किसान आंदोलन को सोमवार को 200 दिन पूरे हो गए है। 200 दिन से किसान दिल्ली की दहलीज पर कृषि कानून का विरोध कर रहे हैं। दिल्ली में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे हैं। गाजीपुर बॉर्डर, सिंघु बॉर्डर और टिकरी बॉर्डर पर किसान तीनों कृषि कानूनों को रद्द कराने के लिए आंदोलन कर रहे हैं। देश के अन्य हिस्सों में भी किसान आंदोलन कर रहे हैं।
केंद्र के तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने और एमएसपी को कानूनी गारंटी की बात आगे बढ़ाने के लिए किसान संगठनों ने एलान किया है कि वे भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार के नेताओं के निजी कार्यक्रमों में बहिष्कार नहीं करेंगे।
बता दें कि जनवरी से इन नेताओं के बहिष्कार के चलते कई बार सरकार और किसानों के बीच सीधे टकराव की घटनाएं हुई। इस बीच पंजाब और हरियाणा में कई जगहों पर किसान संगठनों ने बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के नेताओं का सामाजिक बहिष्कार करना शुरू कर दिया था।
आपको बता दें कि किसानों के राजनेताओं पर इतना गुस्सा था कि पंजाब में भाजपा के अबोहर से विधायक को सार्वजनिक स्थल पर निर्वस्त्र कर दिया गया था। किसानों के उग्र गुस्से के कारण पंजाब में भाजपा और हरियाणा में भाजपा जजपा के कई नेता लंबे समय से मुश्किलों का सामना कर रहे थे।
आपको बता दें कि हरियाणा में सत्तापक्ष बीजेपी के खिलाफ इतना गुस्सा भड़का हुआ है कि उसकी आग की दाह हरियाणा के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री को भी लगी। आपको बता दें कि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को जनवरी में एक कार्यक्रम में पहुंचना मुश्किल हुआ था। किसान आंदोलको के गुस्से के कारण उनका हेलीकाप्टर ही नहीं उतर पाया था। तो हाल ही उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला किसानों के विरोध के चलते अपने निवार्चन क्षेत्र में एक कार्यकर्ता के यहां निजी कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए थे।
नवोदय टाइम्स में छपे योगेंद्र यादव के लेख के अनुसार यह दिखाई दे रहा है कि अब किसान नेताओं ने अपने दिशा निर्देश बदलने शुरु कर दिए हैं। नयी रणनीति के तहत बीजेपी और उसके सहयोगियों के विधायकों, सांसदों और अन्य प्रतिनिधियों के खिलाफ उनका विरोध हरियाणा और अन्य राज्यों में जारी रहेगा, लेकिन यह विरोध केवल सरकारी और राजनीतिक कार्यों के लिए होगा, निजी आयोजनों के लिए नहीं होगा। मिले संकेतों के अनुसार ऐसा करके किसान संगठन बीजेपी के अंदर से ही पीएम नरेंद्र मोदी पर दबाव लाना चाहते है।
सरकार द्वारा किसानों को रोकने की कोशिशों के बावजूद हरियाणा के किसानों का दिल्ली की ओर कूच बढ़ा है। भारतीय किसान यूनियन की हरियाणा इकाई के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी के मुताबिक 15 जून से होने वाली धान की बुआई के बाद प्रदेश के हजारों किसानों का जमावड़ा दिल्ली की सीमाओं पर होगा।आपको बता दें कि किसान सगठनों ने दिल्ली की बॉर्डर पर पूरी तयारी कर ली है। घोषित कार्यक्रमों के अनुसार 24 जून को गुरु कबीर की जयंती मनाई जाएगी और उनके विचारों को सांझा किया जाएगा।
बता दें की किसानों एवं सरकार के बीच 11 दौर की बातचीत के बाद भी कोई हल अभी तक नहीं निकला है। किसान संगठनों और सरकार के बीच आखिरी बैठक 22 जनवरी को हुई थी। इसके बाद से बातचीत बंद है। अब किसान संगठन देश राष्ट्रपति को ज्ञापन देनेवाले है।
किसान संगठन के आगे की निति के अनुसार सभी राज्यों के राज भवनों के बाहर 26 जून को धरने दिए जाएंगे। सभी राज्यपालों को ज्ञापन देकर आंदोलन की मांग बताई जाएगी और अघोषित आपातकाल की वर्तमान परिस्थिति में नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन ना हो; यह भी रेखांकित किया जाएगा।







