गैर ब्राह्मण को ब्राह्मण जाति का अधिकार नहीं मिल सकता। कथा वाचक यामिनी साहू को फोन पर दी गई धमकियाँ। फोन कॉल की रिकॉर्डिंग हुई वायरल। पिछड़े वर्ग से उठ रही हैं गंभीर प्रतिक्रियाएं।
वैसे तो छत्तीसगड़ राज्य के लिए ब्राह्मण विरुद्ध गैर-ब्राह्मण विवाद नया नहीं है। ब्राह्मणवाद के वर्चस्व को हमेशा यहां विरोध होते आ रहा है। एक और गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। खास करके अन्य पिछड़े वर्ग के लिए अब यह परीक्षा की घड़ी है।
पिछले कुछ वर्षों से कथा वाचक के रूप में प्रख्यात हुई यामिनी देवी अर्थात यामिनी साहू को बीते कुछ दिनों से तथाकथित पंडित, आचार्य और उपाध्यायों के धमकीभरे फोन आयें की वह कथा वाचन न करें।
एक भूदेव ने कहा की यामिनी साहू को गैर ब्राह्मण होने के कारण कथा कहने का अधिकार नहीं है। यह केवल ब्राह्मणों का अधिकार है।
यहीं नहीं दूसरे भूदेव के अनुसार एक गैरब्राह्मण को व्यास मंच पर बैठकर कथा कहने का अधिकार नहीं है। यह काम गैर ब्राह्मणों का नहीं है, चाहे तो तो वह मुजरा या और कुछ कर सकते हैं।
फोन पर लगातार आ रही धमकियों के कारण घबराई यामिनी साहू ने पुलिस में शिकायत दर्ज की। पुलिस ने सुरक्षा भी प्रदान की।
हालांकि यामिनी देवी ने इस बात पर जोर दिया है कि उनके धार्मिक पुस्तकों के अनुसार उन्हे कथा कहने का अधिकार है तथा भारत का संविधान का संविधान भी उन्हे यह अधिकार देता है और रक्षा करता है।
लेकिन खुद को गायत्री परिवार की कहने वाली यामिनी देवी साहू की बात तथाकथित पंडित, आचार्य और उपाध्यायों को रास नहीं आई।
आपको बता दें कि फोन करने वाले लोग खुले आम यामिनी साहू को जाति का नाम लेकर, गैर ब्राह्मण होने की बात कह रहे हैं। जो कार्य ब्राह्मणों का है उसमें हस्तक्षेप नहीं करने की बात कह रहे हैं।
जाहीर है कि ब्राह्मण वर्ग उस व्यक्ति को अपना अधिकार नहीं देना चाहता जो ब्राह्मण जाति में जन्मा नहीं हो।
संविधान ने दिए अधिकार के कारण पेशे से शिक्षिका यामिनी साहू को कोई भी उनके धार्मिक अधिकार से वंचित नहीं कर सकता है।
संविधान ने समानता का अधिकार दिया है लेकिन धर्म के आधार पर पिछड़े वर्ग को जिस तरह से शूद्र, नीच कहकर अपमानित किया जा रहा है क्या उसे पिछड़ा वर्ग महसूस कर पाएगा?








