया जाए ।
सिद्धार्थ कॉलेज मुंबई विश्वविद्यालयों से संबद्ध कॉलेज के इतिहास में पहला कॉलेज है । सिद्धार्थ कॉलेज जब शुरू हुआ था तब पहला साल था B ए और बी । सभी कक्षाएं SC के लिए खुल गईं । अन्य कॉलेजों में ऐसा तरीका नहीं था । उन्होंने दो कक्षाएं शुरू की और दूसरी कक्षा खाली थी । हर साल बाद कक्षाएं बढ़ती जा रही हैं । सिद्धार्थ कॉलेज ने इस पौराणिक परंपरा को तोड़कर पूरे कॉलेज के रूप में जन्म लिया था । यह पहला रिकॉर्ड है ।
सिद्धार्थ कॉलेज का जन्म एक बच्चे के रूप में नहीं बल्कि एक अच्छे मजबूत युवक के रूप में हुआ था । सिद्धार्थ कॉलेज में प्रथम वर्ष में छात्रों की संख्या बढ़कर 1400 हो गई थी । इतिहास में रिकॉर्ड संख्या वाले कॉलेजों का इतिहास उस समय किसी अन्य कॉलेज में नहीं बना । यह दूसरा रिकॉर्ड है ।
भारत आजादी के कगार पर खड़ा था । हममें किसी भी स्वतंत्र राष्ट्र की रक्षा करने की शक्ति होनी चाहिए । वो ताकत है भु सेना, नौ सेना और वायु सेना । भारत के रक्षा मंत्री सरदार बलदेव सिंह ने घोषणा की थी कि विश्व विद्यालय के छात्रों को सैन्य शिक्षा लेनी चाहिए । उस समय यूनिवर्सिटी ऑफिसर ट्रेनिंग कोर की स्थापना हुई थी । (आज का एनसीसी । )
इस कोर की संख्या सीमित होने के बावजूद कई कॉलेजों को मूल में प्रतिनिधित्व नहीं मिला, लेकिन सिद्धार्थ कॉलेज ने पहले साल में टीम की स्थापना की । यह तीसरा रिकॉर्ड है ।
इसके अलावा चौथा और सबसे महत्वपूर्ण रिकॉर्ड है । सरकारी सेवा में लोगों के लिए विश्वविद्यालय में शिक्षा के अवसर प्रदान किए । उस समय कला शाखा की कक्षा 7:30 बजे से 10:45 बजे तक भरी जाती थी ताकि नियोक्ताओं को अपनी कक्षा में आना और फिर अपनी सेवाओं में जाना संभव हो सके । ऐसे शिक्षाविद उस समय 600 से अधिक नियोजित छात्र थे जो बाद में प्रमुख अधिकारी बने ।
ये चार विक्रम सिद्धार्थ कॉलेज ने किया है । हर चीज को एक लेख में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता । अभी बहुत कुछ शेयर करना बाकी है । डॉ की कुछ तस्वीरें यहां पोस्ट करूँगा बाबासाहेब आंबेडकर हर उस लेख में जो सिर्फ सिद्धार्थ कॉलेज से संबंधित है । आज की पहली फोटो । जो कॉलेज प्रांगण में है जो मरीन लाइन्स में बैरक में शुरू हुआ था ।

(अपूर्ण)
सुभाष वानखेडे






