नागरिक कब तक ढ़ोते रहेंगे मैला और मरेंगे सीवर में?

महाराष्ट्र में तीन, बिहार में दो सफाईकर्मियों की मौत, अन्य गंभीर। विगत दस वर्षों में 631 सफाईकर्मियों ने गवाईं जान।

खबर बहुत ही दुःखद हैं क्योंकि महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले और बिहार के पूर्वी चम्पारण में सफाई के दौरान पांच लोगों की मौत हो गयी हैं। जबकि कुछ लोग गंभीर अवस्था मे हैं।

हमें लगता है कि सफाई के दौरान मरने वाले लोगो की जाति बताते की कोई जरूरत नहीं हैं, क्योंकि इस देश में आज भी जाति के आधार पर लोगो को काम दिया जाता हैं और साफ सफाई का काम इस देश के मूलनिवासियो अर्थात एससी, एसटी और ओबीसी को ही करने पर मजबूर किया जाता हैं।

पहली घटना महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले की हैं जहाँ भूमिगत सीवेज टैंक की सफाई के दौरान वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के तीन कर्मियों की दम घुटने से मौत हो गई। जिसकी जानकारी बीते बुधवार खुद पुलिस ने दिया हैं ।

इसकी जानकारी देते हुए राजुरा थाने के निरीक्षक चंद्रशेखर बहादुर ने बताया कि बल्लारपुर क्षेत्र के शस्ती-धोपाटला कस्बे में मंगलवार को हुई इस घटना में दो अन्य लोग बेहोश हो गए। उन्होंने कहा कि सुबह करीब नौ बजे चार कर्मचारी दस फुट गहरे टैंक को साफ करने के लिए उसमें घुसे। लेकिन, जब वे काफी देर तक बाहर नहीं आए, तो कुछ अन्य श्रमिकों ने स्थानीय लोगों को इसकी जानकारी दी। जिसके बाद टैंक को ढकने वाले स्लैब को हटाने के लिए जेसीबी मशीन का इस्तेमाल किया गया। बाद में रामपुर ग्राम पंचायत का एक सफाईकर्मी भी टैंक में उतर गया, लेकिन वह भी कुछ देर बाद बेहोश हो गया। स्थानीय लोगों ने उसे और चार अन्य श्रमिकों को बाहर निकाला और अस्पताल भेजा।

लेकिन बाद में पुलिस अधिकारी ने बताया कि डॉक्टर ने राजू जंजारला और सुभाष खंडालकर नामक दो मजदूरों को मृत घोषित कर दिया हैं। जबकि एक अन्य श्रमिक सुशील कोर्डे को गंभीर हालत में नागपुर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई।

पुलिस के बयान के अनुसार, सफाईकर्मी शंकर अंदगुला और एक अन्य कर्मचारी प्रमोद वावितकर का इलाज चंद्रपुर में चल रहा । जहा उनकी हालत भी गंभीर बनी हुई हैं।

अगली घटना बिहार के पूर्वी चम्पारण के मधुबन क्षेत्र से निकल कर आई हैं। बीते मंगलवार यहाँ नवनिर्मित शौचालय की टंकी की शंटरिंग खोलने के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से चार मजदूर बेहोश हो गए। जिसके बाद इलाज के दौरान दो मजदूरों की मौत हो गई जबकि दो की स्थिति नाजुक बनी हुई है।

एक न्यूज पोर्टल की वेबसाइट के अनुसार, पुलिस ने बताया कि गांधी नगर मोहल्ले में विश्वनाथ साह के मकान में शौचालय की टंकी बनी थी। मंगलवार की शाम शौचालय की टंकी का शंटरिंग खोलने के लिए एक मजदूर राजू सीढ़ी के सहारे टंकी में उतरा, अंदर जाने के बाद जब कोई हलचल नहीं हुआ तो दूसरा मजदूर धीरज भी टंकी में प्रवेश कर गया। इसके बाद घर वालों ने शोर मचाना शुरू कर दिया। शोर सुनकर पास के ही एक साइकिल दुकान पर बैठा मोहम्मद मासूम दौड़ते आया और दोनों को बचाने के लिए अंदर घुस गया। बाद में ग्रामीण इकट्ठे हो गए और एक युवक ने रस्सी के सहारे चारों को एक-एक कर बाहर निकाला।

ग्रामीणों की मदद से चारों को अस्पताल ले जाया गया। जहाँ मधुबन के रहने वाले शिवम और मोहम्मद मासूम की इलाज के दौरान मौत हो गई जबकि राजू और धीरज को सदर अस्पताल में प्रारंभिक इलाज के बाद एक निजी अस्पताल में रेफर कर दिया गया है। जहा इन दोनों की हालत गंभीर बनी हुई हैं।

आपको बता दें कि राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (NCSK) के वर्ष 2020 के डेटा के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में भारत में सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान कुल 631 लोगों की मौत हुई है।

आपको यह भी बता दें कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले पाँच वर्षों में मैला ढोने से होने वाली मौतों की सबसे अधिक संख्या वर्ष 2019 में देखी गई। सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान 110 मजदूरों की मौत हो गई।

यह तो आधिकारिक रूप से इकठ्ठा हुए आंकड़े हैं। लेकिन देशभर में न जानें ऐसे हजारों राजू, सुभाष, सुशील, मोहम्मद और शिवम हैं जिनकी सीवर, सेफ्टिक टैंक, कंस्ट्रक्शन वर्क, फैक्टरी में जहरीली गैसों के कारण मौत हो रही है। इनके पास उचित सुरक्षा सुविधा और उपकरण भी नहीं होते हैं।

NCSK की रिपोर्ट 2020 के अनुसार सीवर सफाई के कारण मृत्यु होने के मामले में 10 लाख रुपये मुआवजा राशि मिलनी चाहिए।

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